घटते रकबे से बढ़ी कपास की कीमत, कम मार्जिन से बढ़ सकती हैं मिलों की मुसीबत

कपास के बढ़ती कीमत के दौरान कताई मिलों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। ज्ञात हो कि कृषि मंत्रालय ने खरीफ सीजन में कपास की बुवाई में पिछले सत्र की अपेक्षा 14 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया है। तो वहीं रेटिंग एजेंसी इक्रा ने 2019  तक कपास के रकबे में 7-8 प्रतिशत का अनुमान लगाया है। इस दौरान उत्पादन में यदि कमी आई तो कताई मिलों को मार्जिन में घाटा हो सकता है।

पिछली बार कीट के प्रकोप के चलते कपास की फसल को खासा नुकसान हुआ था। इस दौरान किसान दूसरी फसल को चुनने के लिए मजबूर हो गए हैं। जिसके कारण फसल के रकबे में कमी देखी जा रही है।

यदि कपास के घरेलू बाजार में भाव की बात करें तो 115-120 रुपए प्रति किलो जा पहुंचा है। कीमतों में उछाल पड़ोसी देश चीन द्वारा आयात के लिए समझौते भी हैं। तो वैश्विक स्तर पर भी कपास उत्पादन में कमी भी कीमत बढ़ा सकता है।

हालांकि बड़ी कताई मिलों जैसे नाहर स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड, वर्धमान टेक्सटाइल्स लिमिटेड आदि के पास अधिक मात्रा में कम लागत कपास मौजूद होने के कारण मार्जिन में कमी आने की कम आशंका है।

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