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Khajur ki Kheti: इस विधि से करें खजूर की खेती, कम समय में मिलेगी बेहतरीन पैदावार!

Date Palm Farming: खजूर की खेती से कई किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं. राजस्थान, तमिलनाडु, केरल और गुजरात में खजूर की खेती अधिक की जाती है. खजूर कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसलिए मार्केट में इनकी सालभर मांग रहती है. आइये इस आर्टिकल में खजूर की खेती से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें जानें.

मोहित नागर
इस विधि से करें खजूर की खेत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इस विधि से करें खजूर की खेत (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Date Palm Farming Tips: भारत के कई राज्यों में खजूर की खेती की जाती है, जिससे किसान अच्छा खासा  मुनाफा कमा रहे हैं. राजस्थान, तमिलनाडु, केरल और गुजरात के अधिकतर किसान खजूर की खेती करते हैं. बता दें, खजूर कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है और मार्केट में इनकी सालभर मांग रहती है. खजूर खराब नहीं होता है और इसके फल को सुखाकर छुहारा बनाया जाता है. इसके अलावा, खजूर का अनेक प्रकार की चीजें को तैयार करने में भी इस्तेमाल किया जाता है, जैसे- जूस, जैम, चटनी, अचार और बेकरी प्रोडक्ट्स.

आज हम आपको कृषि जागरण के इस आर्टिकल में खजूर की खेती से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों की जानकारी देने जा रहे हैं.

उपयुक्त जलवायु

खजूर की खेती के लिए शुष्क जलवायु को सबसे उपयुक्त माना जाता है. इसकी फसल को कम बारिश की आवश्यकता होती है, इसलिए सूखे मरुस्थलीय इलाकों में खजूर का सबसे अधिक उत्पादन किया जाता है. इसके पौधों को ठीक तरह से विकसित होने के लिए भरपूर प्रकाश की आवश्यकता होती है. वहीं, इसके पौधें को तेज सर्दी नुकसान पहुंचा सकती है. इसके पौधें के लिए 30 डिग्री तापमान और फल को पकाने के लिए 45 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है. खजूर के एक पौधे की ऊंचाई लगभग 25 मीटर तक हो सकती है.

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उपयुक्त मिट्टी

खजूर की खेती के लिए रेतीली और भुरभुरी मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है. इसके खेत की मिट्टी  उचित जल निकासी वाली होनी चाहिए. किसान खजूर की खेती 2 से 3 मीटर तक कठोर पथरीली भूमि पर नहीं कर सकते हैं. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 7 से 8 के बीच होना आवशयक होता है.

खजूर की उन्नत किस्में

खजूर की किस्मों को नर और मादा प्रजाति में विभाजित किया गया है. इसकी बरही किस्म सबसे अधिक पैदावार देने के लिए पहचानी जाती है. इस किस्म का पौधा काफी तेजी से बढ़ता है लेकिन इसमें फल देरी से पकते हैं. इसके एक पौधे से लगभग 70 से 100 किलो तक फलों का उत्पादन होता है. इसके फलों का आकार अंडाकार और रंग पीला होता है. खजूर की मादा प्रजाति में आने वाली किस्मों में बरही, खुनेजी, हिल्लावी, जामली, खदरावी और मेडजूल शामिल है. वहीं, खजूर की नर किस्म केवल फूल आते हैं, इसमें फल नहीं लगते. खजूर की नर किस्मों में धनामी, मदसरीमेल शामिल है.

इस विधि से लगाएं पौधा

किसानों को खजूर के पौधों की रोपाई के लिए एक मीटर की दूरी पर खेत में गड्ढे तैयार करने चाहिए. इनमें आपको उपयुक्त मात्रा में गोबर की खाद को मिट्टी के साथ मिलकार डाल देना चाहिए. आपको खजूर के पौधें किसी नर्सरी से खरीद लेने चाहिए और इन्हें गड्ढों में लगा देना चाहिए. आप एक एकड़ खेत में लगभग खजूर के 70 पौधें लगा सकते हैं. रोपाई से करीब 3 वर्ष के बाद इसका पौधा पैदावार देना शुरू कर देता है.

खजूर के पौधें की सिंचाई

आपकी जानकारी के लिए बता दें, खजूर के पौधें को कम सिंचाई की आवश्यकता होती है. गर्मी के मौसम में आपको इसके पौधे को एक महीने में 15 से 20 दिन ही पानी देना चाहिए. वहीं सर्दियों में केवल एक बार ही सिंचाई इसके पौधे के लिए उपयुक्त होती है.

मोटी होगी कमाई

खजूर की खेती करने के लिए आपको अधिक खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती है. इसका एक पेड़ 70 से 100 किलो तक की पैदावार दे सकता है. यदि आप इसकी एक एकड़ में खेती करते हैं, तो एक बार में 5 हजार किलो तक उपज प्राप्त कर सकते हैं. भारतीय बाजारों में खजूर की अधिक मांग रहती है, जिससे इन्हें महंगे दाम पर बेचा जाता है. किसान एक बार इसकी फसल लगाकर 5 साल तक लगभग 3 से 4 लाख रुपये की कमाई आसानी से कर सकते हैं.

English Summary: khajur ki kheti information date palm cultivation tips get good production Published on: 05 October 2024, 12:51 PM IST

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