Economic Survey 2025-26: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से, सरकार उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय बेहतर करने के लिए व्यापक स्तर पर पैमानों को लागू कर रही है.
इनपुट, तकनीक, आय में सहयोग, बाजार और बीमा संबंधी मदद के माध्यम से कई प्रमुख बदलाव किए गए हैं. इनमें से कई प्राथमिकताओं को मिशन-मोड स्तर पर लागू किया जा रहा है.
देश भर में क्षेत्र में विस्तार कर और उत्पादकता बेहतर कर चावल, गेहूं, दालें, मोटा अनाज (मक्का और जौ), वाणिज्यिक फसलें (कपास, जूट और गन्ना), और पोषक अनाज (श्री अन्न) का उत्पादन और उत्पादकता को बेहतर करने के लिए 2007 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) को लागू किया गया था. वित्त वर्ष 2025 में, इस योजना का नाम बदलकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) कर दिया गया था.
खाद्य तेल-तिलहन पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ-ओएस) और खाद्य तेल- ताड़ के तेल पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ-ओपी) को भी तिलहन के उत्पादन में स्व-सक्षमता हासिल करने के लिए लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता में सुधार कर, किस्मों में सुधार कर, अच्छी कृषि प्रक्रियाओं, निजी क्षेत्र के सहयोग, क्लस्टर-आधारित हस्तक्षेप और खरीद सुनिश्चित कर 2030-31 तक 70 मिलियन टन करने का है.
उत्पादकता बढ़ाकर दालों में आयात संबंधी निर्भरता को कम करने के लिए, दालों में आत्मनिर्भरता का मिशन योजना के माध्यम से दालों में स्व-सक्षमता को प्राप्त किया गया, जिसे 1 अक्टूबर 2025 को मंजूरी दी गई. इन सम्मिलित हस्तक्षेपों से तिलहन और ताड़ के तेल के संरक्षण और उत्पादन में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है. 2014-15 से 2024-25 तक, तिलहन के क्षेत्र में 18 प्रतिशत, उत्पादन में करीब 55 प्रतिशत और उत्पादकता में करीब 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
घरेलू खाद्य तेल की उपलब्धता 2015-16 में 86.30 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 121.75 लाख टन हो गई. इससे आयातित खाद्य तेल में गिरावट आई और बढ़ती घरेलू मांग व खपत के बावजूद, आयातित खाद्य तेल की मांग 2015-16 में 63.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 56.25 प्रतिशत रह गई.
प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना: सभी के लिए समृद्धि के विचार के साथ, केंद्र सरकार ने 2025 के अपने केंद्रीय बजट में, “पीएम धन धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई)” के अंतर्गत कृषि की प्रमुखता वाले 100 जिलों के विकास की घोषणा की. पीएमडीडीकेवाई को जुलाई 2025 में मंजूरी मिली और यह वित्त वर्ष 2026 से छः-वर्ष के लिए शुरू की गई है, जो 100 आकांक्षी जिलों में कार्य करेगी.
इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता को बेहतर करना, फसल के विविधीकरण को अपनाना और संपोषित कृषि परंपराओं को बढ़ाना, पंचायत और खंड स्तर पर फसल की कटाई के बाद भंडारण सुविधा को बढ़ाना, सिंचाई के कामकाज में सुधार करना और दीर्घकालिक व अल्पकालिक उपलब्धता को पूरा करना है.
फसल बीमा समर्थन: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) प्राकृतिक आपदा, पेस्टिंग, बीमारी और खराब मौसम परिस्थितियों के चलते फसल बर्बाद होने की स्थिति में चक्रीय फसल के लिए किसानों को मूलभूत सुरक्षा प्रदान करती है. 2024-25 में, इस योजना से 4.19 करोड़ किसानों को सुरक्षा मिली, जो कि 2022-23 से 32 प्रतिशत अधिक है और इसने 6.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि कवर की, जो बीते वर्ष के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है.
यह समीक्षा बताती है कि कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों में मौजूदा कीमतों पर भारत की राष्ट्रीय आय के करीब पांचवे हिस्से तक कवर करती है. कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों में रोजगार का एक बड़ा हिस्सा होने के साथ, यह क्षेत्र भारत के समग्र विकास की दिशा में केंद्र बिंदु पर है. इसलिए समावेशी विकास और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि का प्रदर्शन सुदृढ़ करना बहुत महत्वपूर्ण है.
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