MFOI 2024 Road Show
  1. Home
  2. पशुपालन

कड़कनाथ को भी पछाड़ देती है मुर्गी की ये नस्ल, अंडा भी 1200 रुपए दर्जन

मांस और अंडों के उत्पादन के लिए लोग पॉल्ट्री फार्म का व्यवसाय करते हैं, जिसमें से सबसे उत्तम कड़कनाथ मुर्गे को माना जाता है, क्योंकि इसकी कीमत काफी अधिक होती है, आज हम इस लेख में असील मुर्गी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके आगे कड़कनाथ मुर्गा भी फेल है.

निशा थापा
निशा थापा
इस मुर्गे के आगे कड़कनाथ भी है फेल
इस मुर्गे के आगे कड़कनाथ भी है फेल

भारत में मुर्गी पालन का व्यवसाय बड़े पैमाने में किया जा रहा है. ऐसे में लोग मुर्गी पालन के जरिए एक अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं. भारत में अंडे की मांग भी काफी अधिक है, लोग शरीर में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाने के लिए अंडों का सेवन करते हैं. ऐसे में सरकार भी पोल्ट्री फार्मिंग के व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है, इसके लिए कई सब्सिडी योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसी कड़ी में आज हम एक ऐसे मुर्गी की नस्ल की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसके आगे कड़कनाथ मुर्गा भी फेल है.

असील मुर्गी

असील नस्ल की मुर्गियों का पालन मांस उत्पादन के लिए किया जाता है. हालांकि असील नस्ल की मुर्गियों की अंडा देने की क्षमता उत्तम नहीं होती है, यह साल में केवल 60 से 70 अंडे ही देती हैं. जिस कारण से इसके अंडे की कीमत भी काफी अधिक होती है. बाजार में एक अंडे की कीमत 100 रुपए है. साथ ही इसके मीट की कीमत भी काफी अधिक है. इसके अलावा इस मुर्गी के अंडे के सेवन से आंखों को काफी लाभ पहुंचता है.

असील बाकी मुर्गियों से है अलग

असील मुर्गियां अन्य मुर्गियों की तुलना में काफी अलग हैं, जिस कारण से इन्हें पॉल्ट्री फॉर्म की बजाय बैकयार्ड फार्म में पाला जाता है. भले ही असील मुर्गियां अंडा उत्पादन के मामले में पीछे हों, मगर सालभर में अन्य मुर्गियों तुलना में इनसे अधिक कमाई हो जाती है.

ये भी पढ़ेंः मुर्गी पालन केंद्रों से संपर्क करने की लिस्ट, अपने राज्य के मुताबिक करें कांटेक्ट

असील मुर्गा है लड़ाकू

असील मुर्गे लड़ाकू प्रवर्ती के होते हैं, यह कोई नई किस्म नहीं है और ना ही इसे विकसित किया गया है, बल्कि यह मुगलों के शासन से चले आ रहे हैं. आपने फिल्मों में या कहानियों में सुना ही होगा कि पुराने समय में नवाब बड़े-बड़े मुर्गों को लड़ाने का शौक रखा करते थे, जिसके लिए वह रंग बिरंगे मुर्गे असील मुर्गे ही पाला करते थे. मुर्गे लड़ाने के परंपरा अभी भी कई जगहों पर देखी जा सकती है. बता दें कि असील मुर्गों की भी कई किस्में मौजूद हैं, जिसमें यारकिन, कागरनूरिया 89, टीकर, रेजा, चित्ताद, कागर आदि शामिल हैं.

English Summary: asil breed of chicken beats even Kadaknath, eggs also cost Rs 1200 a dozen Published on: 06 March 2023, 03:57 IST

Like this article?

Hey! I am निशा थापा . Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News