भारत में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालको की आय में इजाफा करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि के रूप में गायों की दो नई कृत्रिम नस्लों करन फ्राइज और वृंदावनी को रजिस्ट्रेशन मिला है. ये दोनों नस्लें न केवल अधिक दूध देने में सक्षम हैं, बल्कि भारतीय जलवायु और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं. साथ इन नस्लों से डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.
वहीं, अगर बात करें देसी गाय की नस्लों की जिससे पशुपालक 1,000 से 2,000 किलोग्राम तक दूध प्राप्त होता है, जबकि यह नस्लें पशपालकों को अधिक दूध देने में सक्षम नस्ल है.
करन फ्राइज गाय की नस्ल
पशुपालक के लिए रजिस्टर्ड की गई दो नई कृत्रिम नस्लों में पहली है करन फ्राइज इस नस्ल का विकास हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) द्वारा किया गया है. करन फ्राइज गाय को विशेष रूप से इस तरह विकसित किया गया है. साथ ही करन फ्राइज नस्ल का विकास स्वदेशी थारपारकर गाय और विदेशी होल्स्टीन-फ्रिजियन सांड के नियंत्रित संकरण से किया गया है. थारपारकर की सहनशीलता और होल्स्टीन-फ्रिजियन की उच्च दुग्ध क्षमता का संतुलित संयोजन इस नस्ल की सबसे बड़ी खासियत है.
वहीं, करन फ्राइज गाय की नस्ल पशुपालकों 10 महीने की दुग्ध अवधि में लगभग 3,000 किलोग्राम या उससे अधिक दूध देने की क्षमता रखती है, जो सामान्य गायों की तुलना में काफी अधिक है. इसके अलावा यह गाय की यह नस्ल गर्म मौसम में भी अच्छा प्रदर्शन करती है. यही वजह है कि करन फ्राइज नस्ल को डेयरी किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प मानी जा रही है.
वृंदावनी गाय की नस्ल
गाय की इस दूसरी नस्ल वृंदावनी को उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित आईसीएआर–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) द्वारा विकसित किया गया है. यह गाय की नस्ल पशुपालकों को उच्च दुग्ध उत्पादन देने में सक्षम नस्ल है. इसके अलावा इस नस्ल को तैयार किया गया है. होल्स्टीन-फ्रिजियन, ब्राउन स्विस और जर्सी जैसी विदेशी नस्लों के साथ स्वदेशी हरियाणा गाय के मिश्रण से किया गया है.
साथ ही वृंदावनी गाय की नस्ल बाकी अन्य गाय की नस्लों की तुलना में कम बीमार पड़ती है और लंबे समय तक स्थिर दूध उत्पादन देने में सक्षम नस्ल है. इसलिए यह नस्ल पशुपालकों को अलावा किसानों के लिए भी सही विकल्प साबित हो सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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