कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टर किसानों की वो रीढ़ बन चुका है, जिसके बिना खेती जुड़े हर काम नामुकिन चाहे बुवाई, सिंचाई, ढुलाई और कटाई तक हर चरण में ट्रैक्टर की अहम भूमिका होती है. ऐसे में सही ट्रैक्टर का चुनाव समय और मेहनत दोनों बचाता है, जिससे किसानों को यह लाभ होता है कि उनके समय, मेहनत की बचत से उनकी आमदनी में इजाफा हो जाता है. अगर आप भी नया ट्रैक्टर खरीदने का मन बना रहे हैं. तो इस विस्तृत गाइड को जरुर पढ़ लें.
सबसे पहले समझें अपनी खेती की जरूरत
किसान भाई ट्रैक्टर की खरीद करने से पहले यह तय कर लें कि ट्रैक्टर का उपयोग किन-किन कामों के लिए करना है. अगर खेत छोटा है, तो ऐसे में हल्के और कम हॉर्सपावर वाले ट्रैक्टर से काम चल सकता है. वहीं, अगर बड़े खेत में भारी औजार और ट्रॉली खींचने जैसे कामों के लिए ज्यादा पावरफुल ट्रैक्टर की जरूरत होती है.
अगर विशेषज्ञों की माने तो छोटे किसानों के लिए 36 हॉर्सपावर से कम क्षमता वाला ट्रैक्टर पर्याप्त रहता है, जबकि बड़े किसानों को 40 हॉर्सपावर या उससे अधिक का ट्रैक्टर लेना चाहिए.
हॉर्सपावर और इंजन क्षमता पर दें ध्यान
ट्रैक्टर की ताकत का सीधा संबंध उसके हॉर्सपावर (HP) से होता है. यानी की कम HP वाला ट्रैक्टर कम जमीन की खती के लिए और सीमित उपयोग के लिए एक बेहतर विकल्प है, जबकि ज्यादा HP ट्रैक्टर भारी जुताई, गन्ना खेती और बड़े उपकरणों के लिए जरूरी है.
वहीं, आमतौर पर 20–30 HP ट्रैक्टर छोटे खेतों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं और 35–45 HP ट्रैक्टर मध्यम किसानों के लिए और 45 HP से ऊपर के ट्रैक्टर बड़े किसानों व कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए बेहतर विकल्प होते हैं.
ब्रांड और सर्विस नेटवर्क
अगर आप ट्रैक्टर खरीदते हैं, तो केवल कीमत या लुक्स पर ध्यान देना सही नहीं है. किसी भी ट्रैक्टर की असली परीक्षा होती है उसकी सर्विसिंग और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता से इसलिए हमेशा ऐसे ब्रांड का चयन करना चाहिए, जिनका सर्विस नेटवर्क आपके जिले या आसपास के क्षेत्र में मौजूद हो.
जैसे- महिंद्र, सोनालीका, स्वराज, जॉन डियर, मैसी फर्ग्यूसन, न्यू हॉलैंड, कुबोटा, आयशर, पावर ट्रैक और फार्मट्रैक यह वे ब्रांड है, जो देशभर में मजबूत सर्विस नेटवर्क के लिए जाने जाते हैं.
फसल के अनुसार ट्रैक्टर चुनें
किसान इस बात का विशेष रुप से ख्याल रखें कि हर फसल के लिए एक जैसा ट्रैक्टर उपयुक्त नहीं होता. उदाहरण के लिए मूंगफली और बाजरा जैसी हल्की फसलों के लिए 25–35 HP ट्रैक्टर काफी होता है, जबकि गेहूं, चना और धान जैसी फसलों के लिए 35-45 HP के ट्रैक्टर उपयुक्त होते है.
वहीं अगर आप गन्ना जैसी भारी फसलों का उत्पादन अधिक मात्रा में करते हैं, तो 45 HP या उससे अधिक क्षमता वाला ट्रैक्टर का चुनाव करें, क्योंकि इस खेती में गहरी जुताई होती है, जिसमें अधिक क्षमता वाला ट्रैक्टर बेहतर प्रदर्शन देता है और सब्जी और फल वाली खेती में छोटे, हल्के और आसानी से मुड़ने वाले ट्रैक्टर किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद रहते हैं.
फ्यूल कैपेसिटी और माइलेज
डीजल के बढ़ते दामों को देखते हुए ट्रैक्टर का माइलेज किसानों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है, क्योंकि माइलेज देने वाला ट्रैक्टर लंबे समय में ऑपरेशन कॉस्ट को कम करता है. इसलिए ट्रैक्टर खरीदते समय उसकी फ्यूल कैपेसिटी और प्रति घंटे खपत की जानकारी जरुर लें.
आधुनिक फीचर्स पर ध्यान दें
आज के आधुनिक ट्रैक्टर सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि आरामदायक भी होते हैं. पावर स्टीयरिंग, आरामदायक सीट, बेहतर हाइड्रोलिक सिस्टम, एडजस्टेबल लीवर और कुछ मॉडलों में इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स भी दिए जा रहे हैं. ये सभी फीचर्स लंबे समय तक काम करने में किसान की थकान कम करते हैं और उत्पादकता बढ़ाते हैं.
बजट, सब्सिडी और लोन विकल्प
ट्रैक्टर की कीमत उसके ब्रांड, हॉर्सपावर और फीचर्स के अनुसार अलग-अलग होती है. ऐसे में किसान को अपने बजट के अनुसार सही विकल्प चुनना चाहिए. अगर बजट सीमित है, तो सरकारी सब्सिडी योजनाओं और बैंक लोन की जानकारी लेना फायदेमंद हो सकता है. कई राज्य सरकारें और बैंक किसानों को आसान किस्तों पर ट्रैक्टर उपलब्ध करा रहे हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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