भारत में एलपीजी गैस की बड़ी परेशानी सामने आ रही है और एलपीजी गैस की कीमत आसमान को छू रही है. ऐसे में अब बायोगैस यानी गोबर गैस एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प बनकर सामने आ रहा है. यानी की अब घर पर ही छोटा बायोगैस प्लांट लगाकर आसानी से खाना बनाने की गैस को तैयार किया जा सकती है और सरकार ऐसे संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए अनुदान भी मुहैया करवा रही है. अधिक जानकारी के लिए लेख को पूरा पढ़ें..
क्या होता है बायोगैस प्लांट?
बायोगैस प्लांट एक ऐसा संयंत्र है, जिसकों बनाने के लिए गाय-भैंस के गोबर और रसोई के जैविक कचरे को एक बंद टैंक में सड़ाया जाता है. इस प्रक्रिया के बाद मीथेन गैस बनती है, जिसे पाइपलाइन के जरिए रसोई तक पहुंचाया जाता है और यहीं गैस एलपीजी गैस की तरह खाना बनाने में इस्तेमाल की जा सकती है.
वहीं, ग्रामीण इलाकों में पहले भी गोबर गैस का उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन अब नई तकनीक और सरकारी योजनाओं के कारण इसे फिर से बढ़ावा दिया जा रहा है.
सिर्फ कुकिंग गैस ही नहीं, कई और फायदे
बायोगैस संयंत्रों का उपयोग केवल खाना बनाने तक ही नहीं है इन कामों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है-
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पानी गर्म करने के लिए
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छोटे स्तर पर रोशनी की व्यवस्था के लिए
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ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के अन्य छोटे उपयोगों के लिए
इसके अलावा, इस प्लांट से निकलने वाली स्लरी (अवशेष) खेतों के लिए बहुत अच्छी जैविक खाद मानी जाती है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करती है. इसलिए सरकार इन बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा दे रही है.
किन ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ सकती है लोकप्रियता?
सरकार बायोगैस प्लांट को अधिक बढ़ावा दें रहे हैं, जिससे एलपीजी गैस की खपत कम होगी और साथ ही इस प्लांट से निकलने वाली स्लरी (अवशेष) खेतों के लिए बहुत अच्छी जैविक खाद के रुप में काम आ सकेंगी. वहीं अगर राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन करते हैं. ऐसे में यह लोग बायोगैस प्लांट लगाते हैं तो काफी फायदा पा सकते हैं.
सरकार दे रही अनुदान
भारत सरकार का नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय छोटे बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है. साथ ही इस योजना के तहत 1 से 25 घन मीटर क्षमता तक के बायोगैस प्लांट लगाने पर ही सब्सिडी की सहायता मिलती है.
अगर आप भी बायोगैस प्लांट लगाने की सोच रहे हैं तो प्लांट की क्षमता अनुसार 9,800 रुपये से लेकर 70,400 रुपये तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता मिल सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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