1. सम्पादकीय

तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए गंधक का महत्व एवं प्रयोग विधि

गंधक की आवश्यकता क्यों? तिलहन, दलहनी व अन्य फसलों को अपनी अच्छी बढ़वार और भरपूर उत्पादन के लिए कुल 17 पोषक तत्वों की सन्तुलित खुराक की आवश्यकता होती है. जिनमें से 3 पोषक तत्व (C,H,O) हवा तथा जल से मिल जाते हैं तथा शेष 14 पोषक तत्व (N, P, K, S, Ca, Mg, Fe, Zn, Mo, Co, B, Mn, Cl, Ni ) जमीन से अपनी खुराक के रूप में लेते हैं. पौधों के लिए नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश मुख्य पोषक तत्व हैं, इनके बाद गंधक चौथा प्रमुख पोषक तत्व है. एक अनुमान के अनुसार तिलहन फसलों के पौधों को फास्फोरस के बराबर मात्रा में गंधक की आवश्यकता होती है. राज्य में बोई जाने वाली तिलहनी फसलों में ( मूंगफली, तिल, अरण्डी, सरसों, तारामीरा, अलसी इत्यादि ) तथा दलहनी फसलों में चना, मटर, मसूर इत्यादि प्रमुख हैं. इनके अलावा प्याज, लहसुन, आलु, कपास व तम्बाकु फसलों में भी गंधक की विशेष जरूरत होती है. एक ही खेत में हर वर्ष इन फसलों की खेती करने से खेतों में गंधक की कमी हो रही है. जिससे फसल की पैदावार व गुणवत्ता में निरन्तर कमी आ रही है. राज्य में कृषकों द्वारा इन फसलों में प्रायः गंधक रहित उर्वरक जैसे डी.ए.पी. एवं यूरिया का उपयोग अधिक किया जा रहा है जबकि गंधक युक्त उर्वरकों जैसे सिंगल सुपर फास्फेट व जिप्सम का उपयोग कम हो रहा है, जिससे खेतों में गंधक की आवश्यकता पड़ रही है.

गंधक का महत्व :- तिलहनी फसलों में गंधक के उपयोग से दानों में तेल की मात्रा में बढोतरी होती है, साथ ही दाने सुडौल व चमकीले बनते है तथा पैदावार अधिक प्राप्त होती है. इसी प्रकार दलहनी फसलों में प्रोटीन के निर्माण के लिए गंधक अतिआवश्यक पोषक तत्व हैं. गंधक से दलहनी फसलों में भी दाने सुडौल बनते हैं व पैदावार बढ़ती है. यह गंधक दलहनी फसलों की जडो में स्थित राइजोबियम जीवाणुओं की क्रियाशीलता को बढ़ाता है. जिससे पौधे वातावरण में उपस्थित स्वतन्त्र नत्रजन का अधिक से अधिक उपयोग कर सकते हैं. मानव आहार में प्रोटीन के महत्व को ध्यान में रखते हुये यह आवश्यक है कि अच्छी गुणवत्ता वाली दलहनी व तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाया जाये.

गधंक की कमी की जांच कैसे करें : फसलों को संतुलित खुराक देने के लिए सर्वप्रथम अपने खेत की मिट्टी की जांच अवष्य करावें. जिससे फसल को कितनी मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता है तथा भूमि में इस पोषक तत्वों की कितनी उपलब्धता है का पता लग जायेगा.

गधंक के प्रमुख स्रोत :-

गधंक की पूर्ति के लिए बुवाई से पूर्व मृदा में तथा खडी फसल में सिंचाई से पूर्व फसलानुसार निम्न मात्रा का प्रयोग करेः-

जिप्सम गंधक का सर्वोतम व सस्ता स्रोत है तथा राज्य में आसानी से उपलब्ध हैं. जिप्सम में लगभग 13.5 प्रतिषत गंधक पाया जाता है. क्षारीय भूमि में ही जिप्सम डालें. जिप्सम का उपयोग न केवल उत्पादन एवं उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि करता है बल्कि भूमि को क्षारीय होने से रोकता है एवं क्षारीय भूमि से सोडियम (क्षार) को हटाकर भूमि को भी ठीक करता है.

डी.ए.पी. उर्वरक के स्थान पर गंधक युक्त उर्वरक-सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग करने से फसल को  ज्यादा से ज्यादा गंधक मिलता रहता है.

अतः गंधक की पूर्ति के लिए किसान भाईयों को सभी दलहनी व तिलहनी फसलों से अच्छी गुणवत्ता वाला अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए फसलों में अन्तिम जुताई के समय जिप्सम एंव गंधक युक्त उर्वरकों का खेत में प्रयोग करना चाहिए.             

लेखकः-

हरीश कुमार रछोयॉ ए मुकेश शर्मा एवं डॉं.वी.के.सैनी

वैज्ञानिक शस्य विज्ञान ए पोद्य संरक्षण एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक

कृषि विज्ञान केंन्द्र,सरदारषहर ,चूरू (राजस्थान)

Email: hrish.rachhoya@gmail.com  , Mobile No: 9636442846

English Summary: Significance of the use of sulfur and method for oilseed and pulley crops

Like this article?

Hey! I am . Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News