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गमले में उगाइए चीकू! टेरेस गार्डनिंग में ‘बनाना चीकू’, उगाने का पूरा फॉर्मूला जानिए..

Banana sapodilla: अगर आप भी टेरेस गार्डनिंग के शौकीन है, तो यह खबर आपके लिए ही है. ऐसे में ‘बनाना चीकू’ आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है, जिसे आप अपने टेरेस में 22 से 24 इंच के गमले में आसानी से उगा कर लदालद फल पा सकते हैं. आइए जानें उगाने का पूरा प्रोसेस...

KJ Staff
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banana sapodilla
टेरेस गार्डनिंग में उगाएं ‘बनाना चीकू’ (Image Source-shutterstock)

अब चीकू उगाने के लिए न तो बड़े खेत की जरुरत है और न ही लंबा इंतजार. ऐसे में टेरेस गार्डनिंग में खास किस्म बन चुका है ‘बनाना चीकू’ जो तेजी से लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है और इस फल की खासियत यह है कि यह गमले में आसानी से उगाया जा सकता है. साथ ही कम ऊंचाई पर फल देना शुरु कर देता है और कई राज्यों के लोग टेरेस गार्डनिंग में ‘बनाना चीकू’ को अपना रहे हैं, क्योंकि यह स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है.

टेरेस गार्डनिंग का नया ट्रेंड

आज के दौर में लोगों में टेरेस गार्डनिंग करने का बड़ा शौक हो रहा है, क्योंकि टेरेस गार्डनिंग में न ही ज्यादा जगह की जरुरत होती है और न अधिक देखभाल की और इस ट्रेंड को अपनाकर काफी लोग सब्जियों से लेकर फलों तक अलग-अलग किस्मों को अपना रहे हैं. साथ ही टेरेस गार्डन घर की छत, बालकनी या आंगन में भी शानदार उत्पादन दे सकता है. यही वजह है कि अब शहरी इलाकों में भी लोग इसे तेजी से इसकी ओर बढ़ रहे है.

बड़े गमले का चयन है सबसे जरूरी

अगर आप टेरेस गार्डनिंग में बनाना चीकू को उगाना चाहते हैं, तो विशेष रुप से यह ध्यान दें कि गमले का साइज 22 से 24 इंच का हो, ताकि उन गमलों में पौधों की जड़े तेजी से फैल सकें और पौधे फल देना जल्दी शुरु कर दें, क्योंकि सही देखभाल के साथ यह पौधा लगभग एक फीट की ऊंचाई पर ही फल देना शुरू कर देता है, जो इसे खास बनाता है.

केले जैसी लंबाई, जबरदस्त मिठास

बनाना चीकू की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वाद और आकार है. इसका फल सामान्य चीकू की तुलना में केले जैसा लंबा होता है और स्वाद में शहद जैसा मीठा रसीला. साथ ही आप एक पौधे से 4-5 फल पा सकते हैं. यहीं कारण है कि यह किस्म लोगों में काफी लोकप्रिय हो रही है.

मिट्टी और खाद पर दें विशेष ध्यान

गमले में चीकू उगाने के लिए मिट्टी और खाद का चुनाव बेहद ही मायने रखता है, क्योंकि अगर मिट्टी उपजाऊ होगी तो फसल अच्छी पैदावार देंगी.

गार्डनिंग एक्सपर्ट के अनुसार:

गमले की 60-70% अच्छी भुरभुरी मिट्टी होनी बेहद ही जरुरी है.

उसके अलावा 30-40% गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट का पौधों में छिड़काव करना भी बेहद ही आवश्यक है और साथ ही आप थोड़ी मात्रा में बालू या धान की भूंसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और इस मिश्रण से मिट्टी में पानी की निकासी सही रहती है और जड़ों को हवा मिलती रहती है.

पानी देने में न करें गलती

बनाना चीकू किस्म को न ज्यादा पानी चाहिए और न ही कम ऐसे में पानी देने का सही तरीका यह है कि जब गमले में आपको एक इंच मिट्टी सूखी नजर आए तो समझ जाएं की बनाना चीकू को पानी देना है और अगर आप बिना रुके इस पौधे को रोजाना पानी देंगे तो हो सकता है कि पौधे की जड़े सड़ जाएं.

नीम खली और जैविक देखभाल

अगर आप अपने पौधों को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो समय-समय पर खली डालते रहें जिससे पौधों की जड़े मजबूत होती है और फंगस और कीटों का लगने का खतरा कम रहता है और पौधे सुरक्षित रहते हैं.

इसके अलावा हर 25–30 दिन में थोड़ी मात्रा में गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट डालते रहें, ताकि पौधों की ग्रोथ तेज से हो और पौधे अधिक फल देना शुरु कर दें.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Banana sapodilla plant Grow in your terrace garden with these easy methods Published on: 23 January 2026, 06:29 IST

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