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मोदी सरकार की तर्ज पर ममता सरकार ने भी लिया ऐसा फैसला, 68 लाख किसानों के लिए किया ये बड़ा ऐलान

सचिन कुमार
सचिन कुमार

Mamta Banerjee

सियासी गलियारों से लेकर गांव की पगडंडियों तक अभी किसानों के हित में लिए गए ममता बनर्जी सरकार के उस फैसले की जमकर चर्चा हो रही है, जिसमें केंद्र सरकार की तर्ज पर किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में इथेनॉल के उत्पादन को मंजूरी दे दी गई है.

ममता सरकार के इस फैसले को केंद्र की मोदी सरकार से जोड़कर इसलिए देखा जा रहा है, क्योंकि साल 2018 में केंद्र सरकार ने देश में इथेनॉल के उत्पादन को मंजूरी दे दी थी. इसके लिए केंद्र सरकार साल 2018 में संसद में ‘केंद्रीय बॉयो फ्यूल’ नीति लेकर आई थी.उस वक्त सरकार के इस फैसले को आगामी २०२२ तक किसानों की आय को दोगुना करने के मकसद से भी जोड़कर देखा गया था.

वहीं, अब जब ममता बनर्जी सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के मकसद से केंद्र की तर्ज पर दो साल बाद यह फैसला लिया तो, सियासी गलियारों से लेकर खेत- खलिहानों तक उनके इस फैसले की खूब प्रशंसा हो रही है. तफ़सील से जानिएं कि आखिर क्या है ममता बनर्जी सरकार का यह फैसला

ममता सरकार में उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी ने सरकार के इस फैसले पर कहा कि, प्रदेश सरकार ने टूटे चावल से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है. आज ममता सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है और आगे इसके लिए व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में हम प्रतिबद्ध है. 

हमारी सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है. इससे जहां किसानों की आय में इज़ाफा होगा. वहीं वह आत्मनिर्भर भी बनेंगे. लेकिन अब ममता सरकार के इस फैसले पर सियासी गलियारों में इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब केंद्र सरकार ने आज से दो साल पहले ही इथेनॉल के उत्पादन को मंजूरी दे दी थी तो भला दो साल का विलंब क्यों किया गया ? इस लेख में आगे पढ़ें  इथेनॉल के फायदों के बारे में

इथेनॉल क्या है?

इथेनॉल एक प्रकार का एल्कोहल है. जिसका पेट्रोल में इस्तेमाल किया जाता है. इसके इस्तेमाल से जहां प्रदूषण कम होता है. वहीं, बाजार में बढ़ती इसकी मांग को ध्यान में रखते हुए अब सरकार इसके उत्पादन को मंजूरी दे चुकी है. इथेनॉल में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी कम मात्रा में होता है.

2006 से नीतीश कुमार कर रहे हैं इसकी मांग

 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साल 2006 से ही इथेनॉल के उत्पादन की मांग कर रहे थे. उनका भी कहना था कि बाजार में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए अगर हम इसके उत्पादन को मंजूरी देते हैं, तो इससे जहां वातावरण प्रदूषणरहित होगा, वहीं किसानों की आय में भी इजाफा होगा.

इतने लंबे अर्से की मांग के बाद केंद्र सरकार ने साल २०१८ में इसकी मंजूरी दी थी. इससे पहले केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी कई बार कह चुके हैं कि इससे किसानों की आर्थिक स्तिथि ठीक होगी.

वहीं, किसानों के जीवन में भी इथेनॉल का उत्पादन बड़ा परिवर्तन लेकर आया है. पहले गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाने की वजह से आर्थिक कठिनाइओं का सामना करना पड़ता था. लेकिन जब से गन्ने से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है, तबसे किसानों की किस्मत ही चमक गई है.अब ऐसे में ममता बनर्जी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम  प्रदेश के किसानों के जीवन में क्या परिवर्तन लेकर आता है. यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा.

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English Summary: Mamta Banerjee government took this big decision on the lines of central government

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