आज के समय में लोगों को अपने घरों में पौधे लगाने का बेहद ही शौक है और ऐसे में उन्हें ऐसे प्लांट की तलाश रहती है, जिसको लगाने से घर में पॉजिटिविटी बनी रहे. ऐसे में पांडव बत्ती पौधा आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है, क्योंकि इस पौधे का घर में होना कई फायदे पहुंचा सकता है. घर में सुख-शांति के साथ अगर घर में घी या तेल नहीं है और लाइट चली गई हैं, तो इस पौधे की पत्तियां बिल्कुल दीये में लौ की तरह जलती हैं और पूरे घर में रोशनी देने का काम करती है. आइए जानें इस पौधे के पीछे का रहस्य.
पांडव बत्ती पौधे के पीछे की क्या है कहानी?
पांडव बत्ती जिसे 'पांडवारा बत्ती' या वैज्ञानिक रूप से Callicarpa tomentosa कहा जाता है. साथ ही इस पौधे के पीछे की कहानी महाभारत काल और पांडवों के वनवास से जुड़ी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार जब पांडव 12 वर्ष के वनवास के दौरान घने जंगलों में भटक रहे थे, तब उन्हें रात में उजाले की आवश्यकता होती थी. ऐसे में उन्हें इस पौधे की पत्तियों या शाखाओं का उपयोग मशाल की तरह किया था. इसकी पत्तियों पर हल्का सा तेल लगाकर या बाती की तरह बनाकर जलाने पर यह दीये या मशाल की तरह जलने लगा था, तब से इस पौधे का नाम 'पांडव बत्ती' पौधा पड़ गया.
'पांडव बत्ती' पौधे के औषधीय फायदे
अगर आप अपने घरों में 'पांडव बत्ती' पौधा लगाते हैं, तो इसका इस्तेमाल औषधीय के रुप में भी कर सकते हैं और यह इन रोगों में काफी मददगार माना जाता है-
सिरदर्द और त्वचा के लिए
इस पौधे की छाल (Bark) को पीसकर बनाया गया पेस्ट माथे पर लगाने से सिरदर्द में तुरंत आराम मिलता है. इसके साथ ही यह चेहरे की रंगत सुधारने और त्वचा के विकारों को दूर करने में भी सहायक है.
सूजन और जोड़ों के दर्द में राहत
'पांडव बत्ती' पौधे के पत्तों और छाल में 'एंटी-इंफ्लेमेटरी' (सूजन रोधी) गुण पाए जाते हैं. पारंपरिक चिकित्सा में इसके लेप का उपयोग गठिया (Rheumatoid Arthritis) और जोड़ों की अकड़न को कम करने के लिए किया जाता है.
मुंह के छालों में लाभकारी
आयुर्वेद के अनुसार, इसके पत्तों को दूध में उबालकर गरारे करने या मुंह धोने से मुंह के छाले (Aphthae) ठीक हो जाते हैं. इस प्रकार यह जादुई पौधा घर में रोशनी देने के साथ कई रोगों में भी लाभकारी माना जाता है.
पांडव बत्ती पत्तियां क्यों हैं खास?
पांडव बत्ती (Callicarpa tomentosa) की पत्तियों की खासियत यह है कि इसकी निचली सतह पर सफेद, मखमली रोएं होते हैं. ये रोएं तेल या घी को रुई की तरह सोख लेते हैं. इस वजह से पत्ती को जलाने पर यह दीये की बत्ती की तरह धीमी और लंबी आंच के साथ जलती है. यानी की इस पौधे को घर में लाकर दिए की रोशनी जैसा उजाला कर सकते हैं.
नोट- अगर आप इस पौधे को औषधीय रुप में इस्तेमाल करें तो एक बार डॉक्टर की जरुर सलाह लें और बिना डॉक्टर की इजाजत के इसका सेवन ना करें.
लेखक: रवीना सिंह
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