गर्मी का मौसम आते ही पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या आती है हरे चारे की जो पशुओं को भरपूर मात्रा में नहीं मिल पाता है. ऐसे में अप्रैल-मई और जून के महीने में अगर पशुओं को सही मात्रा में हरा चारा नहीं मिलता है, तो इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. इसकी वजह से दूध उत्पादन और गुणवत्ता में गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन अगर किसान थोड़ा दिमाग लगाएं तो वह जनवरी-फरवरी के महीने में इन चारों की बुवाई कर गर्मी के मौसम में चारे की पूर्ति कर सकते हैं.
आइए जानते हैं जनवरी में बोई जाने वाली 5 प्रमुख हरा चारा फसलें, जो दूध की धार बढ़ाने में मददगार साबित होंगी.
1. बरसीम
किसान भाई अगर बरसीम की बुवाई करते हैं, तो वह सर्दी और गर्मी दोनों मौसम में अपने पशुओं को भरपूर मात्रा में चारा दें सकते हैं. जनवरी में इसकी बुवाई भी आसानी से की जा सकती है. अगर किसान इस चारे की बुवाई करना सोच रहे हैं, तो वह एक एकड़ खेत में करीब 10 से 12 किलो बीज में अच्छा मात्रा में हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही बुवाई के 50 से 60 दिन बाद पहली कटाई मिल जाती है और बरसीम में प्रोटीन, कैल्शियम और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो दुधारू पशुओं के लिए बेहद लाभकारी हैं.
2. नेपियर घास
नेपियर घास को पशुपालक के लिए एक अच्छा विकल्प है, जिसे पशुपालक ‘हरा सोना’ भी कहते हैं, क्योंकि यह एक बारहमासी चारा फसल है, जिसे एक बार लगाने के बाद 8 से 10 साल तक किसानों को हरा चारा मिलता रहता है. साथ ही जनवरी-फरवरी में इसकी रोपाई करने पर गर्मी के मौसम में लगातार कटाई ली जा सकती है.
वहीं, नेपियर घास में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जिससे पशुओं की ऊर्जा बढ़ती है और दूध उत्पादन में साफ फर्क दिखाई देता है.
3. लोबिया
लोबिया एक दलहनी फसल है, जिसे दाल के साथ-साथ हरे चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. अगर किसान जनवरी में बुवाई करते हैं, तो वे गर्मी में अपने पशुओं की चारे की कमी की पूर्ति कर सकते हैं. साथ ही इस चारे में प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं और इस दलहनी फसल होने के कारण यह खेत की मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है.
4. मक्का
मक्का पशुओं का पसदीदा चारा माना जाता है. किसान जनवरी के आखिरी दिनों या फरवरी की शुरुआत में इसकी बुवाई कर सकते हैं. मक्का से न सिर्फ ताजा हरा चारा मिलता है, बल्कि इसका इस्तेमाल साइलेज बनाने में भी किया जाता है, जो लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और इसका फायदा सीधा पशुपालकों को होगा.
5. ज्वार-बाजरा
अगर किसान भाई ज्यादा क्षेत्र में चारा उगाने की सोच रहे हैं, तो उनके लिए ज्वार और बाजरा भी अच्छे विकल्प भी साबित हो सकती है, क्योंकि ये फसलें गर्मी भी सहन कर लेती हैं और कम पानी में भी किसानों को इससे अच्छी पैदावार मिल जाती है.
समय पर बुवाई से मिलेगा लाभ
किसान अगर समय के अनुसार इन चारों की खेती करते हैं, तो वह इनसे अपने पशुओं को होने वाली चारे की कमी को पूरा कर सकते हैं. इस चारे से न केवल पशुओं का पेट भरेगा, बल्कि पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर और दूध उत्पादन भी लगातार बना रहता है.
लेखक: रवीना सिंह
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