सूखे फूलों से लाखों का फायदा

आपने यह कहावत तो सुनी होगी की जिंदा हाथी लाख का और मरा हाथी सवा लाख का। उसी प्रकार ताजे फूलों से तो किसानों को बाजार में अच्छा मुनाफा मिलता ही है। परन्तु सुखे फूलों से भी किसान काफी अच्छा लाभ ले सकते है। ज्यादा जानकारी के लिए पूरा लेख पढ़े।

प्राचीन काल से ही फूलों को सुंदरता एवं कोमलता के कारण विभिन्न अवसरों में प्रयोग किया जाता रहा हैं, परन्तु मनचाहे फूल प्राप्त करने के लिये अगली ऋतु तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ताजे कटे हुए फूलों एवं पत्तियों की सीमित आयु होने के कारण हम अधिक समय तक ताजे फूलों को नहीं रख सकते हैं। फूल सुखाने की विभिन्न विधियों से हम फूलों की सुंदरता को काफी समय तक सहज कर रख सकते हैं। फूलों, पत्तियों, फर्न, घास, कोन को सूखाना एवं उनके फूलों को साज-सज्जा में उपयोग करना शुष्क पुष्प उत्पादन कहलाता है। आजकल सूखे या शुष्क फूल अपनी स्थाई सुंदरता एवं अनुपम रंगो की वजह से लोगों के बीच विस्मय, प्रसंशा एवं आकर्षण का केंद्र बने हुये हैं। सूखे फूल ताजे फूलों की तुलना में हल्के भार के, महंगे, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। ताजे फूलों की तुलना में सूखे फूल गर्मी एवं सर्दी से सहिष्ण होते हैं और अधिक समय तक सुंदरता प्रदान करते हैं।

भारत में सूखे फूल का व्यवसाय निरंतर प्रगति पर है और इसकी मांग बाहरी देशों में भी अधिक है। अधिक मांग के कारण, भारत शुष्क फूलों के निर्यात में प्रथम स्थान पर है। शुष्क फूल तकनीक इतनी आसान है कि इसे कोई भी सीखकर रोजगार आरम्भ कर सकता है। शुष्क फूल उद्योग में पांच सौ से अधिक शुष्क फूल निर्यात किये जाते हैं। इस उद्योग की सालाना वार्षिक वृधि 10 से 15 प्रतिशत है। शुष्क पुष्प तकनीक द्वारा खिले फूलों को मुरझा जाने से पूर्व ही संरक्षित किया जा सकता है। सही अवस्था में फूलों और उसकी पंखुड़ियों को सुखाकर ऐसे कई उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं जो न सिर्फ घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि निर्यात करने पर सूखे फूल के उत्पाद कमाई का साधन भी बन सकते हैं। महंगाई के इस युग में घर बैठी महिलाओं के लिए यह तकनीक रुचिकर होने के साथ अतिरिक्त आय का स्त्रोत भी सिद्य हो सकती है। इस तकनीक से तैयार किये गये उत्पाद निर्यात के लिये उत्तम होते हैं तथा कम लागत में अधिक लाभ देते हैं। इस उद्योग द्वारा किसान अपनी आय में वृद्धि कर खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

शुष्क पुष्प क्यों

- भारतीय और विदेशी बाजारों में शुष्क पुष्प की अच्छी माँग है। भारत से इसका निर्यात अमेरिका, जापान और यूरोप तक होता है।

- शुष्क पुष्प निर्यात में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है, क्योंकि यहाँ कई प्रकार के पौधे पाये जाते हैं।

- शुष्क पुष्प से तात्पर्य केवल फूल से ही नहीं है, बल्कि इसके तहत शुष्क तना, बीज, कलियां आदि भी आते हैं ।

- भारत से हर साल करीब एक सौ करोड़ रुपये मूल्य का शुष्क पुष्प का निर्यात किया जाता है।

- भारत यह उद्योग 20 देशों को पांच सौ से अधिक किस्म के शुष्क पुष्प का निर्यात करता है।

- इनका इस्तेमाल हस्तनिर्मित कागज, लैंप शेड, मोमबत्ती स्टैंड, जूट के थैले, फोटो फ्रेम, बक्से, किताबें, दीवारों की सजावट, कार्ड और अन्य   उपहार सामग्री के निर्माण में होता है।

- घर में पड़ी बेकार सामग्रियों और शुष्क पुष्प के इस्तेमाल से उत्पाद की सुन्दरता और लाभ बढ़ जाता है।

- इस तकनीक से तैयार किये गये उत्पाद निर्यात के लिये उत्तम होते हैं तथा कम लागत में अधिक लाभ देते हैं।

शुष्क पुष्प निर्माण की तकनीक

शुष्क पुष्क उत्पादन के दो महत्वपूर्ण चरण है-

() सुखाना

() रंगाई

फूलों के काटने सुखाने का उचित समय

फूलों को सुबह के समय पौधों पर से ओस की बूंदें सूखने के बाद काटना चाहिए। काटने के बाद उसे रबड़ बैंड की मदद से गुच्छे में बांधकर रख देना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके, धूप से हटा देना चाहिए।

शुष्कन विधियां

लटकन शुष्कन विधि (Air Drying): यह तकनीक पुरानी होने के साथ साथ सस्ती और आसान भी है । इस विधि मे फूलों की डंडियों को बांध कर उल्टा लटका दिया जाता है । फूलों को सुखाते समय इस बात का ध्यान देना चाहिये कि फूल सुखाने वाले कमरे मे अंधेरा, गरमी और हवा का आवगमन होना चाहिये । इस विधि द्वारा फूल अधिक समय में सूखते हैं और अक्सर फूलों का प्राकर्तिक रंग भी उड़ जाता है ।

दाब शुष्कन विधि (Press Drying): इस तकनीक में फूलों को पूरी तरह खिलने पर काट लिया जाता है । दो पटलों के बीच सोखता कागज लगा दिया जाता है और फूलों को पटलों के बीच मे रख दिया जाता है । इसी तरह सोख्ता कागज की 4-5 परतों में फूलों को रखकर तथा दबाब बनाकर 40-50 डिग्री से0 पर 24 घंटे के लिये रखा जाता है । यदि समान्य तापमान पर सुखाना हो तो हर तीसरे दिन सोखता कागज बदलकर फूलों हो सुखाया जाता है और सूखे फूलों को वायु रहित हवाबंद डिब्बे मे भंडारित कर लिया जाता है ।

अंतः-स्थापित शुष्कन विधि (Embedded Drying): फूलों को दो तिहाई खिलने पर काट लिया जाता है और पत्ती निकालकर सीलिका जेल में रख दिया जाता है । सीलिका जेल को 3-4 इंच परत तक पात्र के तले में बिछा लिया जाता है और उस पर फूल को सीधा स्थापित कर दिया जाता है । सीलिका जेल को पात्र में किनारे से डाला जाता है ताकि फूल का ढांचा न बिगड़े । जब फूल पूरी तरह सीलिका जेल से ढक जाये तो पात्र को 44-48 डिग्री से0 तापमान पर एक से दो दिन के लिये रख दिया जाता है । तत्पश्चात सीलिका जेल को फूल से अलग कर दिया जाता है और फूलों को साफ कर उपयोग में ले लिया जाता है। सिलिका जेल की जगह बोरेक्स, बालू, लकड़ी का बुरादा इत्यादि भी फूलों को सुखाने के लिये प्रयोग में लाया जा सकता है । इस विधि द्वारा फूलों का रंग और आकार बना रहता है । अंतः-स्थापित विधि  द्वारा फूलों को ढक्कनदार डोंगों में सुखाया जाता है ।

बन्द चूल्हा शुष्कन विधि (Hot Air Oven Drying): इस विधि में गरम हवा वाला बन्द चुल्हा या आवे का प्रयोग किया जाता है । आवे में हवा का तपमान 45 से 55 डिग्री से0 रखा जाता है । प्रायः इस विधि में फूलों को सूखने में एक से दो दिन का समय लगता है । सिलिका जेल के प्रयोग से सखे फूलों की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। इस तकनीक से बहुत जटिल फूल और पौधे सुखाये जाते हैं।

सूक्ष्म तरंगी बन्द चूल्हा शुष्कन विधि (Microwave Drying): इस विधि में माइक्रोवैव यंत्र का प्रयोग किया जाता है जिसका तापमान 45 से 50 डिग्री से. रखा जाता है । इस विधि से फूल अति शीघ्र (2 से 3 मिनट में) सूख जाता है । यदि दाब विधि माइक्रोवैव में करनी है तो पिन रहित किताबों का ही प्रयोग करना चाहिये।

सूर्य की रोशनी में सुखाना (Sun Drying): सूर्य की रोशनी में सुखाने की तकनीक सबसे आसान और सस्ती है। लेकिन बारिश के मौसम में इस तकनीक से फूलों को सुखाना असंभव हैं । इस विधि द्वारा फूलों का रंग और आकार बिगड़ जाता है। इस विधि में सख्त फूलों को सुखाना ही संभव हैं । इस विधि द्वारा फूलों के गुच्छों को रस्सियों या बाँस में उलटा लटका कर सुखाया जाता है। 

कम तापमान पर शुष्कन (Freeze Drying): यह विधि सूर्य की रोशनी में सुखाने की विधि से उन्नत विधि है। जमा कर सुखाने के लिए आवश्यक यंत्र महंगे होते हैं। लेकिन इस तकनीक से सुखाये गये फूलों की गुणवत्ता अच्छी होती है और उनकी कीमत भी अधिक मिलती है। इस विधि द्वारा हम ठंडे प्रांत के फूलों को भलीभांती सुखा सकते हैं।

ग्लिसरीन शुष्कन विधि (Glycerine Drying): इस विधि में फूलों को काट कर ग्लिसरीन के घोल में रख दिया जाता है। घोल बनाने में पानी का प्रयोग किया घोल जाता है। प्रायः दो भाग पानी में एक भाग ग्लिसरीन मिलाई जाती है । इस तकनीक से फूल की कोशिकाओं में पानी की जगह ग्लिसरीन भर जाती है जिससे सूखने पर फूल चमकदार हो जाता है और अधिक लुभावना लगता है।

रंगाई: जिन शुष्क फूलों में प्राकर्तिक रंग स्थाई नहीं रह पाते हैं उन शुष्क फूलों को प्रोसेसिंग द्वारा प्राकर्तिक डाई द्वारा रंग प्रदान किया जाता है। प्रायः चार किलोग्राम रंग का पाउडर लेकर उसे 20 लीटर पानी में मिलाया जाता है। इस घोल को आठ सौ लीटर गर्म पानी में मिलाया जाता हैं। इसमें दो लीटर एसीटिक एसिड मिलाया जाता है। बहुत नर्म फूलों का रंग सुधारने के लिए मैग्नेशियम क्लोराइड मिलाया जाता है। शुष्क फूलों को इस घोल में तब तक भिगोया जाता है, जब तक उन पर रंग न चढ़ जाये।

शुष्क पुष्प हस्तकला (Dry Flower HAndicraft):

बिहार में शुष्क पुष्प उत्पादन (ड्राई फ्लावर) इंडस्ट्री की आपार संभावनाएं हैं। बेरोजगार युवा ड्राई फ्लावर के कारोबार को व्यवसाय के रूप में अपनाकर अपनी आर्थिकी को पंख लगा सकते हैं। बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए शुष्क पुष्प उत्पादन कारगर साबित हो सकता है। यहां विभिन्न प्रकार की घास, पत्तिया और खरपतवार मिलती है जिनका उपयोग हम सूखे फूलों के उत्पाद बनाने में उपयोग कर सकते हैं। प्रदेश में शुष्क पुष्प उत्पादन से अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे बेरोजगार घर बैठे ही सीमित साधनों के साथ अपनी सृजनशीलता, कलात्मकता से कई उत्पाद बना सकते हैं। लोग ग्रामीण स्तर पर कुठीर उद्योग के माध्यम से अपना कारोबार चला सकते हैं। शुष्क पुष्प की मांग दिनोंदिन बढ़ रही है। भारत में कुल पुष्प निर्यात में 70 फीसदी भागीदारी शुष्क पुष्प की है।

शुष्क पुष्प बाजार में यह नवीनतम विकास है। विभिन्न रंगों के शुष्क पुष्प से शुष्क पुष्प की फ्रेम जड़ित तसवीरें, बधाई कार्ड, कवर, पुष्पगुच्छ, मोमबत्ती स्टैंड, शीशे की कटोरी बनती है। शुष्क पुष्प से ग्रीटिंग कार्ड, वॉल पिक्चर, कलैंडर, पॉट-पॉरी, वॉल हैंगिंग, पुष्प विन्यास, गुलदस्ते पुष्प चक्र भी बनाए जा सकते हैं। इनकी मार्किट में भारी मांग है। इनका प्रयोग बड़े होटलों, मॉल की सजावट में हो रहा है। इस तकनीक को महिला सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है जिससे महिलाओं को रोजगार मिलेगा।

सूखे फूलों से बने उत्पाद

पुष्प विन्यास: इसमें सूखे हुए तने और डालियों का इस्तेमाल होता है। हालांकि बाजार में इसकी माँग काफी कम है, इसकी कीमत अधिक मिलती है और उच्च आय वर्ग के लोग इसे काफी पसंद करते हैं। इसमें सामान्यतौर पर इस्तेमाल होनेवाली सामग्री में सूखे सूती कपड़े, घास, चमेली, फर्न के पत्ते तथा अन्य शामिल हैं।

ग्रीटींग कार्ड: इसे बनाने के लिये शादी ब्याह के पुराने निमंत्रण पत्र इस्तेमाल कर सकते हैं । निमंत्रण पत्र के प्लेन हिस्से पर डिजाइन बना कर सूखे फूल चिपका दिये जाते हैं और निमंत्रण पत्र को पन्नी चढ़ा कर तैयार कर दिया जाता है ।

पेपर वेट: इसे बनाने के लिये सर्वप्रथम शीशे का ढांचे का इस्तेमाल किया जामा है । शीशे का ढांचे के निचले हिस्से में थर्मोकोल लगाकर सूखे फूलों को स्थापित करते हैं और फिर शीशे का ढांचे के उपरी हिस्से को निचले हिस्से पर लगाकर बंद कर देते हैं ।

सीनरी: इसे बनाने के लिये सर्वप्रथम हैंडमेड पेपर पर किसी भी प्रकार का डिजाइन बना लिया जाता है । फिर सूखे फूलों को चिपकाकर सीनरी को मढ़वा दिया जाता है।

कोस्टर: इसे बनाने के लिये सर्वप्रथम पुराने कार्ड को छः बराबर के चोकोर या गोल आकार में काट लेते हैं और इन छः हिस्से पर एक जैसा डिजाइन बना कर सूखे फूल चिपकाकर कप प्लेट के नीचे कोस्टर के रूप में इस्तेमाल में लाते हैं ।

टेबल मैट: इसे बनाने के लिये सर्वप्रथम हैंडमेड पेपर को छः बराबर के आयात या अण्डाकार में काट लेते हैं और इन छः हिस्से पर एक जैसा डिजाइन बना कर सूखे फूल चिपकाकर और लेमिनेट करवाकर खाने की प्लेट के नीचे लगाने के लिये खाने की टेबल पर इस्तेमाल करते हैं ।

पेन स्टैंड: इसे बनाने के लिये सर्वप्रथम खत्म हुये टेप के खाली गोल हिस्सों को या शैंपू/पाउडर के खाली डिब्बों के निचले हिस्से में थर्मोकोल लगाकर बेस बनाया जाता है । फिर सूखे फूलों को चिपकाकर पन्नी चढ़ा दी जाती है।

गुलदस्ता: यह सुगंधित फूलों का मिश्रण है, जिसे पॉलिथिन बैग में रखा जाता है। इसे सामान्यतौर पर आलमीरा, दराज और बाथरूम में रखा जाता है। इस तकनीक में तीन सौ से अधिक किस्म के पौधों का इस्तेमाल होता है। सुगंधा, बेला, चमेली, गुलाब की पंखुड़ियां, बोगनवेलिया, नीम के पत्ते और कड़े फल भारत में आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं। हमारा मुख्य ग्राहक ब्रिटेन है।

बुक मार्क: इसे बनाने के लिये पुराने निमंत्रण पत्र को लंबे आकार में काट लिया जाता है । निमंत्रण पत्र के प्लेन हिस्से पर डिजाइन बना कर सूखे फूल चिपका दिये जाते हैं और निमंत्रण पत्र को लेमिनेट कर तैयार कर लिया जाता है ।

सामान्य क्रियायें एवं सावधानियां:

- फूलों को खिली धूप में ही संग्रहित करना चाहिये।

- फूलों को तोड़ते समय उजले रंग और बीमारी रहित फूलों को ही संग्रहित करना चाहिये।

- कीटों से बचाव के लिये फूलों को तोड़ने से पूर्व डायथेन जेड 78 का 0.01 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करना चाहिये।

- फूलों को सुखाते हुये इस बात का ध्यान देना चाहिये कि फूल सुखाने वाले कमरे मे अंधेरा, गरमी और हवा का आवगमन होना चाहिये।

- दाब शुष्कन विधि में फूलों को एक सामान फैलाकर हर तीसरे दिन सोखता कागज बदलेना चाहिये ।

- सूखे फूलों को वायु रहित हवाबंद डिब्बे मे भंडारित कर लिया जाता है ।

- भण्डारित फूलों में नैफथ्लीन बाल या कपूर की गोलियों रखनी चाहिये।

- एक पात्र में एक प्रकार के फूलों को सुखाना चाहिये।

- फूलों को तोड़ने और सुखाने में कम से कम समय का फासला होना चाहिये।

- अंतः-स्थापित शुष्कन विधि में सीलिका जेल को पात्र में किनारे से डाला जाता है ताकि फूल का ढांचा न बिगड़े।

- सूखे फूलों से चिपकी हुई सीलिका जेल को धीरे धीरे ब्रुश की सहायता से हटाना चाहिये।

- सूखे फूलों को समय समय पर पानी, कीटों, धूप, धूल एवं तोड़ फोड़ से बचाना चाहिये।

 

डा. दीप्ती सिंह, सहायक प्राध्यापक

उद्यान विभाग -फूल एवं सब्जी विभाग

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर - 813210

फोन: 8294461539,

मेलः: singh.deepti2008@gmail.com

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