‘कृषि जागरण’ की विशेष पहल ‘फार्मर द जर्नलिस्ट’ आज देशभर में ग्रामीण पत्रकारिता को एक नई दिशा दे रही है. इसी पहल के तहत बिहार के समस्तीपुर जिले के रामजी कुमार ने खेत-खलिहानों से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. वे वर्तमान में ‘Farmer The Journalist’ के अंतर्गत बिहार कमेटी में कार्यकारी सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. उनकी रिपोर्टिंग का केंद्र हमेशा किसान, खेती, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण समाज रहा है. यह पहल उन्हें केवल मंच ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर भी प्रदान करती रही है. आज रामजी कुमार इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही प्लेटफॉर्म मिले तो गांव की आवाज़ भी देश के बड़े मंचों तक मजबूती से पहुंच सकती है.
‘फार्मर द जर्नलिस्ट’: किसानों को कलम की ताकत
‘कृषि जागरण’ द्वारा शुरू किया गया ‘फार्मर द जर्नलिस्ट’ अभियान इस विचार पर आधारित है कि किसान स्वयं अपनी कहानी सबसे बेहतर ढंग से कह सकता है. यह पहल किसानों और ग्रामीण युवाओं को पत्रकारिता का मंच देती है, ताकि वे खेती, मौसम, फसल रोग, सरकारी योजनाओं और स्थानीय समस्याओं को सीधे समाज और नीति-निर्माताओं तक पहुंचा सकें.
रामजी कुमार ने इसी मंच के माध्यम से अपनी पहचान बनाई. उन्होंने किसानों की वास्तविक समस्याओं- जैसे सूखा, बाढ़, जलवायु परिवर्तन यानी बदलता मौसम, लागत में बढ़ोतरी और बाजार की चुनौतियां को तथ्यात्मक और शोधपरक अंदाज में प्रस्तुत किया. उनकी रिपोर्टिंग में केवल भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि डेटा, जमीनी अनुभव और किसानों की प्रत्यक्ष आवाज़ शामिल होती है. यही वजह है कि उनकी लेखनी ने व्यापक प्रभाव डाला.
आईआईटी कानपुर से मिली ₹1,00,000 की फैलोशिप
रामजी कुमार की गंभीर और शोध-आधारित पत्रकारिता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है. उनकी रिपोर्टिंग से प्रभावित होकर Indian Institute of Technology Kanpur के जस्ट रिसर्च ट्रांजैक्शन सेंटर ने उन्हें फैलोशिप प्रदान की है. इस सम्मान के तहत उन्हें ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की राशि दी गई.
यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि उनकी मेहनत, प्रतिबद्धता और कृषि पत्रकारिता में योगदान की औपचारिक मान्यता भी थी. ‘Farmer The Journalist’ के मंच से निकले एक ग्रामीण पत्रकार को देश के प्रतिष्ठित संस्थान से मिला यह सम्मान इस पहल की विश्वसनीयता और प्रभाव को भी दर्शाता है. इससे यह सिद्ध हुआ कि गांव की जमीनी रिपोर्टिंग भी अकादमिक और शोध संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.
‘मैं मीडिया’ से भी मिला फैलोशिप
रामजी कुमार को बिहार के चर्चित डिजिटल प्लेटफॉर्म Main Media द्वारा भी फैलोशिप प्रदान की गई है. इस फैलोशिप के अंतर्गत उन्होंने किसानों और जलवायु परिवर्तन पर एक विशेष स्टोरी तैयार कीं. इन रिपोर्टों में सीमांचल और उत्तर बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों का गहन अध्ययन शामिल था.
उन्होंने दिखाया कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, लेकिन नवाचार और सामुदायिक प्रयासों से उम्मीद की नई कहानियां भी सामने आ रही हैं. रामजी कुमार को मिला फैलोशिप यह सम्मान न केवल उनकी लेखनी की शक्ति का प्रमाण है, बल्कि ‘फार्मर द जर्नलिस्ट’ पहल के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का परिणाम भी है.
‘कृषि जागरण’ का मंच: पत्रकार नहीं, आवाज़ तैयार करना
रामजी कुमार स्वयं स्वीकार करते हैं कि किसानों और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर लिखने की प्रेरणा उन्हें ‘कृषि जागरण’ से मिली. ‘Farmer The Journalist’ ने उन्हें सिर्फ खबर लिखना नहीं सिखाया, बल्कि किसानों की आवाज़ को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना सिखाया.
इस पहल ने उन्हें नेटवर्क, संपादकीय सहयोग और राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया, जिससे उनकी रिपोर्टिंग का दायरा व्यापक हुआ. आज वे न केवल बिहार, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कृषि और ग्रामीण मुद्दों पर सक्रिय रूप से लिख रहे हैं.
सफलता की असली परिभाषा
रामजी कुमार की सफलता केवल ₹1,00,000 फैलोशिप राशि तक सीमित नहीं है. उनकी वास्तविक उपलब्धि यह है कि उनकी रिपोर्टिंग ने किसानों की समस्याओं को व्यापक समाज और नीति-निर्माताओं तक पहुंचाया.
‘फार्मर द जर्नलिस्ट’ अभियान के माध्यम से उन्होंने साबित किया कि यदि इरादा मजबूत हो और मंच सही हो, तो गांव की मिट्टी से उठी आवाज़ भी राष्ट्रीय पहचान बना सकती है. आज वे उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो पत्रकारिता को समाज परिवर्तन का माध्यम मानते हैं.
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