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मशीन में अंगूठा लगाओ तब किसान को मिलेगी खाद और बीज

हेराफेरी कर किसानों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की लूट पर अब लगाम लगेगी। मेरठ में इसके लिए खाद, बीज आदि की बिक्री पांइट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन से की जाएगी। किसान मशीन में अपना अंगूठा लगाएगा। इसमें दर्ज ब्योरा और अंगूठा निशानी का मेल होने पर उसे खाद, बीज आदि दिया जाएगा। कागजी खानापूर्ति का विकल्प बंद होने से अनुदान हड़पने का सिलसिला भी बंद होगा। जिले में 40 प्रतिशत दुकानों को पीओएस मशीन से जोड़ा जा चुका है।

खाद, बीज आदि पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता। केंद्र सरकार ने यह जालसाजी रोकने के लिए फर्टिलाइजर की निजी दुकानों, सहकारी समितियों और गोदामों पर पीओएस मशीन के जरिए खाद, बीज बिक्री की कवायद शुरू की है। ट्रायल के लिए जिले में 256 मशीन आ चुकी हैं जबकि 400 मशीनों की डिमांड शासन को भेजी है। किसान का पता और आधार नंबर मशीनों में दर्ज कर उपलब्ध खाद-बीज आदि का रिकार्ड भी ऑनलाइन होगा।

सब्सिडी हड़पने का ये है खेल

सरकार हर वर्ष खाद, एनपीके, डीएपी के साथ बीजों पर हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है लेकिन रिकार्ड कागज पर होने के कारण बड़े खिलाड़ी अधिक बिक्री दिखाकर सब्सिडी हड़प जाते हैं। कालाबाजारी कर सरकारी अनुदान पर मिलने वाले खाद, बीज को भी बाहर ही बेच दिया जाता है। अनुमान के मुताबिक, जिले में हर वर्ष फसली सीजन में पांच से 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी का खेल हो जाता है।

ऐसे रुकेगा हेराफेरी

डिजिटल इंडिया के तहत पीओएस मशीन से किसानों के आधार को जोड़कर इससे किसानों का तमाम ब्यौरा ऑनलाइन हो जाएगा। खाद, बीज आदि खरीदने वाले किसान को मशीन में अपना अंगूठा लगाना होगा। इससे तस्दीक हो सकेगी कि खरीदारी करने वाला किसान वही है, जिसका ब्योरा मशीन में दर्ज है। दुकान पर खाद-बीज के स्टाक का रिकार्ड भी ऑनलाइन होगा। प्रतिदिन की बिक्री कृषि विभाग के कंट्रोल रूम में दर्ज होगी। इससे खपत और मांग का भी सही आकलन हो सकेगा।

मशीन से होगा यह फायदा

-ऑनलाइन होगी खरीद बिक्री, कैश के झंझट से होंगे मुक्त।

- स्टॉक का रिकार्ड ऑनलाइन होने से नहीं होगी खाद आदि की किल्लत।

- बाजार में मिलावटी खाद आदि की बिक्री पर लगेगी रोक।

- किसान तक पहुंचेगा सरकारी अनुदान का पूरा लाभ।

- हर दुकान की मानीट¨रग, गड़बड़ी करने वालों पर होगी नजर।

आंकड़ों पर एक नजर

2.10 - लाख किसान हैं जिले में।

यूरिया की हर वर्ष खपत- 85,500 टन

35,000 - टन डीएपी की रहती है मांग

20,000 - टन एनपीके प्रयोग करते हैं किसान

35,000 -कुंतल बिकता है सरकारी गेहूं का बीज

700 - फर्टिलाइजर की दुकानें, गोदाम और सहकारी समितियां।

जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही के मुताबिक किसानों को सरकारी सब्सिडी का पूरा लाभ देने के लिए अब पीओएस मशीन से ही खाद, बीज की बिक्री कराई गई है। मशीन को किसानों के आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा और तमाम रिकार्ड ऑनलाइन होगा।



English Summary: Apply the thumb to the machine then the farmer will get the compost and seeds

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