भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, बांका द्वारा राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची से प्रायोजित “लाख कीट आनुवंशिक संसाधन संरक्षण पर नेटवर्क परियोजना” के अंतर्गत बांका जिले में दिनांक 23 मार्च 2026 को “वैज्ञानिक लाख उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया. इस प्रशिक्षण में होस्ट प्रबंधन, ब्रूड लाख चयन, कीट नियंत्रण, कटाई पश्चात प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर जानकारी दी गई, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके.
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि बांका में अनुकूल परिस्थितियों के कारण लाख उत्पादन की अच्छी संभावनाएँ हैं. उन्होंने उन्नत तकनीकों, ब्रूड इनोकुलेशन एवं समय पर कटाई के महत्व पर बल देते हुए कहा कि लाख उत्पादन लघु एवं सीमांत किसानों के लिए एक लाभकारी आजीविका विकल्प बन सकता है.
डॉ. बिजेंद्रू कुमार, प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, बांका ने किसानों को निरंतर तकनीकी सहयोग एवं प्रशिक्षण देने की बात कही. डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने अपने संदेश में बताया कि लाख उत्पादन छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए एक संभावनाशील आजीविका विकल्प है तथा इसके सतत विकास हेतु वैज्ञानिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजारोन्मुख प्रयास आवश्यक हैं. डॉ. संजय कुमार मंडल, एसएमएस, केवीके बांका ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समन्वय किया.
कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. मोनोब्रुल्लाह, डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. संजय कुमार मंडल सहित अन्य कर्मियों का सराहनीय योगदान रहा. प्रगतिशील किसान मुंशी मरांडी ने बताया कि लाख की खेती शरीफा एवं अरहर पर भी की जा सकती है. कार्यक्रम में लगभग 50 किसानों ने भाग लिया और प्रशिक्षण से संतोष व्यक्त किया.
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