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अश्वगंधा की वैज्ञानिक खेती को मिला नया आयाम, बस्तर के किसानों को उन्नत बीज व मार्गदर्शिका का वितरण

मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के ‘बईठका’ सभागार में अश्वगंधा की वैज्ञानिक खेती पर तैयार मार्गदर्शिका का विमोचन हुआ और किसानों को उन्नत बीज निःशुल्क वितरित किए गए. वन औषधि सुविधा केंद्र, जबलपुर द्वारा तैयार ब्रोशर में खेती की संपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी दी गई है. विशेषज्ञों ने औषधीय खेती को आत्मनिर्भरता और आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बताया तथा ‘कृषक-दूत डायरी 2026’ का भी लोकार्पण किया गया.

KJ Staff
अश्वगंधा की वैज्ञानिक खेती पर तैयार मार्गदर्शिका का विमोचन
अश्वगंधा की वैज्ञानिक खेती पर तैयार मार्गदर्शिका का विमोचन
  • अश्वगंधा तथा अन्य वनौषधियों की वैज्ञानिक खेती पर विशेष मार्गदर्शिका का विमोचन तथा किसानों को विस्तृत प्रशिक्षण सामग्री प्रदान

  • बस्तर के किसानों को अश्वगंधा तथा अन्य वनौषधि के उन्नत किस्म के बीज निःशुल्क वितरित

  • देश के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी की उपस्थिति में औषधीय खेती पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन

  • मां दंतेश्वारी हर्बल समूह के ‘बईठका’ हाल में ज्ञान, अनुभव और खेती नवाचार का संगम

  • ‘कृषक-दूत डायरी 2026’ किसानों के लिए व्यवहारिक कृषि मार्गदर्शिका के रूप में लोकार्पित

  • प्रगतिशील किसानों, वैज्ञानिकों और हर्बल समूह के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता

मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के परिसर स्थित ‘बईठका’ सभागार में आयोजित एक गरिमामय एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में औषधीय खेती को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत अश्वगंधा की वैज्ञानिक खेती पर तैयार विशेष मार्गदर्शिका (ब्रोशर) का विधिवत विमोचन किया गया तथा बस्तर क्षेत्र से आए किसानों को अश्वगंधा की उन्नत किस्म का बीज निःशुल्क वितरित किया गया. कार्यक्रम ने औषधीय खेती को आजीविका और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम स्थापित किया.

वन औषधि सुविधा केंद्र, जबलपुर द्वारा तैयार इस विस्तृत मार्गदर्शिका में अश्वगंधा की खेती की संपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया को सरल एवं व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है. भूमि चयन, बीज उपचार, बुवाई की विधि, पोषण प्रबंधन, रोग नियंत्रण, उत्पादन एवं विपणन तक की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गई है, जिससे सामान्य किसान भी औषधीय खेती को आत्मविश्वास के साथ अपनाने में सक्षम हो सके. किसानों ने इसे अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल पहल बताया.

कार्यक्रम का पहला सत्र देश के सुप्रसिद्ध औषधीय पौधा विशेषज्ञ एवं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्राध्यापक तथा वन औषधि सुविधा केंद्र के मुख्य अधिकारी डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ. इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजसेवी भूपेश तिवारी ने की. वनौषधियों की खेती की कार्यशाला डॉ राजाराम त्रिपाठी सदस्य, नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय भारत-सरकार तथा अतिथि वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में संपन्न हुई, जिसमें औषधीय खेती के विस्तार, वनाधारित आजीविका और किसानों की आय वृद्धि पर विस्तृत चर्चा की गई. डॉ. तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आने वाला समय औषधीय खेती का है और अश्वगंधा जैसी फसलें किसानों के लिए कम लागत में बेहतर आय का सशक्त माध्यम बन सकती हैं.

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ प्रदेश की सर्व आदिवासी समाज की प्रदेश अध्यक्ष राजाराम तोडेम थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्व आदिवासी समाज की बस्तर संभाग की अध्यक्ष भाई दशरथ कश्यप के द्वारा की गई. इस सत्र में किसानों के लोकप्रिय समाचारपत्र ‘कृषक-दूत’ द्वारा प्रकाशित ‘कृषक-दूत डायरी 2026’ का लोकार्पण किया गया. इस सत्र में उपस्थित वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने डायरी को किसानों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ बताया. अपने संबोधन में  डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने इसे “गागर में सागर” बताते हुए कहा कि यह डायरी केवल तिथियों का संकलन नहीं, बल्कि खेती-किसानी की व्यवहारिक मार्गदर्शिका है, जिसमें विभागीय संपर्क सूत्र, उर्वरक प्रबंधन, रोग नियंत्रण, वैज्ञानिक खेती पद्धति तथा विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी संकलित है.

उन्होंने यह भी अपेक्षा व्यक्त की कि भविष्य में छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों के लिए राज्य-विशेष जानकारी सहित पृथक संस्करण प्रकाशित किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय किसानों को और अधिक लाभ मिल सके.

कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र नेम, डॉ. ठाकुर तथा डॉ. वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए औषधीय खेती को किसानों की आय वृद्धि का प्रभावी विकल्प बताया. मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की अध्यक्ष दशमति नेताम, निर्देशक अनुराग कुमार, मिशन लीडर शंकर नाग, कृष्णा नेताम, बलाई चक्रवर्ती, माधुरी देवांगन, बिलची बाई सहित समूह के अनेक सदस्य तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रगतिशील किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

समारोह ज्ञान-विनिमय, वैज्ञानिक सोच और किसान सशक्तिकरण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ, जिसमें स्पष्ट संदेश उभरा कि पारंपरिक अनुभव और आधुनिक वैज्ञानिक मार्गदर्शन के समन्वय से ही खेती का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सकता है.

English Summary: ashwagandha scientific farming brochure launch Bastar farmers seed distribution 2026 Published on: 16 February 2026, 01:01 PM IST

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