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आपकी सांसों का पेट से है गहरा नाता

मानव शरीर का संचालन इस तरीके से होता है कि शरीर का हर भाग एक-दूसरे पर प्रभाव छोड़ता है. यदि कोई भाग प्रभावित हो जाए या ठीक से काम न करे तो शरीर के दूसरे अंग भी धीरे-धीरे इसकी चपेट में आने लगते हैं. आज हम आपको शरीर के ऐसे ही दो अंगों के बारे में बताएंगें जिनका एक दूसरे से सीधा संबंध है और इन दोनों ही अंगों में से यदि एक भी अंग बिगड़ जाए तो दूसरा अपने आप काम करना बंद कर देता है.

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स्वास-उदर संबंध

चाहे बात आयुर्वेद की हो या एलोपैथी की, स्वास का पेट से सीधा संबंध माना गया है. संपूर्ण आयुर्वेद मानव शरीर की दो बिमारियों को केंद्र में रखकर काम करता है - वात और पित्त. आयुर्वेद में कहा गया है कि यदि मानव शरीर में यह दोनों अधिक मात्रा में बढ़ जाएं तो मानव शरीर अस्वस्थ होने लगता है. हम बचपन से सुनते आये हैं कि दौड़ने से शरीर चंगा रहता है और स्फूर्ति बनी रहती है. इस कथन के पीछे का राज़ भी यही है. जब हम दौड़ते हैं तो हमारा संपूर्ण पेट बहुत तेज़ी से क्रियाशील हो जाता है और पेट की पाचन शक्ति बढ़ जाती है. इसके पीछे का रहस्य भी यही है कि जब हम ज़ोर-ज़ोर से सांस लेते हैं तो हमारे पेट पर उसका सीधा प्रभाव पड़ता है जिससे भूख लगती है और पेट की पाचन क्रिया बढ़ जाती है.

कैसे रखें स्वास का ख्याल

स्वास नली या सांस का ख्याल रखना बहुत आवश्यक है और यदि आप महानगरों में रहते हैं तो आपके लिए यह बहुत आवश्यक है. स्वास को स्वस्थ बनाए रखने के कुछ उपाय -

- रोज़ाना आप सुबह उठकर एक बार जल सूत्र नेति कर सकते हैं.

- गुनगुने नमक वाले पानी के गरारे कर सकते हैं.

- तुलसी या अदरक की भाप ले सकते हैं.

- अनु तेल से नाक और गले की सफाई कर सकते हैं.

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यदि आप अपनी सांसों का पर्याप्त ख्याल रखेंगे तो आपकी सांसों के साथ आपका पेट भी स्वस्थ रहेगा.



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