नैनो उर्वरक से बदलेगी कृषि का स्वरूप

देश की सबसे बडी उर्वरक कंपनी इफको के निदेशक उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि फसलों की लागत की बढोतरी के लिये के लिए रसानियक उर्वरक के प्रयोग मात्रा काफी हद तक बढ गई है. इसलिए उनकी कंपनी नैनो उर्वरक का उत्पादन करेगी. इसके साथ उन्होने यह भी कहा कि उनकी कंपनी एक ऐसा उर्वरक लायेगी जो मात्र दो ग्राम में एक टन उर्वरक के बराबर होगा उन्होने इसके शोध के लिए गुजरात में एक प्रयोगशाला की स्थापना भी की है डॉ. तरफदार पौधा पौषण पर शोध कर रहे है उन्होने बताया की वह पुराने समय के वेदों में उर्वरक के जो सूत्र दिये गए है वह उन पर काफी समय से काम कर रहे है. डॉ. यु.एस. अवस्थी ने कहा की जिस प्रकार हमारे मानव शरीर को ऊर्जा के लिए भोजन की जरूरत होती है उसी प्रकार हमारी फसलों को भी रसायनिक उर्वरक की जरूरत होती है. आज के समय में कृषि 52 प्रतिशत ही रह गई है किसानों को इतना मुनाफा नहीं हो रहा जिस कारण ज्यादातर किसान खेती से दूर होते जा रहे है.

जिस कारण हमारी राष्ट्रिय आय में कृषि का 14 प्रतिशत हिस्सा ही जाता है। 1960 ई. में कृषि का उत्पादन बढाने के लिए किसानो ने यूरिया का इस्तेमाल करना प्रारंभ किया। इसकी शुरूवात होने के बाद  फास्फेट और पोटाश को इसमें शामिल किया गया ओर इसमें डीएपी का भी प्रयोग किया गया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से रासायनिक उर्वरको के प्रयोग से ज्यादातर भूमि की उर्वरक शक्ति नष्ट होती जा रही है जिस कारण पौधों में कई तरह की बिमारियों ने घर कर लिया है.

डॉ यू.एस. अवस्थी ने कहा कि इफको एक सरकारी कंपनी होने के नाते किसानो के लिए एक वरदान साबित होगी. वह किसानो के लिए कम मूल्य पर उर्वरक तथा उत्पादन  उपलब्ध करवा रही है जिससे किसानो को खेती करने में काफी मददगार रहेगी। अगर सरकार किसानो को कृषी संबंधित सुविधाए मुहैया करवाई जाए तो आने वाले कुछ सालों में कृषि के भविष्य में दूसरे देशों की तुलना काफी हद तक बढोतरी हो सकती है। सरकार ने किसानो की आय में बढोतरी की है उन्होने कहा कि देश में काफी सुधार हुए ओर इसके साथ कई तरह के बदलाव भी हुए है सहकारिता क्षेत्र में आए बदलाव भविष्य में हमारे लिये हर्ष एवं उल्लास लेकर आएंगे. जिससे हमारे देश की प्रगति होगी ओर हमारा देश अन्य देशों की तुलना आगे बढ़ेगी.

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