दिल्ली-एनसीआर में कल की बारिश से काफी बदलाव देखने को मिला सुबह की शुरुआत हल्की ठंडी हवाओं के साथ हुई, जिससे लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली और साथ ही मौसम विभाग ने आने वाले दिनों यानी की 3-4 अप्रैल के बीच बारिश होने की संभावना जताई है. इसके अलावा, अन्य राज्यों में दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव के कारण मौसम बिगड़ सकता है. ऐसे में IMD ने देश के कई राज्यों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया है.
दिल्ली-एनसीआर में कल के मौसम का हाल
आज दिल्ली-NCR में आसमान आंशिक रूप से साफ रहेगा और धूप भी निकलेगी, लेकिन तापमान ठंडा रहेगा, जिससे राजधानी के लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और अधिकतम तापमान 33°C से 35°C और 17°C से 19°C के बीच रहने की उम्मीद है.
मौसम विभाग IMD के अनुसार कल यानी 2 अप्रैल को मौसम में कोई खास बदलाव नहीं होगा. आसमान में बादल छाए रहेंगे और दिल्ली मे, न्यूनतम तापमान 35°C से 37°C और 19°C से 21°C के बीच रहने की उम्मीद है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 3-4 अप्रैल के बीच राजधानी दिल्ली में झमाझम बारिश होने की संभावना है.
बिहार और झारखंड कैसा रहेगा मौसम का मिजाज
मौसम विभाग ने बिहार के कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई है. IMD के अनुसार बिहार में हल्की मध्यम बारिश होने की आंशका है. झारखंड में 1 और 4 अप्रैल और ओडिशा में 31 मार्च से 4 अप्रैल के बीच, गरज-चमक, बिजली कड़कने और 40-50 किमी-घंटा से लेकर 60 किमी-घंटा तक की तेज़ हवाओं के साथ, कहीं-कहीं से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश होने की भारतीय मौसम विभाग ने संभावना जताई है.
तमिलनाडु और तेलंगाना में IMD अलर्ट
तमिलनाडु में 31 मार्च से मौसम के हालात बिगड़ते नजर आ गए थे. मौसम विभाग ने भी 3-4 अप्रैल को बिजली गिरने की संभावना बताई है और केरल और माहे. तटीय कर्नाटक में 31 मार्च से 2 अप्रैल यानी अगले 5 दिनों के दौरान बिजली गिरने की आशंका है. ऐसे में राज्य के लोगों घरों से कम बाहर निकले और सावधानी बरतें.
इसके अलावा, मौसम विभाग का अनुमान है कि तेलंगाना में 31 मार्च और 1 अप्रैल को कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है,जिससे तापमान में वृद्धि होने की आंशका है.
मध्य भारत में मौसम विभाग ने किया अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार अगले 5 दिनों के दौरान, मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर मध्यम बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज़ हवाएँ 30–50 किमी-घंटा चलने की संभावना है, जिससे इस इलाके के लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी.
वहीं, छत्तीसगढ़ में 31 मार्च से 2 अप्रैल तक, और विदर्भ में 1 और 2 अप्रैल को, ओलावृष्टि के साथ तूफ़ान (हवा की गति 50–60 किमी/घंटा और झोंके 70 किमी/घंटा तक पहुंचने की आशंका है.
अप्रैल माह के लिए कृषि-मौसम संबंधी सलाह
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किसान खड़ी फसलों-जैसे चावल, मक्का, दालें और तिलहन को उनकी विकास की महत्वपूर्ण अवस्थाओं विशेष रूप से फूल आने और दाना भरने के समय के दौरान हल्की और बार-बार सिंचाई दें. यह विशेष रूप से पूर्वी, पूर्वी-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में महत्वपूर्ण है.
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फसलों को गर्मी के तनाव से बचाने में मदद के लिए, पत्तियों पर पोटेशियम नाइट्रेट या अन्य 'एंटी-ट्रांसपिरेंट्स' का छिड़काव करें.
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किसान भाई मिट्टी में नमी का पर्याप्त स्तर बनाए रखें और जहाँ भी संभव हो, गर्मियों के मौसम के लिए कम अवधि वाली और गर्मी सहन करने वाली फसल किस्मों को प्राथमिकता दें.
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उत्तर-पश्चिमी भारत में, गेहूं और सरसों की फसलों की कटाई जितनी जल्दी हो सके पूरी कर लें, ताकि फसल पकने की अवस्था के दौरान होने वाली अत्यधिक गर्मी (जिसे 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' कहा जाता है) से होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके.
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इसके अलावा, मिट्टी में नमी बनाए रखने और फसल की जड़ों के आसपास खरपतवारों के विकास को रोकने में मदद के लिए 'मल्चिंग' (mulching) का अभ्यास करें. साथ ही दोपहर के सबसे गर्म घंटों के दौरान खेतों में काम करने से बचें.
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किसान आने वाली गर्म और आर्द्र स्थितियों को देखते हुए, फसलों की नियमित रूप से निगरानी करें, ताकि कीटों- एफिड्स, सफेद मक्खियाँ और थ्रिप्स के बढ़ते प्रकोप, साथ ही फंगल रोगों का समय पर पता लगाया जा सके.
लेखक: रवीना सिंह
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