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कीटों ने ढाया कहर

देश में शुष्क मौसमी हालात ने पौधों का भक्षण करने वाले व्हाइटफ्लाई जैसे कीटों के संक्रमण का कहर पैदा हो गया है | इस कारण महाराष्ट्र और पंजाब सरकार ने कपास किसानों को हानिकारक कीटों से बचने के लिए कीटनाशकों के छिडकाव करने को कहा है | देश के अधिकांश भागों में प्रचुर मात्रा में वर्षा होने के बावजूद पंजाब और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मॉनसून असामान्य रहा है। इसी कारण इन राज्यों की सरकारों को कीट आक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने पड़ रहे हैं।  

पंजाब के कृषि आयुक्त बलविंदर सिंह सिद्धू ने रॉयटर्स को बताया कि राज्य के करीब छह जिलों में कम वर्षा की वजह से हम कुछ चिंतित हैं और इसी कारण हम किसी संभावित कीट हमले से लडऩे में किसानों की मदद के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी संक्रमण से बचने के लिए किसान कीटनाशकों का ज्यादा छिड़काव करें। 

2002 में जीन संवर्धित किस्म (जीएम) को अनुमति दिए जाने के बाद से भारत के कपास उत्पादन में चार गुना उछाल आई है। इस तरह भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक और फाइबर का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत में उत्पादित लगभग पूरी कपास  मॉनसैंटो की प्रयोगशाला में विकसित बीजों से उपज रही है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार भारत 1.1-1.2 करोड़ हेक्टेयर में कपास की खेती करता है। अक्टूबर से शुरू होने वाले सीजन के दौरान 2016-17 में 3.363 करोड़ गांठ (1 गांठ = 170 किलोग्राम) फसल कटाई की संभावना है। यह पिछले साल की 3.378 गांठ की तुलना में कुछ कम है। 

हालांकि पंजाब कपास का प्रमुख उत्पादक नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र इसका दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत न होने की वजह से अपना नाम जाहिर न करते हुए कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्य प्रशासन ने विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में फसल के कीट संक्रमण के संबंध में किसानों से अगले 8-10 दिनों के लिए सतर्क रहने के लिए कहा है। व्हाइटफ्लाई कीट ने 2015 में पंजाब और उसके पड़ोसी राज्य हरियाणा में फसल पर हमला किया था।



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