किसानों की आय और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानीकारक है फार्मेलीन द्वारा मछलीयों का संरक्षण

फार्मेलीन एक रंगहीन द्रव है जो कि फार्मेलीहाइड के जलीय विलयन से बनाया जाता है. सामान्य तौर इसका उपयोग प्रयोगशालाओं मे मरे हुये जन्तुओं को सड़ने से बचाने के लिए किया जाता है. किन्तु इसकी सुयोग्य संरक्षण क्षमता की वजह से आजकल मांस का व्यापार करने वाले व्यवसायी जैसे मछली का व्यापार करने वाले व्यवसायी  या किसान, दुकानदार इसका उपयोग मछली को सड़ने से बचाने हेतु करने लगे हैं. औऱ इसका उदाहरण हमारे देश के कुछ राज्य जैसे गोवा, केरल आदि में देखने को मिल रहा हैं.

किसानो की आय पर हानीकारक प्रभाव       

जब किसान मछलीयों के संरक्षण के लिए फार्मेलीन का प्रयोग करता है , तो निश्चित रुप से मछली अधिक समय तक ताजा बनी रहती है. लेकिन, मानव शरीर के लिये फार्मेलीन हानीकारक है अतः बाजार में फार्मेलीन युक्त मछली का कोइ ग्राहक नहीं मिलने से उसे बहुत बडा नुकसान उठाना पड सकता है. जैसे कि हाल ही में गोवा एवं केरल में देखने को मिला है. मछलीयों के संरक्षण के लिए किसान भाइ फार्मेलीन के स्थान पर बर्फ का प्रयोग कर सकते हैं व अधिक समय तक संरक्षित करने के लिए -40 डिग्री से.पर डीप फ्रीजर्स में रख सकते है.

राजस्थान के किसान भाईयों को सलाह

राजस्थान में मछली पालन करने वाले किसान अक्सर इसे बेचने के लिए जयपुर या दिल्ली के मछली बाजार में भेजते हैं. दूरी अधिक होने के कारण मछलीयों के संरक्षण के लिए किसान फार्मेलिन का प्रयोग करते हैं. लेकिन, उन्हें इस बात पर ध्यान देने की जरुरत है की अगर वो ऐसा करेंगे तो उनकी मछली को कोई नहीं खरीदेगा और इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है. अतः परिवहन के समय मछलियों के संरक्षण हेतु राजस्थान के किसान बर्फ का प्रयोग कर सकते हैं. इससे उनकी मछलीयां भी खराब नहीं होगी एवं मछलीयों के ताजा बने रहने से बाजार में उचित मूल्य भी प्राप्त होगा.

मानव स्वास्थ्य पर हानीकारक प्रभाव

खाद्य पदार्थों के संरक्षण में फार्मेलीन का उपयोग उचित नहीं है. क्योंकि मानव शरीर के लिये इसकी मात्रा 2 पीपीएम से अधिक होने पर यह अपने अत्यधिक हानिकारक प्रभाव प्रदर्षित करता है. जिसमें श्वास, गला, नाक से संबधित बीमारीयां प्रमुख है. कई बार खून की उल्टीयां एवं मल मूत्र से खून आना भी फार्मेलीन की वजह से देखा गया है यह फार्मेलीन कैंसर का कारण भी हो सकता है. अतः फार्मेलीन का उपयोग खाद्य पदार्थो के संरक्षण में बिल्कूल भी नहीं किया जाना चाहिए.

फार्मेलीन से युक्त मछली को पहचानने के तरीके

मछली कठोर हो जाती है.

मछली जैसी गंध नही आती है.

आसपास मक्खीयां नहीं भिनभिनाती है.

मछली की आंखे स्पष्ट रहती है एवं मांस रबर के जैसा हो जाता है.

फार्मेलीन केआटी का प्रयोग करके शत प्रतिशत स्थिति स्पष्ट की जा सकती है कि मछली में फार्मेलीन की मात्रा है या नहीं.

मछली खरीदते समय ध्यान रखने वाली बातें

मछली को अंगुली से दबाकर देखे यदि यह दब जाती है एवं अंगुली हटाने पर पुनः अपनी वास्तविक अवस्था में आ जाती है तो यह ताजा मछली होनी चाहिए.

अधिक उचित यह होगा कि जीवित मछली ही खरीदे.

मछली में मछली जैसी गंध आनी चाहिए.

मछली की आंखे सुस्पष्ट होनी चाहिए.

 

लेखक

पवन कुमार शर्मा, पी.एच.डी. शोधार्थी,

मत्स्य विज्ञान महाविधालय एवं अनुसंधान संस्थान पोन्नेरी,

तमिलनाडू डॉ. जे. जयललिथा मात्स्यिकी विश्वविधालय तमिलनाडू - 601204

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