1. ग्रामीण उद्योग

Best Small Business Ideas: केंद्र सरकार की सहायता से शुरू करें ये 15 Business, मिलेगी पर्याप्त सब्सिडी !

अनवर हुसैन
अनवर हुसैन
2 Hajar ka note

लॉकडाउन के कारण आपकी नौकरी चली गई है और बेरोजगार हो गए हैं तो अपना नीजि व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. नए व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकार मदद भी करती है. सरकारी सहायता से अपना कोई रोजगार शुरू कर आप आत्मनिर्भर बन सकते हैं. मैं इस लेख में आपको एक दर्जन से अधकि उन योजनाओं के बारे में बताऊंगा जिसको आप सरकारी मदद से शुरू कर सकते हैं. नीजि व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकार पर्याप्त सब्सिडी प्रदान करती है.

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें दोनों की रोजगार मूलक कई योजनाएं है जिसके सहारे आप अपना कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं. सूक्ष्म, मध्यम और लघु उद्योग स्थापित करने में मदद के लिए केंद्र सरकार एक अलग एमएसमएई मंत्रालय ही है. एमएसएमई के तहत कारोबार शुरू करने के लिए बैंक से आसाना से कर्ज भी मिल सकता है. निम्नलिखित योजनाएं आपके व्यवसाय शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने में सहायक है.

1. क्रेडिट गारन्टी निवेश योजना (Credit Guarantee Fund Yojana or CGMSME)

सूक्ष्म, मध्यम एवं छोटे उद्योगों को शुरू करने के लिए लोन की जरूरत होती है. बैंक बिना किसी तीसरे पक्ष की गारंटी एवं कुछ जमीनी कागजों के बिना आसानी से कर्ज यानी लोन नहीं देता है. इस समस्या को दूर करने और अपना व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक व्यक्तियों को आसानी कर्ज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की है. इसका पूरा नाम क्रेडिट गारंटी सूक्ष्म एवं लघु उद्योग फण्ड योजना है. यह योजना सिर्फ भारत में स्थापित किए जाने वाले उद्योगों को शुरू करने में क्रेडिट प्रदान करती है. इस योजना को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया है जिसका नाम सीजीएफटी (क्रेडिट गारंटी फण्ड ट्रस्ट) है. एमएसएमई के साथ साथ डेवलमेंट बैंक ऑफ़ इंडिया फॉर स्माल इंडस्ट्री (एसआईडीबीआई ) छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए भारतीय उद्यमियों को कर्ज उपलब्ध कराता है. इस योजना के तहत उद्यमियों को 100 करोड़ रूपए तक कर्ज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.

2. छोटे स्तर पर जैविक खेती के लिए छूट (Organic farming subsidy)

इस स्कीम में सरकार उन लोगों को सब्सिडी प्रदान करती जो जैविक खाद, जैव उर्वरक एवं जैविक खेती आदि से सम्बंधित उत्पादों का निर्माण करना चाहते है. योजना को सरकार द्वारा पूरे देश भर में लागू किया गया है. इस योजना के तहत सरकार 50 प्रतिशत की छूट यानी सब्सिडी देती है. इस राशि को सरकार बैंक की सहायता से आवेदक को तक पहुंचाना सुनिश्चित करती है.

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3. वस्त्र उद्योग – तकनीकी अपग्रेडिंग फण्ड योजना (Textile Industries – Technology Upgradation Fund Scheme)

इस योजना को टेक्सटाइल मंत्रालय ने शुरू किया जो अप्रैल सन् 1999 से प्रभावी हुआ. इस योजना के तहत सरकार जूट उद्योग को भी सहायता प्रदान करती है. इस योजना के तहत एसएसआई को 15 % अतिरिक्त सब्सिडी एवं पावर लूम सेक्टर को 20 प्रतिशत क्रेडिट लिंक के साथ मदद दी जाती है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत मशीनरी के लिए एवं 5 प्रतिशत ब्याज के भार को कम करने के लिए दी जाती है.

4. खाद्य उद्योग को बेहतर बनाने एवं स्थापना करने हेतू योजना (Scheme for Technology Upgradation/ Establishment for Food Processing Industries)

खाद्य उद्योग को बेहतर बनाने एवं नए उद्योग स्थापित करने के साथ साथ इनको अपग्रेड करने के लिए सरकार ने यह योजना तैयार की है. इस योजना के अंतर्गत मुर्गीपालन, दूध, मांस,कृषि, भोजन, मछली पालन एवं फल समेत तमाम उद्योगों को शामिल किया गया है. सरकार प्लांट एवं मशीनरी पर 25 प्रतिशत तक राहत देती है. यह राशि 25 से 50 लाख तक क्षेत्र विशेष के अनुसार दी जाती है.

5. चमड़ा उद्योग विकास योजना (Development of Leather Industry)

इस योजना की सहायता से सरकार जूता एवं चप्पल के साथ साथ उन सभी उद्योगों की मदद करती है जिनका प्रोडक्ट चमड़े से सम्बंधित है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देना है.

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6. क्रेडिट पाने हेतु सीएलसीएसएस (तकनीकी उपग्रडेशन और पूंजी लिंक्ड योजना)( Credit Linked Capital Subsidy)

यह योजना एमएसएमई मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है. इसलिए छोटे उद्योगों को इसका लाभ उठाकर अपनी कंपनी को अपग्रेड करना चाहिए. इस प्रोग्राम में नई कंपनी खोलने वाले व्यापारियों को लगभग 15 प्रतिशत तक ही सब्सिडी मिलेगी लेकिन इसकी सीमा को अधिकतम 15 लाख रूपए तक रखा गया है. इसमें स्टार्टअप्स करने वाले व्यापारी इस राशि का उपयोग अपनी मशीनरी एवं प्लांट को सुधारने में भी खर्च कर सकते है.

7. एमएसएमई के लिए बाजार विकास योजना (Market Development Assistance Scheme)

इस योजना के माध्यम से सरकार मार्केटिंग करने में मदद करती है अर्थात आयोजित होने वाले विभिन्न प्रकार के विश्व स्तरीय व्यापारिक मेलों एवं नई तकनीकी से सम्बंधित प्रदर्शनियों में शामिल होने के लिए आने वाले खर्च के लिए सब्सिडी देती है. भारत सरकार इसके लिए 75 प्रतिशत तक की राशि सब्सिडी के रूप में देती है जो 3 साल तक के लिए होती है.

8. एमएसएमई गुणवत्ता एवं तकनीकी उन्नति समर्थन योजना (Technology & Quality Upgradation Support for MSMEs)

इस योजना की सहायता से सरकार एमएसएमई उद्योगों को उनके प्रोडक्ट की गुणवत्ता एवं तकनीकी में सुधार लाने का प्रयास करती है. इस योजना की पात्रता हेतु एमएसएमई में पंजीकरण या फिर आईएसओ का सर्टिफिकट होना जरुरी है. आवेदनकर्ता की कंपनी आईएसओ 9000-HACCP, आईएसओ 14001 सर्टीफिकेशन होना चाहिए.

9. प्रशिक्षण एवं उपकरण केंद्र योजना (Mini Tools Room and Training Centre Scheme)

भारत सरकार ने योग्यता को निखारने के लिए पहले से ही काफी योजनाएं चला रखी है. इस योजना के जरिये सरकार के अधीन प्रशिक्षण एवं उपकरण केंद्र को सहायता प्रदान करने हेतु चलाया जाता है. यदि कोई व्यक्ति इस केंद्र को खोलकर चलाना चाहता है तो सरकार उसे सब्सिडी के रूप में आर्थिक सहायता प्रदान कती है. इसके अंतर्गत सरकार द्वारा 9 करोड़ या फिर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी लाभार्थी को दी जाएगी.  उपकरणों को अपग्रेड करने के लिए इसकी राशि50 करोड़ तक निर्धारित की गई है, या फिर लाभार्थी को कुल लागत की 75 प्रतिशत राशि सब्सिडी के तौर पर मिलेगी.

10. एनएसआईसी की मदद से छोटे उद्योगों को सरकारी सब्सिडी (Overnment Subsidy for Small Business from NSIC)

इस योजना में सरकार छोटी कम्पनियों को कच्चे माल को खरीदने में सहायता प्रदान करती है एवं दो तरह की सब्सिडी देती है. एक कच्चे माल हेतु एवं दूसरी मार्केटिंग में मदद के लिए सहायाता मिलती है. इसका उद्देश्य उच्च दर्जे का प्रोडक्ट बनाने की ओर कंपनियों को अग्रसर करना है. इस योजना द्वारा दी जाने वाली राशि कच्चे माल को खरीदने एवं देशी उत्पाद बनाने के लिए भी की जा सकती है.

11. लघु उद्योग के लिए कोल्ड चेन सब्सिडी (Subsidy for Small Business for Cold Chain)

इस योजना का मुख्य उद्देश्य इनके ढांचे को मजबूती देकर इनको बाजार में स्थापित करना है. इस योजना के तहत सरकार कोल्ड चेन उद्योग को अपनी यूनिट को सुधारने और अधिक से अधिक ग्राहक जोड़ने के लिए पूरी तरह से आर्थिक सहायता प्रदान करती है. इस योजना में ठंडक पैदा करने वाले यंत्रो का सुधार करने के लिए राशि प्रदान की जाती है. पुराने कूलर, रीफेर वैन (ठंडक पैदा करने वाला ट्रक या गाड़ी), कूलिंग यूनिट आदि पर सरकारी सहायात मिलती है. इस योजना में सरकार कार्बनिक उद्योग, प्रोसेसिंग यूनिट, समुद्री उत्पाद उद्योग, मत्स पालन, एवं मांस सम्बन्धी सभी उद्योगों को आर्थिक मदद देती है.  इन सब के अतिरिक्त एसएचसी, एनजीओ, एफपीओ, संगठन और समूहों को भी लाभ दिया जाता है.

12. नारियल उत्पादन इकाई विकास योजना या टीएमओसी) (Coconut Producing Units or TMOC)

इस योजना को टीएमओसी द्वारा संचालित किया जा रहा है. इसको नारियल से सम्बंधित उत्पादन करने वाले उद्योगों में तकनीकी सुधार के लिए चलाया जा रहा है. नारियल विकास बोर्ड का मुख्य उद्देश्य तकनीकी में बदलाव एवं उच्च स्तर प्रदान करना है. यह योजना हर उस व्यक्ति को लाभ देगी, जो नारियल सम्बन्धी उद्योग स्थापित करना चाहता है. सरकार इस योजना में स्थानांतरित शुल्क के बदले प्रौद्योगिकी तकनीकी में मदद करती है. इस स्कीम में नारियल से जुड़े लगभग सभी व्यापारों को रखा गया है, इसमें प्रमुख रूप से नारियल पानी उद्योग, खाद्य व्यापार, नारियल तेल निर्माण, सूखे दूध उत्पाद एवं नारियल पावर जैसे उद्योगों को शामिल किया गया है.

13. कृषि-समुद्री प्रोसेसिंग (सम्पदा) योजना (SAMPADA Scheme for Agro-Marine Produce Processing)

सम्पदा योजना कृषि प्रोसेसिंग केंद्र एवं समुद्री उत्पाद विकास एवं उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई है. इस योजना में सरकार ने किसानों के हित के लिए अच्छा खासा बजट तैयार किया है, जिसमे लगभग 6000 करोड़ की राशि का बजट है. इस योजना के अंतर्गत सरकार किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है.

14. डेयरी उद्योग में सरकारी छूट (Government Subsidy for Dairy Farming)

डेयरी फार्म खोलने एवं उसे मजबूती देने के लिए नाबार्ड सब्सिडी योजना के अंतर्गत इसे रखा गया है. इस योजना में सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादन, पशु पालन, एवं जैविक खाद के उत्पादन में ध्यान दिया जायेगा. सरकार इस योजना से किसान को कृषि समेत एक साथ, एक से अधिक व्यवसाय जैसे पशु पालन, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन करने का अवसर प्रदान करती है और आर्थिक देती है.

15. बागवानी के लिए सब्सिडी (Government Subsidy for Horticulture)

बागवानी के लिए सरकार ने सन् 1984 में एनएचबी का गठन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य बागवानी एवं फसल रखरखाव में तकनीकी का इस्तेमाल करना एवं तकनीकी विकसित करना था. बागवानी में पैदा होने वाले उत्पाद की मार्केटिंग, प्रचार-प्रसार, संरचना एवं मैनेजमेंट में आने वाले खर्च के लिए सरकार ने इस पर सब्सिडी की व्यवस्था की है.

English Summary: Best Small Business Ideas: start these 15 business with the help of central government, will get enough subsidy

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