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आठ जिले के आंकड़ों के कारण महा कृषि जनगणना स्थगित हुई

किसान देश का अन्नदाता , जो देश के  सभी लोगो की भूख मिटाने का काम  करता है , आज वही मुसीबत में घूमता फिर रहा है महाराष्ट्र में चल रहे किसानो के विरोध का प्रदशन उनकी अपनी मांगो को पूरा करने के लिए भारत सरकार को आवाज़ लगाता नज़र आ रहा है पर अब उसकी मांग को पूरा करने का समय आ गया है,  भारत  सरकार ने जो जनगणना किसानो के लिए आयोजित की थी उसके आकड़े सही नहीं आ रहे है,  जिसमे से 8 जिलों के जनगणना के आकड़े सही नहीं भरे गए है, एक अधिकारी के अनुसार  "ठाणे, अमरावती, बुलडाणा, यवतमाल, औरंगाबाद, सांगली, रत्नागिरी और चंद्रपुर जिलों से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हुयी है।"

कृषि की जनगणना हर पांच साल में तैयार की जाती है और अधिकारी ने कहा कि यह विलंब राज्य को प्रभावित नहीं करेगा बल्कि केंद्र भी इससे प्रभावित होगा क्योंकि राज्यों से प्राप्त जनगणना के बारे में नीतियां उसके आधारभूत हैं। हालांकि, तालडि़यों ने इन जिलों में दायर नहीं किया है क्योंकि सरकार के पास कुछ लंबित मांग है।"महाराष्ट्र राज्य तलठी महासंघ के अध्यक्ष दंयादेव दुबाल ने कहा कि जनगणना की तैयारी कृषि विभाग की जिम्मेदारी है। दंयादेव दुबाल ने कहा, "तलाथिस को केवल 7/12 प्राप्तियां सहित राजस्व दस्तावेजों के डिजिटलीकरण को पूरा करने के लिए कहा गया था। जनगणना कार्य कृषि विभाग द्वारा किया जाना है। सरकार के साथ उठाए गए किसी भी मुद्दे को डिपार्टमेंट को संबोधित नहीं किया गया है।  



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