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'सोलर ड्रायर' का इस्तेमाल कर अब किसान ऑफ सीजन में भी कमा सकेंगे भारी मुनाफा

भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां हर एक मौसम में किसानों के द्वारा मौसमी फसलों की खेती की जाती हैं. मॉनसून  अच्छा और ख़राब होने के वजह से किसी सीजन में फसल की पैदावार अच्छी हो जाती है तो किसी सीजन में नहीं. ऐसे में किसी सीजन में फसल की पैदावार अच्छी होने के बाद सीजन के आखिर में अमूमन सब्जियों का कुछ हिस्सा बर्बाद हो जाता है. कई बार बाजार में उचित दाम नहीं मिलने पर भी किसान फसल को या तो मवेशी को खिला देते हैं या खेत में ही छोड़ देते हैं.लेकिन अब किसानों को खेत में खराब हो रही सब्जियों को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि विज्ञान अब बहुत आगे बढ़ चुका है.

दरअसल  'सोलर ड्रायर’ नामक एक मशीन बनाया गया है जिसके जरिए सब्जियों को सुखाकर न सिर्फ उन्हें बचाया जा सकेगा बल्कि उनका ऑफ़ सीजन के लिए भंडारण भी किया जा सकेगा. और किसान ऑफ सीजन में इन सब्जियों को बेचकर कर अच्छा मुनाफा भी कमा सकेंगे. बता दे कि 'बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान' ने 'सोलर ड्रायर' मशीन बनाकर किसानों की एक बड़ी समस्या का हल निकला हैं. केंद्र की योजना के तहत यह मशीन किसानों में वितरित करने के साथ ही उनको प्रशिक्षित भी किया जाएगा.

बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के सस्य विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. जेएस बोहरा बताया है कि 'धूप में खाद्य पदार्थ सुखाने का चलन आदिकाल से ही चला आ रहा है. इसमें भारत ही नहीं विदेशों में भी सब्जियों व पनीर को सूखाने का काम होता है.  धूप में एक साथ कई चीजों को नहीं सुखाया जा सकता है. क्योंकि, बाहर सुखाने पर गंदगी, अचानक बारिश होने, चूहों व कीड़े लगने से खाद्य पदार्थ खराब हो सकते है और वो नुकसान पहुंचा सकते हैं. वहीं सोलर ड्रायर के प्रयोग से 10 से 12 किलो सब्जी आसानी से सुखा कर किसान ऑफ सीजन में लाभ ले सकते हैं.   

गर्म हवा से सूखती हैं सब्जियां :

सोलर ड्रायर में लगा सोलर पैनल धूप को गर्म हवा में परिवर्तित कर चेंबर में भेजता है. इसमें फैन भी लगा है जिसके जरिए गर्म हवा का संचार आसानी से होता है. ड्रायर में कोई अपशिष्ट पदार्थ या गंदगी न जाए इसके लिए ग्लास लगाया गया है. गर्म हवा से ही सब्जियों को सही तरीके से सुखाया जाता है. इस मशीन में मटर, करेला, गोभी, पत्ता गोभी आदि एक दिन में सुखा सकते हैं.

बता दे कि सौर ऊर्जा से चलने वाली 'सोलर ड्रायर मशीन' मात्र 19 हजार रुपये में तैयार की गई है. इसे  'नेशनल मिशन ऑफ सस्टेनेबल एग्रीकल्चर' योजना के तहत तैयार किया गया है प्रो. बोहरा ने बताया कि जाड़े में तेज धूप न होने पर भी मशीन काम करेगी. यह हल्की धूप में भी काम करती है. 



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