व्यापारी इस प्रकार करते हैं किसानों से ठगी...

 

किसान को हर कोई अपनी धरोहर समझता है फिर चाहे वो कोई सरकारी अधिकारी हो, नेता हो या फिर कोई बिचौलिए हो. किसान को जैसे चाहा वैसे इस्तेमाल किया और फिर छोड़ दिया. इसके कई कारण हैं जिससे किसानों को हमेशा से ठगा जाता रहा है.

आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिससे कि किसान अपने साथ होती ठगी से बच सकते हैं...

कैसे चोरी होती है किसानों के साथ: 

जब भी कोई किसान मंडी में या किसी बड़े व्यापारी को अपना उत्पाद बेचने जाता है तो उसके साथ सबसे ज्यादा ठगी उसी समय होती है. जब वह अपने सामान को तराजू या कांटे पर तौलता है. सामान तौलने का यंत्र इलेक्ट्रॉनिक हो या फिर हस्तचालित दोनों में आसानी से गड़बड़ी की जा सकती है. किसी भी छोटे कांटे में 100  ग्राम से लेकर 1.50 किलो तक कि गड़बड़ी आसानी से की जा सकती है. इसके अलावा बड़े काँटों में कई किलो तक गड़बड़ी आसानी से की जा सकती है. ऐसे में यदि कोई किसान 1 क्विंटल उत्पाद मंडी में जाकर बेचता है और प्रतिकिलो में उसको 100 ग्राम का भी नुकसान होता है तो कुल मिलाकर एक किसान को प्रति क्विंटल पर 10 किलो तक का नुकसान हो सकता है. इसका फायदा सीधे खरीदार और बिचौलिए को मिलता है.

इस ठगाई से कैसे बच सकते हैं किसान

किसानों के साथ होने वाली इस ठगी से वो आसानी से बच सकते हैं. इसके लिए किसानों को बस कुछ सावधानिया बरतने की जरुरत है. 

उत्पाद को बेचने से पहले खरीदार के विषय में अच्छे से जान लें. जरुरी है कि किसानों को चाहिए यदि वो अपना कोई भी उत्पाद बेचने जा रहें है बेशक वो मंडी में बेचे या फिर किसी व्यापारी को. खरीदार के विषय में अच्छे से जान ले तभी अपना कोई भी सामान बेचे.

कांटे को अच्छे से जांच लें: किसानों को चाहिए की जो सामान वो किसी को भी बेच रहे है उसके कांटे की अच्छे से जांच कर ले कि उसका काँटा जांचने तौल भारतीय मानक ब्यूरों द्वारा प्रमाणित है भी या नहीं. यदि वह कांटा भारतीय मानक ब्यूरों द्वारा प्रमाणित नहीं है तो उस पर उत्पाद को न तौले.

तौल के समय रखे ध्यान:  किसानों को चाहिए की वो तौल के समय कांटे की माप पर ख़ासा ध्यान रखे अन्यथा खरीदार तौल में छोटा-छोटा अंतर करके भी बहुत ज्यादा कम लेता है और किसान हाथ मलता रह जाता है. 

लेन–देन के समय दे ध्यान: किसान जब भी मंडी में या किसी व्यापारी के साथ लेन-देन के समय यह ध्यान रखे कि जो कीमत वह व्यापारी से अपने माल की लगा रहा है. सही मायनों में वही उसकी कीमत है. उत्पाद को बेचने से पहले किसान आस-पास के मंडी में उत्पाद के ताजा भाव का हमेशा ज्ञान रखे. इससे कभी भी किसान उत्पाद के मूल्य में धोखा नहीं खा सकते.

ऑनलाइन उत्पाद का मूल्य चेक करे: किसान को चाहिए कि जब भी वो कोई उत्पाद मंडी में बेचे तो उससे पहले वो ऑनलाइन जाकर मंडी में भाव चेक कर ले या फिर अख़बार में रोज का मूल्य रोज देखे लें.  

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