के.वी.के. पन्ना द्वारा जनवार में आदिवासी कृषकों को मुनगा के पौधे वितरण

कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के डॉ. बी. एस. किरार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख एवं श्री डी. पी. सिंह द्वारा गांव जनवार में आदिवासी कृषकों को मुनगा पौधे किस्म पी.के.एम-1 वितरण किये गये और उन्हें पौधे रोपणे की तकनीक की भी जानकारी दी गई । डॉ. बी. एस. किरार ने मुनगा के पत्तियों, फूलों एवं फलियां काफी पौष्टिक तत्वों से भरपूर रहे।मुनगा की पत्तियों एवं फूलों को सुखाकर चूर्ण के रूप में या सब्जियों के रूप में उपयोग किया जाता है और उनकी फलियां का सब्जियों के रूप में उपयोग की जाती हैं। इनकी पत्तियों में 9.4 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है और फलियों में ओलिक एसिड तथा पत्तियों में विटामिन ए,  सी, रायबोफ्लोबिन एवं नियासीन की अधिकता पाई जाती है। उन्होंने बताया कि फलियों में बिटामिन बी-6, बी-1 और फोलिक एसिड भी पाया जाता है। इसके अलावा पत्तियों में कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, कॉपर, मैग्नीज आदि पोषक तत्व पाये जाते हें। मुनगा में कोलेस्ट्रोल की मात्रा शून्य प्रतिशत पाई जाती है। डॉ. डी. पी. सिंह द्वारा मुनगा की रोपाई के लिए गड्ढे का आकार लम्बाई 1.5 फीट, चौड़ाई 1.5 फीट, गहराई 1.5 फीट रखें। फिर उसमें बरगद, पीपल, गूलर, नीम, महुआ, पेड़ों की नीचे की उपजाऊ मिट्टी और गोबर खाद एक एक तसला (ढोकरी) का मिश्रण मिलाकर गड्ढे को भरकर पौधा लगायें। पौधे को लगाकर चारों तरफ से ठीक से मिट्टी दबा देना चाहिए। प्रत्येक गड्ढे में पौधा लगाने से पहले 250 ग्राम डी.ए.पी. और एम.ओ.पी. 100 ग्राम मिट्टी में मिला देना चाहिए साथ ही कृषकों को कद्दूवर्गीय सब्जियों की फसलों का वैज्ञानिकों ने कृषकों के साथ अवलोकन किया और उन्हें कीड़े एवं बीमारियों की पहचान एवं उनके प्रबंधन के उपाय बताये गये।

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