गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस पर विजेता हुए पुरस्कृत

विश्वविद्यालय के प्रकाशन निदेशालय द्वारा हिन्दी दिवस के साथ-साथ हिन्दी सप्ताह समापन समारोह का आयोजन विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के पर्यावरण विभाग के सभागार में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, डॉ. ए.पी. शर्मा थे। अधिष्ठाता कृषि, डॉ. जे. कुमार, एवं अधिष्ठाता मानविकी डॉ. ए.के. शुक्ल, विशिष्ट  अतिथि के रूप में तथा प्रकाषन निदेषालय के प्रभारी अधिकारी, डॉ. नरेष कुमार, आयोजक के रूप में मंचासीन थे।

डॉ. ए.पी. शर्मा ने अपने मुख्य अतिथि के सम्बोधन में राष्ट्रपिता महात्मागांधी एवं पंतनगर विश्वविद्यालय के संस्थापक, प. गोविन्द बल्लभ पंत जी, के हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए किये गये प्रयासों की याद दिलायी। उन्होंने कहा कि अभी भी सम्मेलनों व्यवसायिक गोष्ठीयों व उच्च स्तर के कार्यक्रमों में अंग्रेजी का ही प्रयोग होता है तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अंग्रेजी में ही बनाये जाते है बाद में उनका हिन्दी अनुवाद किया जाता है। उन्होंने वर्तमान में हिन्दी की स्थिति को बेहतर बताया तथा आषा प्रकट की कि हिन्दी शीघ्र अपना नया मुकाम तैयार करेगी। उन्होंने भाषा को व्यक्ति की पहचान का सबसे बड़ा लक्षण बताया तथा हिन्दी को ऊंचा दर्जा देने के लिए सभी को संकल्प लेने का आह्वान किया।

अधिष्ठाता कृषि, डॉ. जे. कुमार ने कहा कि हिन्दी एक सषक्त भाषा है तथा उसे महत्व व सम्मान देने के लिए हिन्दी दिवस का आयोजन किया जाता है। उन्होंने अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में हिन्दी की स्थिति तथा वहां से प्रकाशित होने वाले पत्र-पत्रिकाओं के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि अमेरीका सहित विश्व के अनेक राष्ट्रों के 176 विश्वविद्यालयों में हिन्दी का अध्ययन-अध्यापन जारी है। डॉ. जे. कुमार ने यह भी कहा कि हिन्दी बोलने में हमें गर्व महसूस करना चाहिए जबकि देखा यह जाता है कि जब हमें कोई बात प्रभावशाली बनानी होती है तो हम उसे अंग्रेजी भाषा में बोलने का प्रयास करते है। ऐसा क्यूं है, इस पर विचार किये जाने की आवश्यकता है।

अधिष्ठाता मानविकी, डॉ. ए.के. शुक्ल ने हिन्दी शब्द की उत्पति के साथ इसकी देश में व्यापकता के बारे में बताया। भारत के एक बडे़ भूभाग की मात्र भाषा हिन्दी होने तथा गुजराती, पंजाबी, उर्दू, बंगाली इत्यादि भाषाओं का हिन्दी से मिलती जुलती होने के कारण उन्होंने देश में हिन्दी को लोगों के बीच सूत्रधार बताया। साथ ही विश्व में इसकी लोकप्रियता का मूल कारण इसमें छिपे भारत की सांस्कृति, योग इत्यादि के ज्ञान को पाने की चाह को बताया। उन्होंने हिन्दी का सम्मान राष्ट्र ध्वज व राष्ट्रगान की तरह करने को कहा। 

कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रकाशन निदेशालय के प्रभारी अधिकारी, डा. नरेष कुमार ने हिन्दी दिवस से पूर्व आयोजित हिन्दी सप्ताह का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा उपस्थित अतिथियों एवं अन्य सभी का स्वागत किया। डा. ए.पी. शर्मा व अन्य अतिथियों ने हिन्दी सप्ताह की विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजित विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किये। अंत में श्रीमती सीमा श्रीवास्तव ने सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम का संचालन भी किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेषक, प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी व विद्यार्थियों के साथ-साथ पंतनगर परिसर में स्थित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रधानाध्यापिका, शिक्षक, शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक भी उपस्थित थे।

 

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