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Poultry Farming: मुर्गियों में तेजी से फैल रहा रानीखेत रोग, जानिए लक्षण और बचाव के तरीके!

Poultry farm management: रानीखेत रोग मुर्गियों के लिए घातक साबित हो सकता है, खासकर गर्मी के मौसम में जब वायरस तेजी से फैल सकता है. इस बीमारी से बचाव के लिए उचित टीकाकरण, स्वच्छता और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है.

मोहित नागर
मोहित नागर
Poultry disease prevention
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

गर्मी के मौसम में मुर्गियों के लिए कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इन्हीं में से एक घातक रोग है रानीखेत (Newcastle Disease), जो मुर्गियों और अन्य पक्षियों में तेजी से फैलता है. यह रोग Paramyxovirus परिवार के वायरस के कारण होता है और मुख्य रूप से घरेलू और जंगली पक्षियों को प्रभावित करता है. यह अत्यधिक संक्रामक होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है.

कैसे फैलता है रानीखेत रोग?

यह बीमारी संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने, दूषित भोजन और पानी के सेवन, तथा पोल्ट्री फार्म में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के माध्यम से फैलती है. हवा (एरोसोल ट्रांसमिशन) और संक्रमित पक्षियों के मल या स्राव से भी यह तेजी से फैल सकती है.

रानीखेत रोग के प्रमुख लक्षण

इस बीमारी के लक्षण तीन प्रमुख प्रणालियों पर असर डालते हैं:

सांस संबंधी लक्षण:

  • छींक आना
  • खर्राटेदार सांसें
  • नाक और आंखों से पानी आना

तंत्रिका तंत्र संबंधित लक्षण:

  • गर्दन का मुड़ जाना (टॉर्टिकॉलिस)
  • संतुलन खो देना
  • पैर और पंखों में लकवा

पाचन तंत्र संबंधी लक्षण:

  • भूख में कमी
  • हरे और पतले दस्त
  • आंतरिक रक्तस्राव

अन्य लक्षण:

  • अंडा उत्पादन में कमी
  • अंडों की गुणवत्ता में गिरावट (पतले और टेढ़े-मेढ़े अंडे)
  • तेजी से वजन कम होना
  • बड़ी संख्या में पक्षियों की अचानक मृत्यु

रानीखेत रोग से बचाव के उपाय

रानीखेत रोग से बचने के लिए पोल्ट्री फार्म मालिकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. कुछ प्रभावी रोकथाम उपाय इस प्रकार हैं:

1. टीकाकरण

रानीखेत रोग से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे कारगर उपाय है. पोल्ट्री विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मुर्गियों को उचित समय पर वैक्सीन दी जानी चाहिए.

2. स्वच्छता बनाए रखना

  • पोल्ट्री फार्म को नियमित रूप से साफ करना
  • साफ और ताजा पानी एवं भोजन की व्यवस्था करना
  • फार्म के उपकरणों को समय-समय पर डिसइंफेक्ट करना

3. संक्रमित पक्षियों को अलग रखना:

अगर किसी पक्षी में रानीखेत के लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत स्वस्थ पक्षियों से अलग कर देना चाहिए.

4. नए पक्षियों के लिए क्वारंटीन व्यवस्था:

नए लाए गए पक्षियों को कुछ दिनों तक अलग रखना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे किसी बीमारी से संक्रमित नहीं हैं.

5. मृत पक्षियों का सही निपटान:

संक्रमित पक्षियों को उचित विधि से नष्ट करना चाहिए ताकि बीमारी का प्रसार न हो.

English Summary: newcastle disease chickens symptoms treatment management of Poultry farm Published on: 02 April 2025, 03:29 IST

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