फूलों की बगिया से महकाया, पत्नी का अंधेरा जीवन

अक्सर आपने लोगों को कहते हुए सुना होगा कि एक शहंशाह ने बनवा कर हंसी ताज महल, हम गरीबों का उड़ाया है मजाक। वैसे अगर शाहजहां ताज महल न भी बनवाते, तो क्या हर आदमी अपनी पत्नी के लिए ताजमहल बनवा लेता।

डायबिटीज से गई पत्नी की आंखें, लगा दी फूलों की बगिया

खैर, आप अपनी पत्नी के लिए छोटे-छोटे ऐसे कई काम है, जो करके उन्हें जीते जी अपने प्यार का इजहार कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ किया है जापान के रहने वाले तोशियूकी कुरोकी ने। उन्होंने अपनी पत्नी यासुको के लिए खुशबू बिखेरने वाले फूलों की पूरी बगिया ही बसा दी।

दरअसल, 52 साल की उम्र में डायबिटीज के कारण यासुको की आंखों की रोशनी चली गई थी। उनकी जिंदगी में अंधेरा छा गया था, लेकिन तोशियूकी ने फूलों से उनके जीवन को महका दिया।

मियाजाकी में कुरोकी परिवार हंसी-खुशी से साथ रहता था। कुरोकी की शादी 1956 में हुई थी। वे शिंटोमी में डेयरी फार्म में काम करते थे और उनके दो बच्चे भी हैं। विवाह के करीब 30 साल बाद कुरोकी ने तय किया कि अब वे रिटायरमेंट लेकर पूरे देश में घूमने जाएंगे।

मगर, जिंदगी में सबकुछ वैसा नहीं होता है, जैसा आपने सोचा हो। तोशियूकी के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी पत्नी की डायबिटीज इतनी बढ़ गया कि एक सप्ताह में ही उनकी आंखों की रोशनी चली गई। यह परिवार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था।

यासुको इस घटना से अवसाद में चली गईं। उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया और घर में भी माहौल तनावपूर्ण रहने लगा। तोशियूकी को एक बात पता थी कि उनकी पत्नी को फूलों से बहुत मुहब्बत है।

उन्हें खुद भी शिबाजाकुरा फूल अच्छे लगते थे। इन लाल गुलाबी फूलों की खुशबू मदमस्त कर देती है। लिहाजा तोशियूकी ने अपने घर के आसपास इनके पौधे लगाने शुरू कर दिए।

जब इनमें फूल आने लगे, तो यासुको भी घर से बाहर आकर बैठने लगीं। इस बहाने अड़ोसी-पड़ोसी भी आने लगे और यासुको एक बार फिर से लोगों से मिलने लगीं। तोशियूकी ने दो साल में शिबाजाकुरा के हजारों पौधे यहां लगा दिए। अब तो यह बाग इतना बड़ा हो गया है कि रोजाना करीब सात हजार लोग इसे देखने आते हैं।

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