अंग्रेजी नाम लिटिल मिलेट, बंगाली में सामा, हिंदी में मौरिया, कुटकी,धवन, गुजराती में गाजरो, कुऱी, मराठी में सावा, कन्नड़ में समे, तेलुगु में सामुलु, तमिल में समै, उड़िया में सुआन
इस मिलेट का वनस्पति विज्ञान का नाम पैनिकम सुमाट्रेंस है। साधारण भाषा में लिटिल मिलेट के नाम से जाना जाता है। भारत के पूर्वी भागों में आदिवासियों का आहार का बड़ा हिस्सा है। शायद लिटिल मिलेट का बहुत कम हिस्सा भारत के बाहर उगाया जाता है। श्रीलंका, नेपाल , और म्यांमार में कुछ भागों में इसे उगाया जाता है। इसमें आयरन की मात्रा अधिक होती है। इसमें लगभग 38% आहार फाइबर होता है और इसमें ऊंची एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियां है।
पोषक तत्व से भरपूर होता है। लिटिल मिलेट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर, कैल्शियम , फास्फोरस , आयरन और कैलोरी से प्रचुर होता है।
इसके सेवन द्वारा शरीर का कुपोषण दूर किया जा सकता है। प्रोटीन की मात्रा अधिक होने के कारण यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
लिटिल मिलेट के पोषक गुण लिटिल मिलेट के प्रति 100 ग्राम निम्नलिखित पोषक तत्वों को प्रदान करता है-- 329 किलो कैलोरी, प्रोटीन 9. 7 ग्राम, वसा 5. 2 ग्राम, आहार फाइबर 7. 6 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 60.9 ग्राम, कैल्शियम 17 मिलीग्राम, आयरन 9. 3 मिलीग्राम, थायमिन 0. 30 मिलीग्राम, राइबोफ्लेविन विटामिन 0.09 मिलीग्राम, नयासिन 3. 02 का मिलीग्राम। पाया जाता है।
लिटिल मिलेट को कम कार्बोहाइड्रेट सामग्री के साथ, धीमी पाचन क्षमता और कम पानी में घुलनशील गोंद सामग्री के साथ ग्लूकोज चयापचय में सुधार के लिए उपयोगी माना गया है। लिटिल मिलेट एक कम ग्लीम में सैनिक इंडेक्स वाला खाद्यान्न है जो धीमी गति से पचने वाला फाइबर और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। लिटिल मिलेट रक्त में शर्करा को धीरे-धीरे छोड़ते हैं और ग्लूकोज को अवशोषण को धीमा कर देते हैं। लिटिल मिलेट में आहार फाइबर और प्रतिरोधी स्टार्च हाइपोग्लाइसेमिक और हाइपोलिपिडेमिक प्रभावकारी होते हैं।
लिटिल मिलेट एक एन्टीआक्सीडेंट और पालीफेनोलस, फेनोलिक यौगिक, टैनिन, फ्लेवोनॉयड सीधे शरीर के पोषण से संबंधित नहीं है लेकिन डायबिटीज, हृदय रोग, मोतियाबिंद, कैंसर, सूजन और जठरांतर संबंधी समस्याओं जैसे रोगों में सहायता कर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में उम्र बढ़ाने और चयापचय रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लिटिल मिलेट पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाला पालीफेनोलस फाइटोकेमिकल्स का सबसे बड़ा समूह है और विभिन्न स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा हुआ है। इस जीवन में अंतिम चरण में स्वास्थ्य को बनाए रखने में उनकी भूमिका के कारण उन्हें जीवन काल आवश्यक माना जाता है साबुत अनाज वाले खाद्य पदार्थों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ रही है। क्योंकि वे फाइटोकेमिकल्स और आहार फाइबर के समृद्ध मिलेट को खाद्य औषधि कहां जा सकता है।
कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होने के कारण इसको पूरी तरह से पचने के लिए शरीर को थोड़ा समय लगता है। बच्चों को भी अनाज को खिचड़ी या उबालकर चावल जैसा दिया जा सकता है जो बच्चों में भी पोषण की कमी को पूरा करता है। इसे एक स्वदेशी सुपर फूड भी कहा जाता है। लिटिल मिलेट में मैग्नीशियम की मात्रा होती है जो हृदय संबंधी रोगों के उपचार में भी उपयोगी है। इसमें विटामिन बी3 उपस्थित रहता है जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में प्रभावकारी होता है। यह फास्फोरस जैसे खनिज का भी स्रोत है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
लिटिल मिलेट पकाने के तरीके-
मिलेट पकाना चावल पकाने जितना ही सरल है। नीचे बताए गए तरीकों का इस्तेमाल सबसे मिले जैसे कोदो, बाजार, थोड़ा मिलें, फाक्सटेल मिलें और प्रोसो मिलेट पकाने के लिए किया जा सकता है।
प्रेशर कुकर विधि 1:2-2 सीटी
मिलेट को धो लीजिए। एक माप मिलेट के लिए एक प्रेशर कुकर में दो माप पानी डालें। प्रेशर कुकर के ढक्कन बंद करके मध्यम आंच में पकाएं। पहले सीटी आने के बाद आंच धीमी कर दें। दूसरी सिटी आने के बाद इसे गैस से उतार लें।
भाप न छोड़ें और फिर इसे कुछ मिनट के लिए अलग रख दे। मिलेट को उसकी भाप में ही पकने दें। मिलेट के गर्म होने पर मिलेट को कलछी या चम्मच से नहीं मिलना चाहिए। वरना यह मटमैला बन जाता है। पके हुए मिनट को दाल सांभर या करी के साथ सेवन कर सकते हैं।
ओपन वेसल कुकिंग,1:2-30 मिनट भिगोना
खुले बर्तन में मिलेट को पकाने के लिए, मिलेट को पहले धोना और भिगोना पड़ता है।मिलें की एक माप को दो माप पानी में 30 मिनट तक भिगोना चाहिए। इसे मध्यम आंच पर ढक्कन लगाकर पकाए। पानी में उबाल आने के बाद आंच धीमी कर देनी चाहिए। लगभग 10 मिनट में जब पानी वाष्पित हो जाए, इसे आंच से उतार लें और ढक्कन को मजबूती से बंद कर दें।
लेखक -रबीन्द्रनाथ चौबे, ब्यूरो चीफ, कृषि जागरण, बलिया, उत्तरप्रदेश।
Share your comments