अगर आप भी चाय बागान में काम करते हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है. असम सरकार ने चाय बागान में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 'मुख्य मंत्रिर एति कोलि दुति पात' योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत राज्य भर में चाय बागानों में कार्यरत 6 लाख से अधिक श्रमिकों को एकमुश्त 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी. सरकार का यह कदम चाय उद्योग से जुड़े श्रमिकों के वर्षों के परिश्रम और योगदान को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है.
इस योजना की शुरुआत क्यों की गई?
असम की चाय देश दुनिया में काफी बड़े पैमाने पर पसंद की जाती है और असम का चाय उद्योग 200 वर्षों का गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है. ब्रिटिश काल से शुरू हुए इस उद्योग ने न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि असम को वैश्विक पहचान भी दिलाई और इसलिए मुख्यमंत्री ने इस योजना को चाय बागान श्रमिकों के अमूल्य योगदान को देखते हुए. इस पहल का शुभआरंभ किया.
श्रमिकों के लिए अतिरिक्त कल्याणकारी सुविधाएं
असम के बागान श्रमिकों के लिए राज्य सरकार ने कल्याण से जुड़ी कई अन्य सुविधाओं का भी उद्घाटन किया. इनमें मोबाइल क्रेच चलित बाल देखभाल केंद्र और मोबाइल शौचालय सेवाएं शामिल हैं. इन सुविधाओं का उद्देश्य श्रमिकों, विशेष रूप से महिला श्रमिकों, के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है.
दरअसल, चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं के लिए बच्चों की देखभाल एक बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में मोबाइल क्रेच की सुविधा से काम के दौरान उनके बच्चों की उचित देखभाल हो सकेंगी और वहीं मोबाइल शौचालय सेवाएं स्वच्छता और स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जिससे चाय श्रमिकों अधिक फायदा होगा.
योजना का क्या उद्देश्य है?
‘मुख्य मंत्रिर एति कोलि दुति पात’ योजना की शुरुआत सरकार ने इसलिए की है, क्योंकि चाय बागान श्रमिक केवल श्रम शक्ति नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करेगी, बल्कि श्रमिकों में सम्मान सुरक्षा और भविष्य को लेकर विश्वास भी पैदा करेगी. आने वाले समय में इस तरह की पहलें असम के चाय बागान क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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