सरकार की पहल से कृषि रसायन कंपनियों में हलचल...

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संबंधित इन्वेंट्री समायोजन और कमजोर अंतर्राष्ट्रीय मांग की वजह से वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में सुस्ती के बाद कृषि रसायन कंपनियां दलाल पथ पर फिर से मजबूत हो रही हैं। इसका अंदाजा रैलिस और कोरोमंडल इंटरनैशनल जैसे शेयरों में आई ताजा तेजी से लगाया जा सकता है। भविष्य में ब्रोकरों को अच्छे मॉनसून, मजबूत न्यूनतम समर्थन मूल्य और नीतिगत समर्थन से बिक्री और राजस्व वृद्घि में सुधार की उम्मीद दिख रही है जिससे कृषि आय को बढ़ाने में मदद मिलेगी।  

इस क्षेत्र में ताजा नीतिगत उपायों की वजह से कई सेगमेंटों के बीच उर्वरक कंपनियां प्रमुख लाभार्थियों में शामिल होंगी। इन नीतिगत उपायों में उर्वरक कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2017 की बकाया सब्सिडी का भुगतान (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) भी शामिल है। इसके अलावा सरकार उर्वरकों के लिए प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण (डीबीटी) योजना (किसानों के खाते में सब्सिडी सीधे तौर पर स्थानांतरित करने) की पेशकश के लिए तैयार है। सब्सिडी के मुद्दे को तेजी से सुलझाया जा रहा है। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का कहना है, 'चूंकि उर्वरक सेक्टर के अधिक उदार बनने और निर्माताओं को सब्सिडी भुगतान तुरंत मिलने से आपूर्ति में सुधार लाने में मदद मिलेगी।'  

उनका कहना है कि यह बदलाव ऐसे समय में दिखा है जब चीन के कारोबार निर्यात बाजारों से बाहर हो रहे हैं, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए अवसर पैदा हो रहे हैं। ढांचागत बदलावों को देखते हुए क्रेडिट सुइस कोरोमंडल इंटरनैशनल और जीएसएफसी जैसी कंपनियों को पसंद कर रही है। कोरोमंडल इंटरनैशनल को उर्वरक के अलावा अपने तेजी से बढ़ रहे कृषि रसायन पोर्टफोलियो से भी लाभ मिलेगा। गैर-उर्वरक व्यवसाय की अधिक भागीदारी से कंपनी-आधारित मार्जिन और प्रतिफल अनुपात सुधारने में मदद मिलेगी। कंपनी के उर्वरक सेगमेंट का लाभ (कुल परिचालन लाभ का 62 प्रतिशत) वित्त वर्ष 2020 तक सालाना 12 फीसदी की दर से बढऩे का अनुमान है। ऐक्सिस कैपिटल के विश्लेषकों के अनुसार कंपनी के लिए इस सेगमेंट के लाभ को बेहतर क्षमता इस्तेमाल से मदद मिलेगी।  

एग्रोकेमिकल सेगमेंट में, रबी फसलों के लिए अच्छे परिदृश्य को देखते हुए धारणा मजबूत बनी हुई है। इलारा कैपिटल को इस सेक्टर की वृद्घि वित्त वर्ष 2018 में 8-10 फीसदी रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि 929 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ यूपीएल और 260 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ रैलिस इंडिया अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को देखते हुए प्रतिस्पर्धियों को मात देने में सफल रहेंगी।  

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से शीर्ष 10 एग्रोकेमिकल शेयरों में ब्रोकरों का सबसे ज्यादा पसंदीदा यूपीएल है। भारत और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों, दोनों में इस कंपनी का परिदृश्य मजबूत बना हुआ है। 970 रुपये का कीमत लक्ष्य चालू स्तरों से इस शेयर के लिए 33 फीसदी की तेजी को दर्शाता है। निर्यात मोर्चे पर कुछ चिंताएं भी हैं क्योंकि पहली छमाही के दौरान वृद्घि सुस्त लैटिन अमेरिकी व्यवसाय और मुख्य रूप से मौद्रिक समस्याओं की वजह से धीमी रही है। चूंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय यूपीएल के कुल राजस्व के 60 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए पहली छमाही में मौद्रिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए विश्लेषकों ने अपनी वृद्घि के अनुमान को 12-13 फीसदी से घटाकर अब 8-10 फीसदी कर दिया। हालांकि विश्लेषकों को भविष्य में वित्त वर्ष 2019 में आय में तेजी का अनुमान है। यह तेजी कृषि रसायन के मजबूत पोर्टफोलियो और बीज (एडवांटा पोर्टफोलियो के अधिग्रहण की मदद से) और ब्राजील में बायर के साथ गठजोड़ पर आधारित है। घरेलू क्षेत्र में देर से बारिश, खासकर दक्षिणी राज्यों में, रबी फसलों के परिदृश्य में सुधार आया है। 

अन्य कंपनियों में मोनसैंटो इंडिया विश्लेषकों की मुख्य पसंद बनी हुई है और इस बहुराष्टï्रीय कंपनी के लिए मौजूदा स्तरों से लगभग 12-15 फीसदी की तेजी का लक्ष्य रखा गया है। यह तेजी उसके नवीनतम उत्पाद पोर्टफोलियो, कॉर्न सेगमेंट और हर्बीसाइड्ïस में नए लॉन्च की मदद से हासिल होने की संभावना है।  धानुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और रैलिस इंडिया अन्य पसंदीदा शेयरों में शामलि हैं हालांकि इनमें बाद के दो शेयर महंगे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। धानुका के लिए, इंसेक्टीसाइड्ïस, फंगीसाइड्ïस और हर्बीसाइड्ïस सेगमेंटों में वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में पांच उत्पाद पेशकशों से वृद्घि की रफ्तार मजबूत होने का अनुमान है। भविष्य में गन्ना सीजन में इसके हर्बीसाइडड सेम्प्रो के लिए अच्छी मांग देखी जा सकती है। इस शेयर के कीमत लक्ष्य से मौजूदा स्तरों से 20 फीसदी की तेजी का संकेत मिलता है। 

सूत्र : बिजनेस स्टैंडरड

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