Editorial

चुनौतियों से उभर कृषि को समृद्ध बनाना कृषि मंत्रालय की प्रमुख चुनौती

कृषि मंत्रालय भारत सरकार का एक अहम मंत्रालय है। इस मंत्रालय का कार्य भारत में कृषि शिक्षा एवं खेती के साथ- साथ किसानों को बढ़ावा देना है। अभी हाल ही में मोदी मंत्रिमंडल 2.0 का गठन हुआ है. इस मंत्रिमंडल में कृषि मंत्रालय का कार्यभार मध्यप्रदेश के मुरैना से सीट से सांसद नरेंद्र सिंह तोमर को दिया गया है। हालांकि नए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पास पिछले कार्यकाल में ग्रामीण विकास और कोयला मंत्रालय था. इस मंत्रालय को संभालने के दौरान तोमर ने काफी अच्छा काम किया था। पांच साल के दौरान तोमर के कार्यों को देखकर ही मोदी कैबिनेट में कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। नए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के सामने के कई चुनौतियां है जिनमें से मुख्य चुनौती 2022 तक देश के हर एक किसान की आय दोगुनी करना है। मोदी सरकार के इस लक्ष्य को पूरा करने में कृषि मंत्री तोमर कितना सफल हो पाएंगे वो तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा !

अगर नए कृषि मंत्री के चुनौतियों की बात करें तो उनके सामने निम्न चुनौतियां है -

- कृषि के क्षेत्र में विकसित हुए नवीन तकनीकों की सम्पूर्ण जानकारी किसानों तक पहुंचाना

- जैविक कृषि के लिए किसानों को जोड़ना

- सिंचाई की नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना

- मृदा स्वस्था कार्ड का लाभ सभी किसानों तक पहुंचाना

- किसानों के लिए नई मंडी स्थापित कराना

- कृषि बीमा का लाभ सभी किसानों तक पहुंचाना

- 2022 तक देश के सभी किसानों की आय दोगुना करना

- फसलों की उचित दाम मुहैया कराना

- उर्वरक की समस्या का समाधान करना

- किसान आंदोलनों से निपटना

कृषि से संबंधित मंत्रालय और विभागों का बंटवारा किया गया है उनमें इस बार कुछ नए चेहरे भी है। जिनमें नरेंद्र सिंह तोमर जिन्हें केंद्रीय कृषि मंत्रालय का कार्यभार सौपा गया है वो इस मंत्रालय को पहली बार संभाल रहे है। गिरिराज सिंह को केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन विभाग का कार्यभार सौपा गया है जो कि इस विभाग में नए चेहरे है। संजीव बालियान को मत्स्य एवं पशुपालन विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है ये भी इस विभाग में नए चेहरे है।

खरीफ का सीजन चल रहा है। इस सीजन का मुख्य फसल धान है। किसान इन दिनों धान की खेती की तैयारी करने के साथ ही मानसून का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे है। बीते दिनों मौसम विभाग ‘आईएमडी’ के उपमहानिदेशक डॉ आनंद शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून एक सप्ताह देरी से चल रहा है। 6 जून तक केरल के तटीय इलाकों में दस्तक दे सकता है। इनदिनों जल संरक्षण का मुद्दा सबसे ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। इसके मद्देनजर केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारें अलग - अलग हथकंडे अपना रही है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर और जल के दोहन से निपटने के लिए धान के जगह पर मक्का व दलहन की खेती करने वाले किसानों को 4,000 से लेकर 4,500 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देगी।

केंद्र सरकार ने भी हाल ही में छह राज्यों को सूखे को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी दिशा-निर्देश में यह साफ कहा गया है कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्य के बांधों में पानी गंभीर स्तर तक नीचे पहुंच गया है. आने वाले दिनों में इन राज्यों में जल संकट और गहराने के आसार हैं। देश में पानी के जलस्तर का लगातार नीचे होते जाना चिंता का विषय है। ऐसे में सरकार को पानी के बचाव के लिए धान की फसल के लिए नए अनुसंधान और फिर उनके लाभ किसानों तक पहुँचाना बेहद जरूरी है।

केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना का दायरा बढ़ा दिया है अब इस योजना के अंतर्गत छोटे किसानों के साथ – साथ बड़े किसानों को भी लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को सालाना 6 हजार रुपये तीन किस्तों में मुहैया कराया जाएगा। केंद्र सरकार की यह योजना किसान हित में कितना कारगर साबित होगी ये तो आने वाले समय में ही पता चला पाएगा। मोदी मंत्रिमंडल 2.0 से किसानों को बहुत सारी उम्मीदें है। उम्मीद है मोदी सरकार भी किसानों के हित में ऐसे कारगर काम करेगी जिनसे उनके जीवन में खुशहाली आएंगी। इन्हीं सभी उम्मीदों के साथ देश के सभी किसान खुशहाल हो उसकी कामना करते हैं....



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