देश के किसान अब खेती करने के साथ ऐसे साइड बिजनेस की तलाश में रहते हैं, जिससे की उनकी आमदनी में भी इजाफा होता रहें. ऐसे में किसानों के लिए दूध व्यवसाय एक अच्छा विकल्प बनकर उभर रहा है, काफी किसान इस करोबार से बड़ी कमाई अर्जित कर रहे हैं. अगर किसान इन देशी गाय की नस्लों जिनमें गिर गाय, लाल सिंधी, साहीवाल का पालन करते हैं तो दूध व्यवसाय में तगड़ी इनकम कर सकते हैं.
आइए आगे इसी क्रम में जानते हैं गाय की इन टॉप 3 नस्लों के बारे में विस्तार से-
1. गिर गाय
गिर गाय किसानों की पहली पसंद मानी जाती है. साथ ही यह नस्ल गुजरात के गिर क्षेत्र से जुड़ी गिर गाय के रुप में जानी जाती है और यह गाय अन्य नस्लों से अधिक दूध देने में सक्षम नस्ल है, जिससे किसान 8 से 10 लीटर दूध प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, अगर इसकी पहचान की बात करें तो गिर गाय मध्यम आकार, धब्बेदार शरीर, पीछे की ओर झुका माथा और मुड़े हुए सींग इसकी पहचान है. कई राज्यों में इस गाय के दूध की कीमत बाजारों में करीबन 120 रुपए प्रति लीटर तक मिल जाती है.
2. लाल सिंधी
लाल सिंधी गाय की नस्ल भारत में सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है, जो 8 से 10 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है और साथ ही पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से उतपन्न लाल सिंधी गाय अपनी लाल चमकदार रंगत और मजबूत शरीर से आसानी से पहचानी जा सकती है. अगर किसान इस गाय का चुनाव करते हैं, तो गर्मी के मौसम में भी इस नस्ल से अधिक दूध प्राप्त कर सकते है. यानी यह नस्ल गर्म मौसम में भी सहनशीलता दिखाती है और किसानों की अच्छी कमाई करा सकती है.
3. साहीवाल नस्ल
साहीवाल भारत और पाकिस्तान की सबसे अच्छी दुधारू देसी गाय की नस्ल है, जो मुख्य रूप से लाल-भूरे रंग की, ढीली त्वचा वाली होती है, जिसकी पहचान किसान आसानी से कर सकते हैं. साथ ही इस गाय की नस्ल से किसान रोजाना 10-16 लीटर और एक ब्यांत में 2,000-3,000 लीटर तक दूध प्राप्त कर सकते हैं. अगर किसान भाई इस देशी गाय की नस्ल का चुनाव करते हैं तो बड़ा मुनाफा कमा कर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकते हैं.
देसी गायें क्यों हैं फायदे का सौदा?
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देसी गायों का पालन किसानों की लागत कम कर देता है. देसी नस्लें स्थानीय पर्यावरण के अनुरूप होती हैं, जिससे अतिरिक्त देखभाल और महंगे आहार की जरूरत कम पड़ती है.
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इन नस्लों में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है और साथ ही इन गायों में सामान्य बीमारियों का जोखिम कम होता है.
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अगर किसान इन नस्लों की अच्छी तरह से ध्यान रखते हैं तो उत्पादन संतुलित मिलता रहेगा और बाजारों में भी इन नस्लों के दूध का सही दाम मिल सकता है.
लेखक: रवीना सिंह
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