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इस राज्य के किसानों को सरकार मुफ्त में देगी 1 लाख चंदन के पौधे, पौधे का मुनाफा किसानों को मिलेगा

देश में किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए सरकार कई तरह के प्रयास कर रही है। चाहै राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार, किसानों का कर्जा सभी के लिए एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय है। देश में किसान कई तरह की फसलों की खेती करता कई बार किसानों को उनमें लाभ होता है तो कई बार किसानों को उसमें नुकसान भी झेलना पड़ता है। इस समस्या की अगर बात करें तो यह एक राज्य की नहीं है बल्कि कई राज्यों के किसान इस समस्या से जुझ रहे हैं। सरकारें भी इन समस्याओं को लेकर काफी चिंतित हैं और इस मामले पर किसानों की सहायता करना चाहती हैं।

ताजा उदाहरण पंजाब का है जहां किसानों के कर्ज को दूर करने के लिए सरकार ने तत्परता दिखाई है। सरकार ने राज्य के एक लाख किसानों को मुफ्त में चंदन का पौधा वीतरित करने का फैसला किया है। सरकार का मानना है की पेड़े तैयार होने तक इसकी देखभाल किसान करेंगे और इसके बाद जब चंदन को बाजार में बेचा जाएगा तो इससे होने वाली लाखों रुपये का मुनाफा किसानों का होगा। पंजाब में सरकार इन दिनों किसानों के बेहतरी के लिए कई तरह के प्रयास कर रही है और सरकार के थिंक टैंक ने इस योजना पर काम शूरू कीया है।

इसके लिए सभी जिले के डीसी को सरकार की तरफ से निर्देश दिया गया है वे अपने दफ्तरों में खाली पड़े जग्हों पर पौधे लगाएं। यह ही नहीं विभिन्न जिले कों डीसी के द्वारा अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने दफ्तरों में खाली पड़ी जग्हों की फोटो खींचकर डीसी ऑफिस भेजें, जिसके बाद उन्हें पोधे वितरित किए जाएंगे। वहीं वन विभाग के अधिकारियों का मानना है की किसान बड़ी ही आसानी से चंदन के पेड़ों की देखभाल कर सकते हैं और इसमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं है। इसके साथ ही अधिकारियों का मानना है की पंजाब की जमीन उपजाऊ होने के कारण यहां चंदन का पौधा लगभग तीन से चार साल में तैयार हो जाएगा। और किसानों को एक पौधे से ही 4 से 5 वर्षों में पांच लाख का फायदा होगा।

इसके अलावा जानकारों की मानें तो चंदन का पौधा सफतापूर्वक हिमाचल प्रदेश व जम्मू जैसे पड़ोसी राज्यों में उगाया जाता है और पंजाब जैसे गरम जग्ह में इसे लगाना एक बड़ी चुनौती है। वहीं विभाग के अधिकारियों का मानना है की गरम राज्य होने के बाद भी यहां होशियारपुर में सेब की खेती होती है तो चंदन की खेती भी काफी सफल रहेगी।

 

जिम्मी
कृषि जागरण



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