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MOTHERS DAY: जननी के चरणों में चारों धाम, देवताओं से पहले मां का नाम

भले पूरी दुनिया के लिए आज मदर डे हो, लेकिन युगों पहले हमने विश्व को बताया कि 'मातृ देवो भव'. यानि कि मां का स्थान ईशवर से भी ऊपर है. बच्चों की प्रथम गुरू मां ही उन्हें संसार से अवगत कराती है. एक नवजात के लिए जहां मां की गोद ही मानों संसार होती है, तो वहीं मां की दुनिया भी नवजात के आस-पास सीमट कर रह जाती है. धीरे-धीरे बड़े होने के क्रम में इंसान कई रिश्ते बनाता है. कुछ रिश्ते टूट जाते हैं, कुछ साथ नहीं निभा पातें तो कुछ बेवफाई कर जाते हैं, लेकिन मां जीवन के तपते धूप में सदैव वटवृक्ष के समान छाव प्रदान करती है. मां कभी बच्चों का अहित नहीं चाहती. इसलिए कहा गया है कि 'कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति', यानि कि संसार में एक पूत कपूत हो सकता है, लेकिन एक माता कभी कूमाता नहीं हो सकती.

वेदों में वर्णित है कि 'माता गुरुतरा भूमेरू', यानि कि मां का भार धरती से भी अधिक है. यहां मां की तुलना धरती की गई है, क्योंकि मां धरती की तरह ही अपने सभी बच्चों को बिना कोई भेद किए समान प्यार करती है. धरा के समान ही वो शांत एवं सुंदर है. धरा के समान ही उसकी सहनशीलता महान है. मां के ममत्व की ताकत के बारे में पहले ही बहुत कुछ देखा, सुना और कहा जा चुका है. लेकिन विश्व प्रख्यात महान विज्ञानक थॉमस अल्वा एडिसन का एक स्मरण आज भी अतुलनिय है. अपने जीवन के एक घटना का जिक्र करते हुए वो कहते हैं कि वो छात्र जीवन में पढ़ने लिखने में बहुत कमजोर थे. एक दिन उनके शिक्षक ने एक पत्र देते हुए कहा कि जाओं इसे अपनी मां को दे देना.

शिक्षक की बातों का अनुसरण करते हुए एडिसन ने वह पत्र अपनी मां को दिखाया, जिसे देख उनकी मां की आखों में आंसू आ गए. एडिसन ने जब मां से पूछा कि पत्र में क्या लिखा है, तो मां ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ''तुम्हारें शिक्षक ने तुम्हारी प्रशंसा करते हुए कहा है कि तुम पढ़ने लिखने में बाकि बच्चों से बहुत होशियार हो, लेकिन बेटा तुम्हारे स्कूल में ऐसे शिक्षक ही नहीं हैं, जो तुम्हें पढ़ा सकें.'' उस दिन के बाद से उनकी मां ही एडिसन के लिए स्कूल एवं शिक्षक हो गई. मां के मार्गदर्शन में ही एडिसन अपनी शिक्षा पूरी करते हुए धीरे-धीरे विश्व के महान विज्ञानिक बन गए.

कई वर्षों बाद मां के गुजर जाने पर एक बार यादगार चीजों की साफ-सफाई में एडिसन के हाथ वहीं पत्र लग गया. एडिसन ने उतसुक्तावश जब उसे खोलकर पढ़ा तो वो फूट-फूटकर रोने लगे. क्योंकि पत्र में वैसा कुछ नहीं लिखा था, जैसा उनकी मां ने बताया था, बल्कि उसमे लिखा था कि " आपका बच्चा मानसिक तौर पर पागल है और इसलिए हम उसे स्कूल से निकाल रहे हैं. मिसेस एलिओट दरअसल सत्य तो यह है कि आपके पागल बच्चे को दुनियां का कोई भी स्कूल पढ़ा ही नहीं सकता और इसलिए हमारा सुझाव है कि आप इसे घर में ही बैठाएं." यह सब पढ़ने के बाद एडिसन घंटों रोए एवं बाद में उन्होंने इस बारे में अपनी डायरी में लिखा कि "मैं जन्म से एक पागल था, लेकिन मेरी मां की कठोर तप्सया, परश्रिम एवं विश्वास ने मुझे विश्व का महान वैज्ञानिक बना दिया''

English Summary: mothers day 2019 special

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