मिट्टी की जांच कैसे, कब एवं क्यों करें

जैसा की आप जानते है कि मिटटी का हमारे जीवन मे बहुत ही अहम महत्व है. मिटटी से ही खेतों में पैदावार होती है और इन्सान के शरीर को भी ईश्वर ने मिटटी से तराशा है. लेकिन हर रोज हम मिटटी को ख़राब करते जा रहे हैं.  खेतों में खाद एवं उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और जमीन में फैलने वाले प्रदुषण से मिटटी लगातार खराब होती जा रही है. इसका प्रभाव मानव जीवन पर बिल्कुल साफ़ देखने को मिल रहा है. मिटटी में सुधार के लिए लगातार किसानों से को कहा जा रहा है कि उनके लिए मृदा की जांच कराना आवश्यक है. हम आपको बता रहे हैं कि कैसे, कब और क्यों मृदा की जांच होना आवश्यक है.

कैसे :

एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गढ्ढे बनायें।

एक खेत के सभी मिटटी को इकट्ठा कर के 1 / 2 kg का नमूना बनाये ।

नमूने की मिट्टी से कंकड़, घास इत्यादि अलग करें।

मिट्टी को कपडे में रख दे तथा उसमे नाम इत्यादि दे दे की किस खेत की मिट्टी है तथा फसल का पूरा ब्यौरा दे।

नमूना प्रयोगशाला को प्रेषित करें अथवा’ ‘परख’ मृदा परीक्षण किट द्वारा स्वयं परीक्षण करें।

कब :

मिटटी की जांच प्रत्येक ३ वर्ष में एक बार अवश्य कर  लेनी चाहिए।

मिटटी की जांच जब मिट्टी में नमी की मात्रा बहुत कम हो तब करनी चाहिए ।

फसल शुरू  होने से पहले मिटटी की जांच करनी चाहिए।

क्यों: 

सघन खेती के कारण खेत की मिट्टी में उत्पन्न विकारों की जानकारी।

मिट्टी में विभिन्न पोषक तत्वों की उपलब्धता की दशा का बोधक।

बोयी जाने वाली फसल का आवश्यक अनुमान लगाने के लिए ।

फसल के अच्छे उत्पादों के लिए ।

संतुलित उर्वरक प्रबन्ध द्वारा अधिक लाभ।

 

डॉ. हुमा नाज़, डॉ. हादी हुसैन खान, पुष्पेंद्र सिंह साहू

(शोध सहयोगी)  (शोध सहयोगी)  (एम.एस.सी. एग्रीकल्चर)

पादप संगरोध विभाग कीट विज्ञान विभाग कीट विज्ञान विभागवनस्पति संरक्षण,  संगरोध एवं संग्रह क्षेत्रीय वनस्पति संगरोध केन्द्र , इलाहाबाद,

निदेशालय, फरीदाबाद, हरियाणा,  अमृतसर, पंजाब,

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