कृषि तकनीकियों के आदान-प्रदान हेतु केवीके द्वारा एक्सपोजर विजिट का आयोजन - कुलपति

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति प्रो. एस. के. राव ने उज्जैन केवीके भ्रमण के दौरान पूर्व प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा में कहा कि वे केवीके द्वारा भी एक्पोजर विजिट का आयोजन करेंगे जिसके तहत किसान भाई व बहनें दूसरे जिलों एवं प्रदेशों में आयोजित होने वाली कृषि प्रदर्शनियों से तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर अन्य कृषकों से साझा करेंगे। वे बतौर मुख्य अतिथि पूर्व प्रशिक्षणार्थी मिलन कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने जापान की खेती एवं भारत की खेती का अंतर बताया। साथ ही उन्होंने बताया कि देश में गेहूँ, बाजरा, ज्वार आदि की खेती से आवश्यकता से 30-40 प्रतिशत अधिक उपज प्राप्त की जाती है लेकिन एक ही तरह की फसल प्रणाली अपनाने से किसानों को नुकसान होता है

वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य प्राप्ति हेतु केवीके उज्जैन में समन्वित खेती प्रणाली के अंतर्गत नई इकाइयों जैसे बायोगैस, केंचुआ खाद, बकरी पालन इकाई का उद्घाटन कुलपति के करकमलों द्वारा हुआ। इस अवसर पर डॉ. आर.एन.एस. बनाफर, संचालक विस्तार सेवाएं, डॉ. यू.पी.एस. भदौरिया, संयुक्त संचालक विस्तार, डी.के. पाण्डेय, संयुक्त संचालक, किसान कल्याण व कृषि विकास, उज्जैन संभाग, केवड़ा, उपसंचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, उज्जैन भी उपस्थित रहे।

इसी क्रम में डॉ. आर. पी. शर्मा के मार्गदर्शन में किए जा रहे कार्यों जैसे फसल संग्रहालय, पोषक वाटिका, फलोद्यान आदि का निरीक्षण कर केंद्र द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। पूर्व प्रशिक्षणार्थी मिलन कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती को दीप प्रज्जवलित कर किया गया। वहीं डॉ. बनाफर ने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए प्रसंस्करण एवं फूलों की खेती पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने रावे छात्रों की समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर योगेंद्र कौशिक, इंदर सिंह, निहाल सिंह, भीमा सिंह चंदेल, श्री शर्मा आदि कृषकों ने चर्चा के दौरान अपनी उपलब्धियों के बारे में बताया। भीमा सिंह चंदेल ने कहा कि उन्होंने केंद्र से बकरीपालन का प्रशिक्षण लिया। तदोपरांत बकरीपालन इकाई स्थापित कर प्रतिवर्ष रूपये 80,000@& के अतिरिक्त आय प्राप्त की।

एक ही तरह की फसल प्रणाली अपनाने से किसानों को नुकसान होता है। साथ ही किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए एक ही फसल नहीं बल्कि समन्वित खेती अपनानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जर्मनी व अन्य देश पहले आबादी की जरूरत का सर्वे करते हैं और फिर जिस कमोडिटी की जितनी आवश्यकता होती है उतना ही उत्पादन लिया जाता है। उन्होंने बताया कि काबुली चने में ड्रिप से सिंचाई करें तो 45 क्विंटल अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

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