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अमीरों को रेवड़ी और किसानों को कौड़ी

Varun Gandhi

अभी हाल में हुए पांच राज्यों के चुनाव में मुख्य मुद्दा किसानों की समस्या थी. अब ये साफ नजर आने लगा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में भी यही मुख्य मुद्द्दा रहेगा। ऐसे में भाजपा से सुल्तानपुर के बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने किसानों को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है उनके इस बयान से उनकी पार्टी बीजेपी भी सवालों के घेरे में खड़ी हो गयी है. आपको बता दें की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी बीजेपी सरकार पर हमेशा आरोप लगाते हुए आये हैं कि सरकार किसानों से ज्यादा उद्योगपतियों की मदद कर रही है. वरुण गांधी ने भी कुछ ऐसा ही आरोप लगाया है.

इण्डिया डायलॉग कार्यक्रम में अपने सम्बोधन के दौरान वरुण गांधी ने कहा की" देश का किसान हमेशा से ही हाशिये पर रहा है" उन्होंने कहा है की साल 1952  से 2019 तक जितना पैसा सरकारों ने देश के 100 उद्योगपतियों को दिया है उसका 17 फीसदी भी किसानों को नहीं दिया गया है. इससे सीधे तौर पर दिखाई देता है की देश की 70 फीसदी को गत 67 सालों में जितनी आर्थिक मदद राज्य और केंद्र सरकारों ने मिलकर दी, उससे कई गुना ज्यादा पैसा केवल 100 धनी परिवारों को दे दिया गया. वरुण गांधी ने एक ट्वीट भी किया है -

Varun Gandhi, BJP: Only 17% of all money that has been paid out to the top 100 industrial families of India from 1952 to 2019, has been paid to every single farmer, centre & state together, in this country. If there is not a more shameful statistic,I don't know what it is.(06.01) pic.twitter.com/lMpyJKr1eW

— ANI (@ANI) January 7, 2019

वरुण गाँधी का मानना है कि ज्यादातर किसानों को किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है और जब देश में किसानों की बात की जाती है तो पूरे देश में एक बवाल मच जाता है. आर्थिक पंडित लोग बताने लगते है की आप तो किसानों को मुफ्तखोर बनाने में लगे हुए हो. लेकिन हम इस बात पर विचार करेंगें कि देश के अंतिम आदमी या किसान तक लाभ कैसे पहुंचे। साल 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने एक स्कीम चलाई थी जिसमे कहा गया था कि देश के सभी सांसद एक क्षेत्र के गांव को गोद लें, तो हमने भी गोद लिया मगर हमने देखा कि आप सड़क बनाएं, पुलिया बनाएं, सोलर पैनल लगाएं, लेकिन फिर भी लोगों की आर्थिक स्थिति में बदलाव नहीं हुआ. यहां तक कि बच्चों के स्कूल जाने की संख्या में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।



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