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ग्रामीण डाक नेटवर्क को वितरण और लॉजिस्टिक केन्द्र बनाने के लिए नया स्वरूप और मजबूती दी जानी चाहिएः उपराष्ट्रपति



उपराष्ट्रपति एम. वकैया नायडू ने भारतीय डाक सेवा के अधिकारियों से अपील की है कि वे ग्रामीण डाक नेटवर्क को वितरण और लॉजिस्टिक केन्द्र बनाने के लिए नेटवर्क को नया स्वरूप दें और मजबूत बनायें. उपराष्ट्रपति ने यह बात भारतीय डाक सेवा की रफी अहमद किदवई डाक अकादेमी के प्रोबेशनरों से बातचीत करने के दौरान कही.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि वे भारत के सबसे पुराने और व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है. व्यापक नेटवर्क के साथ डाकघर वित्तीय समावेशन की चुनौतियों को पूरा कर सकते हैं, विशेषकर डाक बचत योजना और बीमा योजना उपलब्ध कराकर समाज के कमजोर वर्गों के बीच. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों की जिंदगी में परिवर्तन लाकर इस परिवर्तन का वाहक बने. उन्होंने कहा कि ग्रामीण डाकघर आईसीटी केन्द्र और खुदरा केन्द्र बन सकते हैं. इससे ग्रामीण आबादी को काफी लाभ होगा.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि डाकघर ग्रामीण इलाकों में रह रहे लोगों को संचार सेवाएं प्रदान करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि डाकघर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क के रूप में काम करते हैं. डाकसेवक अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाला पहला व्यक्ति होता है और यह बेहतरीन सेवा है जो दूरदराज के अंतिम व्यक्ति को मदद पहुंचाती है. उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों को भारतीय आबादी को विश्वस्तरीय सेवाएं प्रदान करने के लिए नए विचारों के साथ नवाचारी बनने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि डाक टिकट की ऑनलाइन बिक्री, गंगा जल वितरण, डाकघर पासपोर्ट सेवा केन्द्र तथा आधार नामांकन तथा नवीकरण केन्द्रों ने लोगों की सुविधाओँ को सुनिश्चित किया है. उन्होंने कहा कि अधिकारी हमेशा नये क्षेत्रों की पहचान करते रहे जहां डाकघर गुणवत्ता सेवा में बदलाव ला सकते हैं.



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