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2050 तक चावल और गेहूं की खेती से देश में मच सकती है त्राही-त्राही : शोध

देश में फसल प्रणाली से संबंधित बदलाव के लिए एक वकालत की गई है... बदलाव की यह वकालत देश में गहराते जल संकट और कुपोषण की समस्या से निजात दिलाने के लिए की गई है... एक शोध में भारत के लिए कम पानी में उगने वाली फसलों को महत्वपूर्ण बताया गया है... यह शोध अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्दालय के द्वारा की गई है और जर्नल सांइस एडवांस में छापी गई है... और इस शोध में भारत के लिए सलाह दी गई है की अगर देश में धान और गेहूं की फसलों की जगह अगर भारत कम पानी की खपत वाली फसलें उगाए तो भविष्य में होने वाले पानी संकट को टाला जा सकता है... इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि इससे एक बड़ी हिस्से वाली कुपोषित आबादी को सेहतमंद करने में भी मदद मिलेगी...

शोधकर्ताओं की मानें तो हरित क्रांति के बाद चावल और गेहूं जैसे प्रमुख फसलों से लोगों का पेट तो भरा है लेकिल, इसका पर्यावरण पर काफी दुष्परिणाम हुआ है... जैसे सिंचाई से भूजल स्तर में गिरावट, कृषि संयंत्रों ने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा दिया है, इसके साथ ही कीटनाशकों के अति इस्तेमाल से हर चीज प्रदूषित हुई... शोधकर्ता अब इस बात पर शोध कर रहे हैं कि देश में चावल और गेहूं एक प्रमुख फसल है और इसके अलावा क्या लोग अन्य फसलों को अपनाएंगे...वैसे अगर आगे वर्ष 2050 तक की बात करें तो चावल और गेहूं के लिए एक बड़ी चुनौती भी है... साल 2050 तक भारत की जनसंख्या चीन से भी आगे निकल चुकी होगी और देश को 39.4 करोड़ अतिरिक्त लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करनी होगी और ऐसे में इन दोनों फसलों के बदौलत यह नामुमकीन सा लग रहा है...

ऐसे किया गया शोध :

शोधकर्ताओं ने शोध के लिए भारत की छह प्रमुख फसलों का चुनाव किया जसमें चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा, रागी और ज्वार की फसलें शामिल थीं... इन फसलों की हर एक उपयोगी चीजों की जांच की गई जैसे पैदावार, पानी खपत, और पेषकता... अध्ययन में यह बातें सामने आई की चावल और गेहूं जैसे फसलों में सर्वाधिक पानी खपत होती है लेकिन पोषकता के पैमाने में यह पीछे है... वहीं शोधकर्ताओं की मानें तो च वल की जगह जौ, बाजरा, या ज्वार लगाना शुरू कर दिया जाए तो देश में पानी की बचत होगी और अन्य फसलों को बढ़ने में भी मदद मिलेगी...

कृषि जागरण



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