1. सम्पादकीय

बेबी कॉर्न मक्के की उन्नत खेती

KJ Staff
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Baby corn

Baby Corn

बेबी कॉर्न मक्के के भुट्टे की प्रारम्भिक अवस्था है जिसमें भुट्टे के परगन से पहले की कोमल अवस्था में तोड़ लिया जाता है. जिसे बेबी कॉर्न कहते है इसमें 2 से 3 सेन्टीमीटर तक सिल्क (बालयामोचा) निकले रहते है, इसकी तुड़ाई सिल्क निकलने के 1 से 2 दिन के अन्दर कर लेना चाहिए.

इसकी तुड़ाई मौसम पर आधरित है आज कल बेबी कॉर्न की खेती लोकप्रिय हो रही है जिसका उपयोग सब्जी या सलाद के रूप में बहुत किया जा रहा है. इसका उपयोग थाईलैंड ताईवान हांगकांग आदि देशों में काफी पहले  से किया जा रहा है, परन्तु अब अरब देशों में इसकी मांग बढ़ती जा रही है इसको सब्जी एवं सलाद के साथ-साथ आचार पकौड़ा तथा अन्य कई चाइनीस पकवान भी तैयार किये जाते हैं.

बेबी कॉर्न बहुत पौष्टिक होता है जसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन फोस्फोरस अधिक मात्रा में पाई जाती है. इसके साथ-साथ हरे पौधों से पशुओं के लिए चारा भी प्राप्त होता है इससे साइलेज भी तैयार की जा सकती है. साइलेज में 13.5% प्रोटीन 1.4% वसा 34.8% रेशा 6.5% रेश पाया जाता है जो पशुओं  के लिए संतुलित आहार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है.

बेबी कॉर्न  की मांग बढ़ने का एक मुख्य कारण यह है की इसमें रसायनों आदि से बिल्कुल कम या प्रभावित नहीं होती है क्योंकि भुट्टा ऊपर से कई पत्तों के हस्क से ढका रहता है.

भारत में बेबी कॉर्न  की खेती शरू से महानगरों के आस-पास तक सीमित है क्योंकी इन महानगरों में विभिन्न बड़े होटल हैं जहां इसकी मांग अधिक है लेकिन अब इसकी खेती का प्रचलन उत्तर-प्रदेश के आगरा मथुरा, अलीगढ़ महाराट्र के पुणे एवं नासिक बिहार के पूर्णिया ,बांका, कटिहार एवं वेगुसराय आदि जिलो में भी किया जा रहा है.

बेबी कॉर्न का बीजोपचार (Baby Corn Maize Seed Treatment)

सर्वप्रथम बीज थीरम या कैप्टान आदि रसायनों से 25 ग्राम प्रति किलो बीज को उपचारित कर लेना चाहिए.

बेबी कॉर्न की पादप सघनता (Baby Corn Maize Plant Concentration)

बेबी कॉर्न  की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए 110000 से 115000 पौधे प्रति हैक्टेयर रोपे जाते हैं बीज की बुवाई के लिए पंक्ती से पंक्ती की दूरी 50-60 सेन्टीमीटर तथा बीज से बीज की दूरी 10-15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए.

बेबी कॉर्न मक्के की बुवाई का समय (Baby corn maize sowing time)

उत्तरी क्षेत्र- फरवरी-मार्च

पूर्वी क्षेत्र- जनवरी से सितम्बर मधय, पश्चमी क्षेत्र और दक्षिणी क्षेत्र- सालभर.

बेबी कॉर्न के लिए खाद एवं उर्वरक (Manure and Fertilizer for Baby Corn Maize)

बेबी कॉर्न  की अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए मृदा जाँच के आधार पर उचित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए 130-150 किलो ग्राम, 50-60 किलो ग्राम फास्फोरस तथा 40-50 किलोग्राम पोटास की मात्रा प्रति है क्टेयर के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए मक्का की तरह फास्फोरस एवं पोटास की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की 33% मात्रा बुवाई के समय खेत में बराबर से मिला देना चाहिए तथा निट्रोजन की 33% मात्रा 25-30 दिन के बाद तथा शेष मात्रा को नरमंजरी निकलते समय देना चाहिए.

बेबी कॉर्न मक्के की सिंचाई (Baby corn maize irrigation)

बसंत ऋतु में उगे गई फसल में 8-10 दिन के अन्तराल पर लगातार सिचाई करते रहना चाहिये खरीफ के मौसम में वर्षा न होने पर आवश्यकतानुसार सिचाई करते रहना चाहिए.

बेबी कॉर्न मक्के की फसल सुरक्षा (Baby Corn Maize Crop Protection)

अच्छी गुणवत्तापूर्ण उपज लेने के लिए जैविक दवाओं जैसे नीम से बनी द्वाओं का इस्तेमाल करना चाहिए. अपरिहार में फ्यूराडान (3 जी) 30 किलोग्राम अथवा फोरेट (10 जी) लिकोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से स्तेमाल करना चाहिए. अपरिहार्य में फ्यूराडान (3 जी) 30 किलोग्राम अथवा फोरेट (10 जी) 10 किलोग्राम प्रती हैक्टेअर की दर से 10 दिन के अन्तराल के बाद कीड़ो को रोकने के लिए छिडकाव करना चाहिए.

बेबी कॉर्न मक्के का प्रमुख प्रभेद (Main Variety of Baby Corn Maize)

बेबी कॉर्न  की अच्छी उपज हेतु अच्छे प्रभेदो का चयन बहुत महत्वपूर्ण है बी. एल. 41, एम. इ. एच-133, एम.इ. एच-144, पूसा, अर्ली हाइब्रिड-1, पूसा अर्ली हाइब्रिड-2, पूसा अर्ली हाइब्रिड-3, आदि बेबी कॉर्न  की प्रमुख प्रजातियां हैं.

बेबी कॉर्न मक्के के लिए उपुक्त जलवायु (Suitable climate for baby corn maize)

मक्के की तरह बेबी कॉर्न  की फसल को भी भारत के विभिन्न क्षेत्रो में उगाया जा सकता है. इसकी अच्छी खेती के लिए अनुकूलतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आस-पास होना चाहिए. उत्तर भारत में अधिक गर्मी के समय तापमान बढ़ने से भुट्टे का विकास तेजी से होता है, जिसके कारण कोमल अवस्था में भुट्टे की गुणवत्ता में गिरावट आने लगती है.

बेबी कॉर्न मक्के के लिए भूमि (Land for Baby Corn Maize)

इसकी खेती मक्के के ही भाँती बलुई दोनत से लेकर भारी मृदा तक सभी प्रकार की भूमियो में की जा सकती है. अधिकतम पैदावार के लिए अधिक उपजाऊ मिट्टी जिसमे जीवांश की पर्याप्त मात्रा हो तथा जिस मृदा का पी एच मान 6-7 के बीच हो अच्छी मानी जाती है. भूमि में जल निकाश की उचित ब्यवस्था होनी चाहिए.

बेबी कॉर्न मक्के की भूमि तैयारी (Baby Corn Maize Ground Preparation)

गर्मी के दिनों में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करनी चाहिए. बुवाई से पहले एक बार गहरी जुताई करके 2-3 बार हैरो या कलीवेटर से जुताई करते हैं जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है.

बेबी कॉर्न मक्के की बीज दर (Baby Corn Maize Seed Rate)

बीज की मात्रा में फसल बोने का उद्देश बोने का समय तथा विधि आदि कारणों पर निर्भर करती है. मक्के की तुलना में बेबी कॉर्न  को थोड़ी अधिक मात्रा में बीज की आवश्यकता होती है. क्योंकी इसे कम समय के लिए औसतन 30-35 किलो ग्राम प्रति हक्टेयर बीज पर्याप्त होता है.

बेबी कॉर्न मक्के का नर मंजरी तोड़ना (Breaking the Manjari of Baby Corn Maize)

मक्के की फसल में बेबी कॉर्न  की उपज लेने के लिए इसमें महतवपूर्ण कार्य नर मंजरी को तोड़ना होता है. पोधो में फूल आने से पहले ही नर मंजरी को तोड़ देना चाहिए नर मंजरी को तोड़ने से अधिक भुट्टो का उत्पादन होता हे, तथा परागण न होने से भुट्टे की गुणवत्ता भी खराब नही होती हे.

बेबी कॉर्न मक्के की तुडाई (Baby corn maize plucking)

बेबी कॉर्न की फसल पर तुड़ाई के समय का बहुत प्रभाव पड़ता हे, क्योंकि तुड़ाई में एक दिन की भी देरी होने से कोमलता ख़त्म होने लगती है. जिससे गुणवत्ता में कमी आ जाती है.

ताजे बाजार के लिए कोमल भुट्टे से झुआ निकलने से पहले तुड़ाई करना चाहिए तथा प्रसंस्करण के लिए भुट्टे की तुड़ाई सिल्क निकलने के 2-3 दिन बाद करनी चाहिए मुलायम भुट्टे की तुड़ाई बोने के 47-50 दिन बाद कर सकते है.

इन्हें प्रतिदिन सावधानी के साथ तोड़ना चाहिए जिससे पत्तियां व तनों को नुकसान न हो भुट्टों को छीलकर बाजार में बेचना चाहिए.  सामान्यत: अच्छी प्रजातियों में 45 -55 दिन की फसल अवधि में 6-7 तुड़ाई हो जाती है. फसल की अवधि रबी के मौसम में 10-15 दिन बढ़ सकती है.

बेबी कॉर्न मक्के की उपज एवं शुद्ध लाभ (Yield and Net Profit of Baby Corn Maize)

सिंचित दशाओं में संकर प्रजातियों में 60 -80 कुन्टल प्रति हेक्टेयर तक बिना छिले हुये भुट्टो के अतिरिक्त 250-300 कुन्टल प्रति हेक्टेयर हरे पौधों की उपज प्राप्त होती है. जिसे पशुओं के चारे साइलेज या हरी खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है.

लेखक:

तेजप्रताप, वरीय अनुसंधान सहायक कृषि विज्ञान केन्द्र सिरस औरंगाबाद (824112)

अरविन्द भाई पटेल, वरीय अनुसंधान सहायक बि.कृ.वि.वि. सबौर(813210), बिहार

संतोष कुमार दुबे, बि॰कृ॰वि॰वि॰सबौर, बिहार (813210)

अनुपम आदर्श, प्रबंधक प्रक्षेत्र, कृषि विज्ञान केन्द्र सरैया, बिहार(843126)

डॉ. चन्दन कुमार सिंह ( शोध सहायक) वनस्पति संगरोध केन्द्र, अमृत्सर, पंजाब

English Summary: Advanced farming of baby corn maize

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