आखिर मजबूरी में खेती-किसानी क्यों कर रहा है अन्नदाता ?

भारत कृषि प्रधान देश कहा जाता है. तो आखिर क्या वजह है कृषि प्रधान देश में किसान खेती करने से ऊब रहा है. आज के भारत में किसानों के पास कोई विकल्प न होने के कारण आज का किसान मजबूरन खेती कर रहा है. आज कोई किसान ये नहीं चाहता है कि उसके बच्चे बड़ा होकर किसानी करें कयोंकि वह नहीं चाहता कि उसकी आगे की पीढ़ी भी वही झेले जो वह झेल रहा है. यही वजह है आज हमारे देश में किसान आये दिन आत्महत्या कर रहा है. ये हकीकत 'वेदा लाइफ रिसर्च संस्था' के सर्वे में सामने आई है. वेदा लाइफ रिसर्च संस्था ने उत्तर प्रदेश समेत देश के आठ राज्यों में 6 हजार से ज्यादा किसानो की आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य समस्याओं पर सर्वे किया।

हर मौसम की मार सहने वाला आज भारतीय अन्नदाता आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से क्षीण होता चला जा रहा है. खेती में ज़्यादा लागत और उसमे कम मुनाफे कि वजह से किसान कर्ज में डूबता चला जा रहा है. 'वेदा लाइफ रिसर्च' के सर्वे में ये बात सामने आई है कि देश के किसानो कि हालत उतनी अच्छी नहीं जितनी सरकारी आकड़ो में बताई जा रही है. हक़ीक़त तो ये है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के ज्यादातर किसानो कि आर्थिक स्थित तो ऐसे है की वे शादी तक के समारोह में शामिल नहीं हो पाते है. अगर उत्तर प्रदेश में 84 फीसद ऐसे किसान है जिन्हे कोई कमाई का विकल्प मिल जाये तो वह किसानी करना छोड़ देंगे। इसके आलावा पूरे में ऐसा करने के लिए 75 फीसद किसान है. उत्तर प्रदेश के 92 फीसद किसान अपने बच्चो को किसानी नहीं करने देने चाहते। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाए भी उतना लाभ नहीं पहुंचा पा रही है जितना किसानो को जरूरत है.

यह सर्वे भारत के आठ राज्यों उत्तर प्रदेश 1237, हरियाणा 982,पंजाब 623, बिहार 982,मध्य प्रदेश 782, छत्तीसगढ़ 520, प. बंगाल 684, महाराष्ट 769 कुल 6579 लोगों पर किया गया सर्वे। जिसमे पाया गया कि 59 फीसद खेती की लागत, 53 फीसद चिकित्सा का खर्च,58 फीसद बच्चों की शिक्षा खर्च उठाने में असमर्थ है. इस सभी किसनो में 24 फीसद कैंसर से पीड़ित,38 फीसद किसान जमीनी विवाद से परेशान, 45 फीसद हैं वर्तमान में तनावग्र्रस्त,7 फीसद घरेलू विवादों से परेशान है.

Source : सभी आंकड़े आठ राज्यों का राष्ट्रीय औसत हैं

प्रभाकर मिश्र, कृषि जागरण

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