Farm Activities

हरा चारा उत्पादन का सबसे बढ़िया तरीका है हाइड्रोपोनिक विधि

भारत दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश है. इतना ही नहीं भारत 329 मिलियन हेक्टेयर के भौगोलिक क्षेत्रफल के साथ दुनिया का सातवां बड़ा देश भी है. जिसमें से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार लगभग 120 मिलियन हेक्टेयर भूमि बंजर है. वहीं कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग 141 मिलियन हेक्टेयर भूमि ही खेती योग्य है. इस 141 मिलियन हेक्टेयर  भूमि में से भी  बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में हरे चारे की खेती की जाती है. जिसके कारण अन्य अनाज वाली फसलें उगाने के लिए भूमि की कमी साफ नज़र आ रही है.
जैसा कि हम सब जानते हैं कि दुधारू पशुओं (गाय, भैस, बकरी आदि) से अधिक दुग्ध उत्पादन सिर्फ हरे चारे पर निर्भर करता है. इसलिए दुधारू पशुओं को दुग्ध उत्पादन के लिए संतुलित आहार देना अति आवश्यक है. इसके लिए सालभर हरे चारे उत्पादन करना एक मजबूरी भी है. अन्यथा दुग्ध उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगें. जिन इलाकों में सिंचाई के पानी की उपलब्धता कम हैं या किसानों के पास कृषि योग्य भूमि का आकार छोटा है. वहां पर पशुओं के लिए हरे चारे का उत्पादन करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है.

ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक विधि नए विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है. जहां पर सिंचाई के पानी की कमी हैं.  वर्षा भी बहुत कम होती है साथ ही किसानों के पास छोटे खेत या कृषि योग्य भूमि नहीं है. ऐसी जगहों पर यह विधि काफी हद तक कारगर साबित होती है. इस विधि से पानी की बचत तो होती ही है साथ ही कम जमीन की आवश्यकता पड़ती है. इतना ही नहीं बल्कि समय और श्रम की बचत भी होती है. जिससे किसान कम मेहनत से सालभर पशुओं के लिए हरे चारे का उत्पादन कर सकते हैं.

आखिर क्या है हाइड्रोपोनिक्स विधि ?

हाइड्रोपोनिक्स या हाइड्रो-कल्चर नियंत्रित वातावरण में एक मिट्टी के बिना घर में की जाने वली इनडोर खेती है. जिसमे पोषक तत्व पानी में घुले रहते है. जो जड़ों से पौधों को प्राप्त होते रहते हैं. ये एक ऐसी प्रणाली जहां पौधों को प्राकृतिक मिट्टी के अलावा पोषक तत्व सहित पानी में उगाया जाता है. सभी पोषक तत्व को सिंचाई के पानी में मिला दिया जाता है. साथ ही पौधों को नियमित आधार पर आपूर्ति की जाती है. इस तकनीक में फसल के लिए पानी का स्तर उतना ही रखा जाता है जितना फसल को जरूरी होता है. इसमें पानी की सही मात्रा और सूरज की रोशनी से पौधे को पर्याप्त पौषक तत्व भी मिल जाते हैं.

हाईड्रोपोनिक विधि के लाभ -

1. हाईड्रोपोनिक विधि में परंपरागत विधि की तुलना में चारा उत्पादन के लिए कम क्षेत्रफल की आवश्यकता होती है.|
2. इस विधि में कम लागत आती है क्योंकि कीट ,रोग एवं खरपतवार नियंत्रण पर होने वाले खर्च से निजात मिलती है.
3. परंपरागत विधि की तुलना में कम मेहनत लगती है.
4. पानी की बड़ी मात्रा में बचत होती है. परंपरागत तरीके से चारा तैयार करने में 25 से 30 लीटर पानी की खपत होती है.
5. वहीं इस विधि को अपनाकर प्रतिदिन 2 से 3 लीटर पानी में ही सिंचाई पूरी हो जाती है.
6. अधिक उत्पादन के साथ पशुओं के लिए, वर्ष भर पौष्टिक चारा उपलब्ध हो जाता है. जिससे उनसे मिलने वाले उत्पाद की गुणवता में वृद्धि होती हैं.

हाईड्रोपोनिक विधि की प्रयोग-प्रणाली

इस विधि से हरे चारे को तैयार करने के लिए :

1.बीजों को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोया जाए.

2. इससे बीजों का अंकुरण अच्छे से हो सकेगा.

3.सबसे पहले मक्का, ज्वार व बाजरा के बीजों को पानी में भिगोकर रखें.

4. उसके बाद इन बीजों को निकालकर साफ जूट के बोरे में ढक कर अंकुरण के लिए रखा दीजिए.

5. बीजों के अंकुरित होने के बाद इसे हाइड्रोपोनिक्स मशीन की ट्रे (जोकि 2 फीट ×1.5 फीट× 3 इंच की होती है) में बराबर मात्रा में बीजों को फैलाएं

6. प्रत्येक ट्रे में 1 किलो बीज रखें.

7. याद रखें कि बीजों का अंकुरण होने के बाद ही ट्रे में स्थानांतरित करें.

8. चार से दस दिन तक पौधों में वृद्धि होती रहती है.

9. प्रारंभ में जमे हुए बीजों पर लगातार पानी का छिड़काव करें.

10. लगातार इस प्रक्रिया के प्रयोग से 7 से 8 दिन के अंदर पशुओं को खिलाने योग्य हरा चारा बन जाएगा.

हाईड्रोपोनिक विधि की आवश्यकता क्यों ?

- क्योंकि किसानों के पास या तो कृषि योग्य भूमि कम है या हरे चारे के उत्पादन के लिए भूमि नहीं है.

- वर्षा की अनियमितता या सिंचाई जल की उपलब्धता  की कमी.

- भारतीय कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी.

- परंपरागत विधि में लागत अधिक लगती है क्योंकि कीट, रोग व खरपतवार नियंत्रण पर होने वाले खर्च ज्यादा आते है.

- समय पर गुणवत्ता बीज व  जीव-नाशकों कि उपलब्धता कम होना.

- परंपरागत विधि में श्रम की अधिक जरूरत होती है.

- पशुपालकों  को वर्ष भर पौष्टिक चारा उपलब्ध नहीं होता, जिससे गुणवत्ता में गिरावट होना लाज़मी है.

नोट - यह लेख हमें हमारे लेखक  डॉ. निरंजन कुमार बरोड़ द्वारा भेजा गया है. जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय किसानों को एक ऐसी विधि प्रदान करना है. जिसके प्रयोग से किसान कम भूमि और कम पानी की सहायता से अपने दुधारु पशुओं के लिए अधिकतम उच्च किस्म के चारे का उत्पादन कर सकें.



Share your comments


Subscribe to newsletter

Sign up with your email to get updates about the most important stories directly into your inbox

Just in