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फिर से चौपट हुई आर्थिक गतिविधियां, अप्रैल माह में सब्जियों समेत इन चीजों की मांग में आई भारी कमी, जरा देखिए ये आंकड़े

सचिन कुमार
सचिन कुमार

Vegetable

अगर आर्थिक चश्मा पहनकर कोरोना काल में सभी लोगों की आर्थिक गतिविधियों का अवलोकन करें, तो मालूम पड़ेगा कि सभी आगामी भविष्य के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अपनी कमाई का सर्वाधिक हिस्सा बचत करने में मसरूफ हैं. उन्हें डर सता रहा है कि कहीं कोरोना काल में शासन का कोई सख्त फैसला फिर से उनकी आर्थिक गतिविधियों को चौपट करके न रख दें, इसलिए वर्तमान में सभी लोग अपनी दैनिक खर्चों को कम कर अपने बचत के आकार को बढ़ाने में लग गए हैं, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता दिख रहा है. लोगों की इसी आर्थिक मनोदशा के कारण ही सब्जियों समेत फलों व अन्य चीजों की मांग धड़ाम से नीचे गिर गई है.

इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ दिनों से सब्जियों की मांग में भी गिरावट दर्ज की गई है. किसान बदहाल हो चुके हैं. बड़ी मेहनत से अपनी फसलों को उगा कर मंडियों में ले जाने वाले इन किसान को कोई पूछ नहीं रहा है, क्योंकि विगत माह कोरोना की दूसरी लहर के कश्मकश के बीच लोग खर्चे को कम करने में लग गए, ताकि अपनी आय में महफूज रख सकें. वहीं, कोरोना के कहर का शिकार हुए सर्वाधिक लोग उपाचाराधीन हैं.

वहीं, अर्थशास्त्र के नियम के मुताबिक, जब किसी-भी वस्तु की मांग में कमी आती है, तो उसकी कीमत में स्वत:  गिरावट शुरू हो जाती है. आजकल कुछ ऐसा ही सब्जियों की कीमत के साथ भी हो रहा है. बाजार में सब्जियों को कोई पूछ नहीं रहा है. हालांकि, कोरोना की पहली लहर के दौरान ऐसा नहीं था. लोग अपनी दैनिक खरीद मेंसब्जियों की मात्रा को बढ़ा रहे थे. इसी का नतीजा रहा है कि एक ओर जहां सभी उद्योग पूरी तरह से चौपट हो चुके थे, तो वहीं कृषि क्षेत्र में अच्छा-खासा ग्रोथ दिखा था.

इस तस्दीक खुद केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़े करते हुए नजर आ रहे हैं. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index-CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) ने आंकड़े जारी किए हैं. अप्रैल में रिटले इन्फ्लेशन दर घटकर 4.29% पर आ गई. यह शहरी इलाकों में 4.77% रही जबकि ग्रामीण इलाकों में मात्र 3.82% रही.

ऐसा रहा मार्च और फरवरी का हाल

वहीं, अगर मार्च और फरवरी के हाल की बात करें, तो रिटेल इन्फ्लेशन दर क्रमश: 5.52% और 5.03% थी. इससे पहले जनवरी में ये 4.06% थी जो अक्टूबर 2019 के बाद सबसे निचला स्तर था. वहीं, अगर फुड प्राइस के इंडेक्श की बात करें, तो अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति दर 2.02% पर आ गई जो मार्च में 4.87% पर थी. इसमें भी शहरों में ये दर 3.15% और ग्रामीण इलाकों में 1.45% रही जो मार्च में में क्रमश: 6.64% और 3.94% थी. 

जानें, कैसा रहा सब्जियों व फलों का हाल

इसके साथ ही अगर सब्जियों और फलों की बात करें, तो इनकी मांग में कमी दर्ज की गई है, जिसके परिणामस्वरूप इनकी कीमतों में कमी दर्ज की गई. इस मद में मुद्रास्फीति की दर में 14.18% की गिरावट दर्ज की गई.

पहली लहर के दौरान बेहतर थे ग्रामीण क्षेत्रों के हालात

बताया जा रहा है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था शहरी अर्थव्यवस्था के मुकाबले बेहतर स्थिति में थे, चूंकि वहां संक्रमण के मामले नहीं थे, मगर जब शहरों से  मजदूरों का पलायन शुरू हुआ, तो ग्रामीण क्षेत्रों में के मामले सामने आने लगे, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है.

 

English Summary: Decrease the demand of vegetable

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