1. पशुपालन

खरगोश पालन करके कम समय में दोगुनी कमाई

खरगोश पालन आय का अच्छा विकल्प हो सकता है, क्योंकि भारत में इसका प्रचलन काफी बढ़ गया है. भारत के कुछ राज्यों में विदेशी खरगोश का पालन व्यावसायिक स्तर पर भी किया जा रहा है. खरगोश पालन का व्यवसाय कम समय में अच्छा आय का स्रोत बन सकता है और भारत के  युवा इस इस व्यवसाय से अच्छा लाभ अर्जित कर रहे हैं किसानों एवं बेरोजगार युवाओं के लिए कम लागत और कम समय में बड़े मुनाफे कमाने का यह एक अच्छा अवसर है. खरगोश के ऊन और मीट से कम समय में ही लगाए गए मूल्य के अनुसार दोगुनी कमाई हो जाती  है. खरगोश का मीट कई दृष्टि  से स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभप्रद होता है. खरगोश के मीट में औसत प्रकार से ज्यादा प्रोटीन, वसा और कैलोरी कम होती है और इसका मीट आसानी से पचने वाला होता है. इसमें कैल्शियम और फॉस्फोरस अधिक होता है. इसमें तांबा, जस्ता और लौह तत्व शामिल होते हैं. बच्चों से लेकर बड़ों तक इसका  इस्तेमाल कर सकते हैं. ह्रदयघात से पीड़ित मरीजों के लिए यह काफी अच्छा माना जाता है. खरगोश को आप पिंजड़े में पाल सकते हैं, जो मामूली खर्च से तैयार हो जाता है. पर खरगोश पालन को लेकर काफी भ्रांतियां हैं जिससे भी आपको सतर्क रहने की जरुरत है इसके लिए कई प्राइवेट संस्था भी इस काम के लिए फ्रेंचाइजी दे कर काम करवा रही हैं . इसके अलावा  आपको भारत सरकार द्वारा  संचालित प्रशिक्षण केंद्र से जानकारी लेने के बाद ही इसको शुरू करें आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र में भी वैज्ञानिकों के माध्यम से प्रशिक्षण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. 

 

भारत में खरगोश पालन के लिए लाई जाने वाली मुख्य नस्ल निम्नलिखित है

सफ़ेद खरगोश

भूरा खरगोश

फ्लेमिश

न्यूजीलैंड सफ़ेद

न्यूजीलैंड लाल

कैलिफ़ोर्नियन खरगोश

डच

सोवियत चिंचिला आदि होते है.

 इसकी शुरुआत करने के लिए  कम से कम 10 यूनिट खरगोश की आवश्यकता होती है .आपको बता दें कि एक यूनिट में कम से कम 10 खरगोश होते हैं, इसलिए खरगोश पालन कि शुरुआत के लिए लगभग 100 खरगोशों की जरुरत होती है.एक यूनिट में प्रति 10 खरगोशों पर 7 मादा और 3 नर खरगोश रखे जाते हैं .

भोजन का ख़ास ध्यान रखने की जरुरत :

पाले गए खरगोशों के भोजन का भी खास ध्यान रखना होता है इन खरगोशों को एक दिन में दो बार भोजन दिया जाता है जिसमे घरेलु उपयोग किये जाने वाले चपाती या सब्जियों के छिलके,हरी घास भी शामिल हो सकते हैं.

खरगोश पालन के लिए मुख्यतः ऐसे स्थानों का प्रयोग किया जाना चाहिए जहाँ प्रदुषण के साथ साथ शोरगुल कम हो और अगर आप ये स्थान शहर से दूर गांव में  शुरू करें तो आपको फायदा मिल सकता है.

खरगोशों में आपको बता दें कि अंगोरा प्रजाति के खरगोश की ज्यादा मांग होती है मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश में उद्योगपतिओं ने भी इसके पालन के प्रति रूचि बढ़ाई है जिसकी वजह से वहा के युवाओं में भी खरगोश पालन के प्रति रुझान बढ़ा है.

खरगोश पालन के दौरान मुख्य बातें : 

सबसे पहले शेड का निर्माण करना होता है जिसके अंदर का तापमान अधिकतम 38 डिग्री से ज्यादा न हो और गर्मियों में भी इसका ख़ास ध्यान रखा जाता है. फिर उसके बाद खरगोशों को रखने के लिए जालीनुमा पिंजरों का निर्माण किया जाता है,  जिसमें खरगोशों के बच्चों को वयस्क होने तक रखा जा सके इस पूरी प्रक्रिया में 45 दिनों का वक्त लगता है  इसके बाद इन्हे  बाजार में  बेच सकते हैं खरगोश पालन में बीमारियों का भी ख़ास ध्यान रखना होता है जिसके वजह से प्रतिदिन इनकी निगरानी जरुरी होती है और इनके खाने का भी विशेष ध्यान रखा जाता है और गर्मी के मौसम में भी इनका ख़ास ध्यान रखना होता है .खरगोशों कि प्रजनन  क्षमता  बहुत  होती है इसलिए मादा और नर खरगोशों का विशेष ध्यान रखना होता है.नर खरगोशों को एक साल के बाद ही ब्रीडिंग के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए प्रजनन के लिए हमेशा अच्छे भार वाले खरगोशों का प्रयोग किया जाना चाहिए और जिस मेल खरगोश को ब्रीडिंग के लिए उपयोग करें उसका मुख्यरूप से ध्यान रखें साथ ही गर्भवती खरगोश का भी ध्यान रखना जरुरी है.

बीमारी की पहचान कैसे करें :

खरगोश काफी नाजुक प्राणी होते हैं इसलिए इन्हे बीमारी न हो इसका भी नियमित ध्यान देना होता है. साफ़ सफाई की नियममितता  बहुत ही जरुरी होती है. साधारणतयः इनके खान-पान एवं सुस्ती से ही इनकी बीमारी के बारे में पता चल जाता है .   

समस्या :
खरगोश पालन में सबसे बड़ी समस्या इसके बाजार की है जो कि अभी तक सरकार द्वारा निर्धारित नहीं कि गई है और कुछ ऐसे संस्थान हैं जो इसके बारे में काम कर रहे हैं,  हालाँकि कुछ क्षेत्रों में इनके मांस के साथ साथ उन की भी काफी डिमांड होती है. इसके पालन करने के पहले बाजार को भी देख लें और जानकारी प्राप्त करने के बाद ही इसकी शुरुआत करें या किसी भी मान्यता प्राप्त सरकारी संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ही इसकी शुरुआत करे अगर आपको कोई प्राइवेट एजेंसी मिलती है, तो आप उसके द्वारा लगाए गए पहले के कुछ खरगोश पालकों से मिल ले या संस्थान के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त करने के बाद ही जुड़ें.

ज्यादा जानकारी के लिए आप संपर्क कर सकते हैं

ICAR-Central Sheep and Wool Research Institute,

Avikanagar- (post)

Malpura (Tehsil)

Tonk (Dist) Via-Jaipur

Rajasthan 304501

Phone- 01437- 220162

Fax- 01437- 220163

 

 

 

English Summary: rabbit farming in India

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