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HAU ने विकसित की सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म RHH-2101, जानें विशेषताएं

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म RHH-2101 विकसित की है, जो 28-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है और लगभग 40% तेल सामग्री रखती है. यह 142 दिन में पकती है तथा पुरानी किस्मों से अधिक उत्पादन देती है. सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने और तिलहन उत्पादन में वृद्धि में सहायक होगी.

KJ Staff
HAU mustard hybrid variety RHH 2101
Mustard Hybrid Variety RHH 2101

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म RHH-2101 विकसित कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. यह हाइब्रिड किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए उपयोगी सिद्ध होगी और देश में तेल के आयात को कम करने में अह्म भूमिका निभाएगी. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने विकसित की गई इस उन्नत किस्म के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी है.

कुलपति प्रो काम्बोज ने बताया कि हकृवि के सरसों वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस हाइब्रिड किस्म को हाल ही में गजट अधिसूचित किया गया है. यह हाइब्रिड किस्म हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों में सरसों की पैदावार को बढ़ाने में एक वरदान सिद्ध होगी.

इस किस्म को अखिल भारतीय समन्वित सरसों एवं राई अनुसंधान प्रोजेक्ट के तहत तीन साल गहन परीक्षण के बाद जारी किया गया है. यह किस्म 28 से 30 किवंटल प्रति हेक्टेयर तक औसत पैदावार देती है. पुरानी किस्म आरएच 749 की तुलना में 14.5 प्रतिशत, डीएमएच-1 से 11 प्रतिशत व प्राइवेट कंपनी हाइब्रिड 45546 की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक पैदावार देने में सक्षम है.

कुलपति ने बताया कि अधिक उपज क्षमता और उच्च तेल मात्रा के कारण यह हाइब्रिड किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय होगी इससे न केवल तिलहन उत्पादन और बाजार में वृद्धि होगी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा.

कुलपति ने वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट कार्य की सराहना करते हुए बताया कि इस सरसों टीम को पिछले 12 सालों में चार बार उत्कृष्ट कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र अवार्ड से नवाजा जा चुका है. उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भविष्य में भी नई और उन्नत किस्में विकसित कर देश के तिलहन उत्पादन और कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे.

पैदावार के साथ तेल की मात्रा भी अधिक

अनुसंधान निदेशक डॉ राजबीर गर्ग ने आरएचएच 2101 की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि यह किस्म 142 दिन में पककर तैयार हो जाती है और 28 से 30 किवंटल प्रति हेक्टेयर तक औसत उपज देती है. इस किस्म में शाखाओं की संख्या अधिक होती है तथा प्रति फलियों में दानों की संख्या भी ज्यादा होती है. जिसके कारण इसकी उपज क्षमता अन्य उन्नत किस्मों की तुलना में अधिक है. इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं. और इनमें लगभग 40 प्रतिशत तेल अंश पाया जाता है.

तिलहन अनुभाग देश के अग्रणी अनुसंधान केंद्रों में शामिल

विश्वविद्यालय के सरसों वैज्ञानिक अब तक सरसों और राई की 25 उन्नत किस्में तथा एक हाइब्रिड किस्म विकसित कर किसानों तक पहुंचा चुके हैं जिनमें से अधिकांश किस्म की खेती अन्य राज्यों के किसानों द्वारा भी की जा रही है. हाइब्रिड किस्म के प्रजनक डॉ. राम अवतार ने बताया कि इस सरसों टीम ने गत 6 सालों में इस किस्म के अलावा अलग-अलग परिस्थितियों के लिए पांच किस्में विकसित की है जिनमें से आरएच 725 आरएच 1424 व आरएच 1975 किसानों के बीच बहुत ही लोकप्रिय किस्में है तथा उनके बीज की अन्य राज्यों में बहुत ज्यादा मांग है.

हाइब्रिड किस्म को विकसित करने में इन वैज्ञानिकों का रहा योगदान

इस नई किस्म को विकसित करने में सरसों वैज्ञानिक डॉ राम अवतार, डॉ नीरज कुमार, डॉ मंजीत सिंह, डॉ. अशोक कुमार और डॉ सुभाष चंद्र का अह्म योगदान रहा. इस अनुसंधान कार्य में डॉ राकेश पूनिया, डॉ दिलीप कुमार, डॉ निशा कुमारी, डॉ विनोद गोयल, डॉ श्वेता, डॉ महावीर बिश्नोई और डॉ राजवीर सिंह का भी सहयोग रहा.

English Summary: HAU mustard hybrid variety RHH 2101 features yield benefits Published on: 19 March 2026, 05:17 PM IST

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