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नए फ्लेवर में वापस आएगा पुराना दौर, फिर शुरू होगी गोबर से लिपाई

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गोबर से घरों के आंगन, रसोई या दिवारों को पोतना अब बीते दिनों की बाते हो गई है. अब के जमाने में गोबर की जगह महंगें खुशबूदार फिनाइल ने ली है. समय बीतने के साथ मीट्टी के घर कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन अब यह रिवाज शायद एक नए फ्लेवर में वापस आने को है.

दरअसल देश के वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर से पेंट बनाने का काम पूरा कर लिया है. इस क्षेत्र में केएनएचपीआई (जयपुर यूनिट) ने बड़ी सफलता हांसिल की है। खास बात यह है कि गोबर से बना पेंट को बाजार में बिकने वाले पेंट जैसा ही देखने में प्रतीत होता है, लेकिन इसमे किसी तरह के केमीकल्स का प्रयोग नहीं किया गया है. विशेषज्ञों की माने तो यह पेंट कमरे के तापमान को उसी प्रकार ठंड़क प्रदान करेगा, जिस प्रकार गोबर की लिपाई करती है.

इतनी होगी कीमतः

बाजर में इस समय पेंट का दाम आमतौर 250 रुपए प्रति लीटर है, जबकि गोबर से बनाया गया पेंट की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर के आसपास हो सकती है. इस पेंट को कई रंगों में बाज़ार में उपलब्ध करवाया जाएगा.

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पौराणिक काल से होती आई है गोबर से लीपाईः

भारत में प्राचीन काल से ही घरों को गोबर से लीपा जाता है. विशेष त्यौहारों, अवसरों या पूजा-पाठों में गोबर से भूमि को लीपना अति शुभ माना गया है.

स्वास्थवर्धक है गोबर से घरों को लीपनाः

गोबर से घरों के आंगन, रसोई या दीवारों आदि को पोतना सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्तिकोण से भी फायदेमंद है. ऐसा करने से जहां एक तरफ कीटाणुओं का नाश होता है, वहीं कीट-पतंगे भी घर से दुर रहते हैं. गोबर से लिपाई करने से टी.बी के वायरस एवं अन्य तरह के रोगाणु मर जाते हैं.



English Summary: gobar paint discovered by scientist

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