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विश्व मधुमक्खी दिवस पर लोगों को मिली जानकारी

विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन ने कहा था कि अगर मधुमिक्खयां पृथ्वी से समाप्त हो जायें तो चार साल में मानव जाति का अस्तित्व दुनिया से मिट जायेगा। उन्होंने यह बात मधुमक्खियों के द्वारा किये जाने वाले पर परागण को लेकर कही थी, जो खाद्यान्न उत्पादन के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। परागण का काम हवा के जरिये भी होती है, पानी के द्वारा भी, लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका मधुमक्खियां की होती हैं।
राजधानी दिल्ली में इस मौके पर 18 अगस्त को वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और कृषि मंत्रालय की ओर से पूसा संस्थान में कार्यक्रम आयोजित किये गये। पूसा में आयोजित कार्यक्रम में देश भर से मधुमक्खीपालन क्षेत्र से जुड़े किसानों ने भाग लिया। नीति आयोग में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन वहां के प्रधान सलाहकार रतन पी वाटल ने किया। इसमें आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों को शहद के साथ साथ मधुमक्खीपालन के फायदों के बारे में बताया गया।

राष्ट्रपति भवन में भी 19 अगस्त को एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम मंत्री कलराज मिश्र, राज्यमंत्री गिरिराज सिंह, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के सीईओ अनिल कुमार अन्य अधिकारीगण और स्कूली बच्चे उपस्थित थे। 

इस मौके पर मधुमक्खीपालन क्षेत्र के कई उत्पादों की प्रदर्शनी भी वहां लगाई गई जिसका राष्ट्रपति ने अवलोकन किया और उनके बारे में जानकारियां लीं। राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में लगाई गई लगभग 150 मधुमक्खी कॉलोनियों से भी मधुमक्खीपालन क्षेत्र के विभिन्न उत्पादों को तैयार कराने में रुचि दिखाई। इसके अलावा देश के लगभग 40 कृषि विश्वविद्यालयों और देश के लगभग सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में भी इसे मनाया गया।

मधुमक्खीपालन दिवस मनाने की शुरुआत अमेरिका में वहां के मधुमक्खीपालकों ने की थी बाद में इसका विश्व दिवस मनाने का फैसला किया गया और भारत में पहली बार पिछले वर्ष इसे मनाया गया था। विश्व मधुमक्खी दिवस अगस्त महीने में तीसरे शनिवार को मनाया जाता है। इसे मनाने का मकसद लोगों में मधुमक्खीपालन के लाभ के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

मधुमक्खियां यूकीलिप्टस, लीची, जामुन, सरसों, अजवाइन, विभिन्न फूलों के रस से शहद तैयार करती हैं और पैदावार में भारी बढ़ोतरी करती हैं। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य देवव्रत शर्मा ने भाषा को बताया, ‘‘अगर हम खेती के साथ साथ मधुमक्खीपालन को बढ़ावा दें तो हमारी दलहनों और तिलहनों के मामले में आयात पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

इसके साथ ही हम शुद्ध निर्यातक देश बनने की काबिलियत हासिल कर सकते हैं। ’’ उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसलिए मधुमक्खीपालन को बढ़ावा दिये जाने पर जोर दे रहे हैं क्योंकि इसके जरिये खेती के समान रकबे में, उर्वरक की मात्रा को बढ़ाये बगैर, समान श्रमबल और कम से कम कीटनाशकों के उपयोग के साथ उत्पादकता में कई गुना वृद्धि संभव है।

विश्व मधुमक्खीपालन दिवस पर कृषि मंत्रालय की ओर से जारी किये गये संकल्प में वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के साथ साथ तमाम अन्य लक्ष्यों को हासिल करने के अलावा किसानों को मधुमक्खीपालन के जरिये उत्पादकता बढ़ाने और वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खीपालन को अपनाने का संकल्प कराया गया।

English Summary: Information about people on the World Bee Day

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